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Home राजनीति

इस राज्य से के 6 जिलों में नहीं डाला गया एक भी वोट, 20 विधायकों ने भी नहीं किया मतदान

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 20, 2024
in राजनीति, राज्य
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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल शुक्रवार को हो गया है. इस दौरान अलग-अलग राज्यों की 102 सीटों पर वोटिंग हुई. इस बीच नगालैंड के छह पूर्वी जिलों में एक भी वोट नहीं डाला गया है. यहां मतदान कर्मी बूथों पर नौ घंटे तक इंतजार करते रहे, लेकिन अपनी सीमांत नगालैंड क्षेत्र (एफएनटी) की मांग पर दबाव बनाने के लिए एक संगठन द्वारा किए गए बंद के आह्वान के बाद क्षेत्र के चार लाख मतदाताओं में से एक भी वोट देने नहीं आया.

पीटीआई के मुताबिक मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने शुक्रवार को पुष्टि की कि राज्य सरकार को ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ईएनपीओ) की एफएनटी की मांग से कोई समस्या नहीं है क्योंकि वह पहले ही इस क्षेत्र के लिए स्वायत्त शक्तियों की सिफारिश कर चुकी है. ईएनपीओ पूर्वी क्षेत्र के सात आदिवासी संगठनों का शीर्ष निकाय है.

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अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन और अन्य आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर पूर्वी नगालैंड की प्रमुख सड़कों पर लोगों या वाहनों की कोई आवाजाही नहीं है.

नगालैंड के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी आवा लोरिंग ने बताया कि क्षेत्र के 738 मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कर्मी मौजूद थे, जिसमें 20 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. सीईओ कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि नौ घंटों में कोई भी वोट डालने नहीं आया. इतना ही नहीं, 20 विधायकों ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया. नगालैंड के 13.25 लाख मतदाताओं में से पूर्वी नगालैंड के छह जिलों में 4,00,632 मतदाता हैं.

राज्य की राजधानी से करीब 41 किलोमीटर दूर तौफेमा में अपने गांव में वोट डालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने एफएनटी के लिए ड्राफ्ट वर्किंग पेपर स्वीकार कर लिया है जो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में सौंपा गया था. क्षेत्र के निर्वाचित विधायकों और प्रस्तावित एफएनटी के सदस्यों को सत्ता में हिस्सेदारी के अलावा सब कुछ ठीक लग रहा है.

बता दें कि ईएनपीओ यह आरोप लगाते हुए छह जिलों वाले एक अलग राज्य की मांग कर रहा है कि लगातार सरकारों ने इस क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास नहीं किया है. हालांकि, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही एक स्वायत्त निकाय की सिफारिश कर चुकी है ताकि इस क्षेत्र को राज्य के बाकी हिस्सों के बराबर पर्याप्त आर्थिक पैकेज मिल सके.

यह पूछे जाने पर कि क्या वोट न डालने के लिए पूर्वी नगालैंड के 20 विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू की जाएगी, उन्होंने कहा, “हम टकराव नहीं चाहते हैं. देखते हैं क्या होगा.”

गौरतलब है कि नगालैंड में लोकसभा चुनाव शुरू होने से कुछ घंटे पहले, ईएनपीओ ने गुरुवार शाम 6 बजे से राज्य के पूर्वी हिस्से में अनिश्चितकालीन पूर्ण बंद लगा दिया. संगठन ने यह भी जानकारी दी कि यदि कोई व्यक्ति मतदान करने जाता है और कोई कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित मतदाता की होगी. नगालैंड के सीईओ वायसन आर ने बंद को चुनाव के दौरान अनुचित प्रभाव डालने के प्रयास के रूप में देखते हुए गुरुवार रात ईएनपीओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया.

उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 171सी की उपधारा (1) के तहत कहा, “जो कोई भी स्वेच्छा से किसी चुनावी अधिकार के स्वतंत्र प्रयोग में हस्तक्षेप करता है या हस्तक्षेप करने का प्रयास करता है, वह चुनाव में अनुचित प्रभाव डालने का अपराध करता है.”

हालांकि, ईएनपीओ के अध्यक्ष त्सापिकीउ संगतम ने शुक्रवार को दावा किया कि यह धारा इस संदर्भ में लागू नहीं होती है.

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