हरिद्वार। उत्तराखंड में बहुचर्चित हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है. भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए सरकार ने इस मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त और DM पर कड़ी कार्रवाई की है. नगर आयुक्त रहे वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है. वहीं, तत्कालीन DM कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध मेजर पनिशमेंट लगाए जाने का निर्णय लिया गया है. दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को संस्तुति भेजी गई. आइए जानते हैं आखिर क्या है हरिद्वार भूमि खरीद घोटाला, जिसमें दो बड़े IAS अधिकारी नप गए?
नगर निगम हरिद्वार में जमीन खरीद घोटाले की मुख्य बातें…
- 19 सितंबर 2024 से 33 बीघा जमीन खरीद की कागजी प्रक्रिया शुरू हुई.
- खरीदने से पहले इस जमीन को 6 अक्टूबर 2024 को 143 की श्रेणी में बदला गया.
- 26 अक्टूबर तक जमीन खरीद के पूरे कागज तैयार कर लिए गए.
- नवंबर 2024 में 3 अलग-अलग तारीखों में, अलग-अलग लोगों से 33 बीघा जमीन खरीद ली गई.
- 13 करोड़ की जमीन को नगर निगम ने ₹53.70 करोड़ में खरीदा.
- आवेदन की तिथि से परवाना अमलदरामद होने तक मात्र 6 दिन में तत्कालीन SDM अजय वीर सिंह ने सारा काम निपटा दिया.
- अधिकारियों के इस खेल से सरकारी राजस्व को करीब ₹39 करोड़ से अधिक का चूना लगा.
- हरिद्वार मेयर किरण जैसल ने मामले को जोर-शोर से उठाया. मामला CM ऑफिस तक पहुंचा.
- CM ऑफिस ने विभागीय जांच के आदेश दिए. शुरुआती जांच में सभी अधिकारी दोषी पाए.
- 3 जून 2025 को तत्कालीन DM हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और SDM अजय वीर सहित 12 लोग सस्पेंड कर दिए गए.
- आगे की जांच राज्य के विजिलेंस विभाग को सौंप दी गई.
हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले की पूरी कहानी
यह पूरा मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा सराय गांव में खरीदी गई 33 बीघा एक भूमि से जुड़ा है. आरोप है कि नगर निगम ने जिस जमीन को खरीदा, वह कूड़े के डंपिंग ग्राउंड के पास स्थित कृषि भूमि थी और उसकी खरीद की कोई तत्काल आवश्यकता भी नहीं थी. बावजूद इसके, भूमि खरीद प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया गया.
जांच में सामने आया कि जिस कृषि भूमि की वास्तविक कीमत करीब 13 से 15 करोड़ रुपए आंकी गई थी, उसे खरीद प्रक्रिया के दौरान महज छह दिनों के भीतर वाणिज्यिक भूमि घोषित कर दिया गया. इसके बाद उसी जमीन को नगर निगम ने लगभग 53.70 करोड़ रुपए में खरीद लिया. इस सौदे से सरकारी खजाने को करीब 39 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान होने की आशंका जताई गई. मामले के सामने आने के बाद इसे उत्तराखंड के सबसे चर्चित भूमि घोटालों में से एक माना जाने लगा.
जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचने के बाद शासन स्तर पर इसकी विस्तृत जांच कराई गई. सचिव स्तर के अधिकारी की अगुवाई में हुई जांच में भूमि खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी की पुष्टि हुई. करीब 100 पन्नों की जांच रिपोर्ट में कई प्रशासनिक और प्रक्रियागत खामियों का उल्लेख किया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भूमि चयन, मूल्यांकन और खरीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था. संबंधित अधिकारियों ने अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया.
पहले 12 अधिकारियों को किया गया था निलंबित
प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद सरकार ने तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कुल 12 अधिकारियों को निलंबित कर दिया था. इनमें दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी भी शामिल थे. सरकार ने इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे मामले की गहन जांच-पड़ताल कराई. जांच पूरी होने के बाद अब दोषी IAS अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को और आगे बढ़ाया गया है.
SDM के खिलाफ भी कार्रवाई
सरकार ने उस समय के SDM अजयवीर सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. उनके सेवा अभिलेख में परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने के साथ-साथ तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने का फैसला लिया गया है. शासन का मानना है कि भूमि खरीद प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सतर्कता और जवाबदेही नहीं बरती गई, जिसके चलते सरकारी धन के दुरुपयोग की स्थिति पैदा हुई.
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार और जनधन के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि हैं. दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी. मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि जनता के पैसे का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा. भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी.







