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Home राष्ट्रीय

रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग, अब देश में ही बनेंगे विमानों के 405 पुर्जे

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 18, 2026
in राष्ट्रीय
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नई दिल्ली। भारत रक्षा क्षेत्र में अपनी आत्मनिर्भरता लगातार बढ़ा रहा है. दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक अहम कदम उठाया है. सरकार ने 405 रक्षा उपकरणों की छठी लिस्ट जारी की है. इन सभी उपकरणों को अब विदेशों से आयात नहीं किया जाएगा. इन कल-पुर्जों, रॉ मटेरियल तथा सब-सिस्टम का प्रोडक्शन पूरी तरह से भारत में ही होगा. इससे न सिर्फ हमारी सेनाओं को स्वदेशी तकनीक मिलेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत गति मिलेगी.

हवा से लेकर समंदर तक सुरक्षा बढ़ाएंगे स्वदेशी पुर्जे

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रक्षा मंत्रालय की इस नई सूची में छोटे-बड़े कई पुर्जे शामिल हैं. कुल 405 चीजों में से 16 उपकरण सीधे तौर पर भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के लिए हैं. बाकी बचे 389 आइटम रक्षा क्षेत्र से जुड़ी सरकारी कंपनियों (डीपीएसयू) के इस्तेमाल में आएंगे. यह लिस्ट केवल सामान्य उपकरणों तक सीमित नहीं है. इसमें एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, सुखोई-30 एमकेआई, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जैसे हवाई प्लेटफॉर्म के साथ-साथ AL-31FP इंजन के कल-पुर्जे भी देश में बनाने का लक्ष्य रखा गया है. टी-72, टी-90 जैसे टैंकों के अलावा बीएमपी-II, युद्धपोत, रडार, फायर कंट्रोल सिस्टम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम को भी सूची का हिस्सा बनाया गया है. कोंकर्स-एम, इन्वार, एमआरएसएएम जैसे मिसाइल सिस्टम समेत एंटी-टैंक गोला-बारूद भी अब देश में ही तैयार होंगे.

छोटे उद्योगों के लिए खुलेंगे तरक्की के नए रास्ते

रक्षा सौदों की खबरें आम आदमी को अक्सर खुद से दूर लगती हैं, लेकिन इस फैसले का सीधा असर देश के व्यापार जगत पर पड़ेगा. देश में ही इन उपकरणों के निर्माण से सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम दर्जे के उद्योगों (MSMEs) को बड़े ठेके मिलेंगे. सरकार ने ‘सृजन’ (SRIJAN) डिफेंस पोर्टल पर इन सभी 405 उपकरणों की पूरी जानकारी विस्तार से डाल दी है. वहां हर पुर्जे को भारत में विकसित करने की समय सीमा भी बताई गई है. जब ये पुर्जे सफलतापूर्वक देश में बन जाएंगे, तो सरकार इन्हें घरेलू कंपनियों से ही खरीदेगी. इससे न सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि विदेशी मुद्रा की भारी बचत भी होगी.

विदेशी निर्भरता कम करने का शानदार रिकॉर्ड

भारत का यह रक्षा अभियान लगातार कामयाबी की तरफ बढ़ रहा है. आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत सरकार पहले भी पांच ऐसी स्वदेशी लिस्ट ला चुकी है. अगस्त 2020 में रक्षा विभाग ने सृजन पोर्टल की शुरुआत की थी. इसका मकसद घरेलू कंपनियों को रक्षा उत्पादन से जोड़ना था. जून 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, इस पोर्टल के जरिए 33 हजार से ज्यादा रक्षा उपकरण भारतीय उद्योगों को बनाने के लिए पेश किए जा चुके हैं. इनमें पहले जारी हुई पांच सूचियों के 5,012 आइटम भी शामिल हैं.

अर्थव्यवस्था को मिल रही हजारों करोड़ की रफ्तार

स्वदेशी उत्पादन की यह पहल महज कागजों तक सीमित नहीं है. बीते कुछ सालों में 15,700 से अधिक रक्षा उपकरणों को सफलतापूर्वक स्वदेशी तकनीक से देश के भीतर ही बनाया जा चुका है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि पिछले पांच सालों में भारत ने करीब 9,000 करोड़ रुपये के आयात को रोककर, वह पैसा देश में ही बचाया है. इसके अलावा, मार्च 2026 तक रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनियों ने घरेलू वेंडर्स को करीब 10,000 करोड़ रुपये के उत्पादन ऑर्डर भी दिए हैं.

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