नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के कर्मियों को प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाज देने के लिए एमसीडी एम्पलाइज हेल्थ स्कीम तो लागू कर दी है लेकिन इसका लाभ कर्मचारी कैसे लेगें इसकी व्यवस्था नहीं की गई है। इसकी वजह से कर्मचारी इस असमंजस में हैं कि इस हेल्थ स्कीम का लाभ कैसे लेंगे। क्योंकि दिसंबर और जनवरी के वेतन में से इस हेल्थ स्कीम में पद व ग्रेड अनुसार को आंशिक अंशदान होना चाहिए वह होने लगा है।
लेकिन न तो अभी तक कर्मचारियों के आश्रितों की लिस्ट बनी है और न ही कोई मेडिकल कार्ड बना है। वहीं, इस मामले में एमसीडी के प्रेस एवं सूचना निदेशक अनिल यादव से जवाब मांगा गया लेकिन कोई उत्तर नहीं आया।
दिल्ली नगर निगम की इस योजना के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की तर्ज एमसीडी एम्पलाइज हेल्थ स्कीम लांच की थी। जिसका उद्देश्य था कि निगम की खराब आर्थिक स्थिति के कारण भी कर्मचारियों व उनके आश्रितों को स्वास्थ्य के इलाज के लिए कैशलेस इलाज मिल जाए।
पूर्व में भी केशलेस इलाज की व्यवस्था थी लेकिन अस्पतालों को निगम के पास फंड उपलब्ध न होने की वजह से तीन-तीन चार-चार साल तक भुगतान इलाज का नहीं हो पाता था। जिसकी वजह से एमसीडी के कर्मचारी परेशान होते थे। अब निगम ने यह व्यवस्था की है कि निगम कर्मचारियों के ग्रेड अनुसार वेतन से कुछ राशि कटेगी। जिसको एक एकीकृत खाते में जमा किया जाएगा। इसी राशि से कैेशलेस इलाज की राशि का भुगतान अस्पतालों को किया जाएगा।
लेकिन, कर्मचारियों को इसका लाभ देने के लिए अस्पताल प्रशासन विभाग कर्मचारियों को डिस्पेंसरी से अटैच करना था। साथ ही मेडिकल कार्ड भी कर्मचारियों को जारी करने थे। जैसा कि दिल्ली सरकार के दूसरे विभागों में होता है। लेकिन, अभी तक एमसीडी ने नहीं किया जिसकी वजह से कर्मचारी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की मांग कर रहे हैं तो अस्पताल फिलहाल देने से इन्कार कर रहे हैं।
पति-पत्नी हैं एमसीडी कर्मचारी तो ज्यादा वेतन वाले के वेतन से होगा अंशदान
एमसीडी हेल्थ स्कीम को लेकर एमसीडी की तैयारी पूरी नहीं की जिसकी वजह से बार-बार इसको लेकर एमसीडी को संशोधन करने पड़ रहे हैं। एमसीडी ने ताजा सर्कुलर निकालकर उन कर्मचारियों से अपनी सहमति जमा करने को कहा है जो पति पत्नी दोनों ही एमसीडी में स्थायी तौर पर कार्यरत है। एमसीडी के सर्कुलर के हिसाब से दोनों पति पत्नी का एमसीडी कर्मचारी होने की स्थिति में उस कर्मचारी के वेतन से पैसा कटेगा जिसका वेतन अधिक है। हालांकि इसको लेकर सहमति पत्र एमसीडी को जमा कराना होगा।







