Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विश्व

US-इस्राइल के लिए आसान नहीं ईरान का शासन बदलना!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 1, 2026
in विश्व
A A
us-iran war
22
SHARES
742
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। अमेरिका और इस्राइल की तरफ से ईरान पर ताबड़तोड़ हमलों उसके सैन्य अधिकारियों को मार गिराने के बाद से स्थिति तनावपूर्ण है। ईरान भी जवाब में इस्राइल के प्रमुख शहरों और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।

इस बीच सामने आया है कि शनिवार को जब अमेरिका और इस्राइल ने अपने संयुक्त अभियान की शुरुआत की थी तो इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ठिकानों को सबसे पहले निशाना बनाया गया था। रविवार सुबह इसकी पुष्टि हुई है कि खामेनेई के साथ-साथ उनके परिवार के कई सदस्य इस हमले की चपेट में आ गए। माना जा रहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर को निशाना बनाकर अमेरिका और इस्राइल की मंशा देश के शासन में बदलाव की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ही एक ट्रूथ सोशल पोस्ट में अपने इरादे जाहिर भी कर दिए और देश की जनता से इस मौके का फायदा उठाने के लिए कहा।

इन्हें भी पढ़े

india-china

नई दिल्ली में भारत-चीन की बड़ी बैठक: किन मुद्दों पर हुई बात?

August 7, 2026
india-china

तिब्बत को चीन बना रहा सबसे बड़ा मिलिट्री हथियार, क्या है ‘ट्विन स्ट्रैटजी’ जिसने बढ़ाई भारत की टेंशन?

August 7, 2026
trump

ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ़ पर अमेरिका में बवाल, 25 राज्यों ने संघीय सरकार के खिलाफ़ दायर किया मुक़दमा

August 4, 2026
iran-us ceasefire

ईरान में कुछ बड़ा होने वाला है! US स्टेट डिपार्मेंट ने कहा- वहां से तुरंत निकलो

August 2, 2026
Load More

इस्राइल और अमेरिका के संयुक्त अभियान में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत के बाद अब यह सवाल है कि आखिर इसका देश पर क्या असर होगा? इस देश में सर्वोच्च नेता चुने जाने की प्रक्रिया क्या है और खामनेई की गैरमौजूदगी की स्थिति में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? इस पद के लिए कितने दावेदार हैं और इनकी क्या खासियत है? आइये जानते हैं…

सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी में कैसे चलती है ईरान की शासन व्यवस्था?

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भी इसकी संभावना काफी कम है कि ईरान में शासन व्यवस्था में कोई बदलाव होगा। इसकी वजह यह है कि 1979 में जब ईरान में क्रांति हुई थी, तब यहां सुप्रीम लीडर द्वारा शासन की व्यवस्था आ गई। किसी एक सर्वोच्च नेता के न होने पर भी ईरान में सरकार के माध्यम से शासन की व्यवस्था पहले से तय है। इसके अलावा देश में सुप्रीम लीडर के चुने जाने की प्रक्रिया भी पहले से ही चिह्नित है।

विशेषज्ञ सभा के उम्मीदवारों को चुनने वाली गार्डियन काउंसिल में 12 सदस्य होते हैं। इनमें छह इस्लामिक फकीह (इस्लामी कानून में विशेषज्ञ) और छह न्यायविद होते हैं। गार्डियन काउंसिल न सिर्फ ईरान में स्थानीय-राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वालों को परखती है, बल्कि चुनाव कराने और संसद से पास कानूनों को वीटो करने का भी अधिकार रखती हैं।

खामेनेई की गैरमौजूदगी में कौन-कौन होगा सुप्रीम लीडर पद का दावेदार?

मोजतबा खामेनेई

ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अगले सर्वोच्च नेता के लिए मोजतबा खामेनेई की दावेदारी सबसे मजबूत है। मोजतबा मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं और राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। मोजतबा खामेनेई का जन्म साल 1969 में ईरान के मशहद में हुआ था। ईरान की सरकार में मोजतबा खामेनेई का गहरा प्रभाव है और कहा जाता है कि ईरान की खुफिया और सशस्त्र सेनाओं में भी मोजतबा खामेनेई के करीबी शामिल हैं।

मोजतबा ईरान-इराक में हुए युद्ध में भी भाग ले चुके हैं। उन्होंने धार्मिक शिक्षा हासिल की है और वे इस्लामिक मामलों के जानकार हैं, लेकिन उनकी गिनती शीर्ष स्तर के धर्मगुरुओं में नहीं होती है। मोजतबा साल 1990 से ईरान की राजनीति में पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं। 2005 तक लोगों की नजर से दूर रहे मोजतबा की मोहम्मद अहमदिनेजाद को ईरान का राष्ट्रपति बनाने में अहम भूमिका रही थी। हालांकि, बाद में दोनों में विवाद हो गया और अहमदीनेजाद ने मोजतबा पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

ईरान के मीडिया पर भी मोजतबा की पकड़ है और उन्होंने साल 2014 में ईरान के सरकारी टीवी आईआरआईबी के निदेशक को नौकरी से निकाल दिया था। देश में जब साल 2009 में विरोध प्रदर्शन हुए थे तो उन्हें सख्ती से कुचलने के पीछे भी मोजतबा का ही दिमाग माना जाता है। उस दौरान कई लोग मारे गए थे। 2021 में मोजतबा को अयातुल्ला की पदवी दी गई। ईरान का सुप्रीम लीडर बनने के लिए यह पदवी होना सबसे अहम है। बीते कुछ दशकों में ईरान में उनकी राजनीतिक पहुंच बढ़ी है। कई जानकारों का मानना है कि ईरान की सेना-रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और वहां धर्मगुरुओं के बीच अच्छी पैठ होने की वजह से मोजतबा अपने पिता की जगह लेने के लिए सबसे उपयुक्त दावेदार हैं।

अलीरेजा अराफी

सुप्रीम लीडर पद के दूसरे बड़े दावेदार अलीरेजा अराफी हैं। अराफी लंबे समय से अयातुल्ला खामेनेई के करीबी रहे हैं। वे खुद सर्वोच्च नेता चुनने वाली विशेषज्ञ सभा का हिस्सा रहे हैं। वे उम्मीदवारों की छंटनी करने वाली गार्डियन काउंसिल में भी उन्होंने लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। बताया जाता है कि अराफी तकनीकी तौर पर भी काफी आगे हैं और धर्मगुरुओं से नई तकनीक को अपनाने की वकालत करते रहे हैं।

अराफी का तर्क है कि इसके जरिए ही धार्मिक संस्थानों को सदियों पुराने अलग-थलग हो चुके रिवाजों से बाहर निकाला जा सकेगा। हालांकि, वे खामेनेई की इस्लामिक विचारधारा के पैरोकार रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई जहां काले रंग का साफा सिर पर बांधते हैं वहीं, अराफी सफेद साफा बांधते हैं। माना जाता है कि काला साफा मुख्यतः सैयद पहनते हैं, जो कि खुद को पैगंबर मोहम्मद और शियाओं के पहले इमाम- इमाम अली का वंशज मानते हैं। ऐसे में अराफी के सुप्रीम लीडर बनने की राह में यह एक बड़ा अवरोध है।

हालांकि, एक गौर करने वाली बात यह भी है कि 1989 में जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी बीमार थे, तब उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर पहले हुसैन अली मोंताजरी को नियुक्त किया था। मोंताजरी भी सफेद साफा पहनने वाले धर्मगुरु थे।

अली असगर हेजाजी

अली असगर हेजाजी अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतर्गत राजनीतिक सुरक्षा मामलों के मंत्रालय को संभालते आए हैं। उनके पास ईरानी खुफिया विभाग की जिम्मेदारी रही। उनके आईआरजीसी और शीर्ष धर्मगुरुओं के साथ अच्छे संबंध हैं। हेजाजी अक्सर ईरान के रक्षा और कूटनीतिक मामलों पर फैसले में शामिल होते हैं। हालांकि, उन्हें अब तक अयातुल्ला की पदवी नहीं मिली है, जो कि सुप्रीम लीडर बनने के लिए अनिवार्य है।

हासिम हुसैनी बुशहरी

ईरान में हासिम अली बुशहरी को भी सुप्रीम लीडर पद का अहम दावेदार माना जा रहा है। बुशहरी ईरान में प्रमुख धर्मगुरु के साथ-साथ कई और भूमिकाओं में रह चुके हैं। इनमें विशेषज्ञ सभा के पहले उप-प्रधान के अलावा धार्मिक मामलों से जुड़ी कई समितियों और प्रार्थना सभाओं की जिम्मेदारियां शामिल हैं। बुशहरी के सुप्रीम लीडर खामेनेई से भी अच्छे संबंध हैं, जो कि सर्वोच्च पद के लिए उन्हें अहम दावेदार बनाती है।

हसन खोमैनी

हसन खोमैनी, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी के पोते हैं। उन्हें ईरान के सुधारवादी और उदारवादी  हलकों की ओर से भविष्य के सर्वोच्च नेता के लिए एक पसंदीदा उम्मीदवार माना जाता है। उनके पास अच्छे धार्मिक प्रमाण हैं और उनकी पारिवारिक विरासत का ईरानी राजनीति में काफी प्रभाव और महत्व है।

हालांकि, हसन खोमैनी के पास राजनीतिक अनुभव सीमित है और उनके सामने कई मजबूत प्रतिद्वंद्वी मौजूद हैं, जो उनकी उम्मीदवारी की संभावनाओं को कम करते हैं। वर्ष 2016 में ही उन्हें असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के चुनाव में उम्मीदवार के रूप में खड़े होने से रोक दिया गया था।

उनके सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की संभावनाएं पूरी तरह से बदलती हुई राजनीतिक गतिशीलता पर निर्भर करती हैं, और इस बात पर निर्भर करती हैं कि क्या ईरान का शक्तिशाली कुलीन वर्ग एक ज्यादा उदारवादी और सुधारवादी दिशा अपनाने पर आम सहमति बना पाता है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
WCL

WCL ने नागपुर में दो महत्वपूर्ण सीएसआर पहलों का किया शुभारंभ

April 29, 2025
income

भारत निम्न मध्यम आय श्रेणी से उच्च मध्यम आय श्रेणी में परिवर्तित होने की ओर अग्रसर

January 30, 2026
mohan bhagwat

‘शिकंजी है तो कोका कोला क्यों’… टैरिफ वॉर के बीच RSS प्रमुख भागवत ने दिया स्वदेशी मंत्र

August 28, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • ‘थैंक्यू रेखा दीदी’: दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए जताया CM का आभार!
  • दिल्ली के सरकारी अस्पताल अब खुद करेंगे दवाओं और मेडिकल सामान की खरीद
  • नई दिल्ली में भारत-चीन की बड़ी बैठक: किन मुद्दों पर हुई बात?

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.