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शेख़ हसीना का बड़ा दावा, 2024 का छात्र आंदोलन नहीं था शांतिपूर्ण, बताया संगठित राजनीतिक साज़िश

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 5, 2026
in राष्ट्रीय, विशेष
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sheikh hasina
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प्रकाश मेहरा
दिल्ली डेस्क


नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने दिल्ली से मीडिया के साथ वर्चुअल संवाद में जुलाई–अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन को लेकर कई अहम दावे किए। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन को व्यापक रूप से छात्र आंदोलन के रूप में देखा गया, वह वास्तव में पूरी तरह शांतिपूर्ण नहीं था, बल्कि उसके पीछे संगठित राजनीतिक समूह सक्रिय थे, जिन्होंने छात्रों की मांगों का इस्तेमाल हिंसक राजनीतिक उद्देश्य पूरे करने के लिए किया।

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शेख़ हसीना ने कहा कि “पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने “प्यारे बांग्लादेश” को गहरे संकट और अस्थिरता से गुजरते देखा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज का बांग्लादेश उस देश की तस्वीर पेश नहीं करता, जिसे स्वतंत्रता संग्राम के बाद बड़ी मेहनत और बलिदान से बनाया गया था। उन्होंने कहा, “यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था। यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसके लिए 1971 के मुक्ति संग्राम में लगभग 30 लाख लोगों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।”

सरकार ने बातचीत और कानूनी प्रक्रिया का रास्ता अपनाया

पूर्व प्रधानमंत्री ने जुलाई–अगस्त 2024 के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि “उनकी सरकार ने आंदोलन शुरू होने के बाद बल प्रयोग के बजाय संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, “सच्चाई यह है कि यह कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था। शुरुआत से ही हमारी सरकार ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के माध्यम से स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिश की।”

“सुधारों की मांग को राजनीतिक हथियार बनाया गया”

शेख़ हसीना का आरोप है कि आंदोलन की आड़ में कुछ संगठित राजनीतिक और असामाजिक तत्व सक्रिय थे। उनके अनुसार इन समूहों ने छात्रों की वास्तविक मांगों को अपने राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया और आंदोलन को हिंसक दिशा देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि सुधारों की मांग को एक “हिंसक राजनीतिक हथियार” में बदल दिया गया, जिससे देश में अस्थिरता और टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई।

निर्वासन के बावजूद जनता से जुड़े रहने का दावा

वर्तमान में देश से बाहर रह रही शेख़ हसीना ने कहा कि परिस्थितियों ने उन्हें बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर किया, लेकिन उनका अपने देश और नागरिकों से भावनात्मक रिश्ता आज भी कायम है। उन्होंने कहा, “मैं एक ऐसी व्यक्ति के रूप में बोल रही हूं जिसने अपना पूरा जीवन बांग्लादेश के लोगों के साथ बिताया है। मुझे अपने देश से दूर जाने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन मैं कभी भी अपने लोगों से अलग नहीं हुई।”

बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन

शेख़ हसीना का यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन, उसके राजनीतिक प्रभाव और उससे जुड़े घटनाक्रम पर लगातार बहस जारी है। उनके बयान को आंदोलन की प्रकृति और उस दौरान हुई घटनाओं को लेकर उनकी आधिकारिक राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, शेख़ हसीना द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके दावों पर विभिन्न राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों तथा अन्य पक्षों की अलग-अलग राय रही है। इस संबंध में उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, और आंदोलन को लेकर विभिन्न पक्षों के अपने-अपने दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं।

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