नई दिल्ली: चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसरो अपने अगले चांद मिशन की तैयारियां कर रहा है. इसरो का अगला मिशन सिर्फ चांद तक पहुंचना ही नहीं होगा बल्कि वहां से कुछ धरती पर लेकर आना होगा. बता दें कि भारत के मिशन चंद्रयान-3 ने 23 सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी. उसने चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर ने चांद की सतह पर करीब 12 दिन काम किया और उसके बाद उसे स्लीप मोड में डाल दिया गया. क्योंकि उसके बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर रात हो गई.
जब 22 सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर दिन हुआ तो इसरो ने इससे संपर्क स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन अभी तक इसरो को इसमें कामयाबी नहीं मिली. लेकिन चंद्रयान-3 की इस कामयाबी के बाद भी इसरो बहुत उत्साहित है और अब वह ऐसे मिशन पर काम कर रहा है. जिसे जानकर हर भारतीय को गर्व होगा. दरअसल, अब इसरो अगले मिशन की तैयारी कर रहा है. जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह से धरती तक सैंपल लाना होगा.
क्या कह रहा इसरो?
इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चंद्रयान-3 ने जिस तरीके से चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग की, वह अगले चंद्र मिशन का आधार बनने जा रहा है. इसी प्रयोग के आधार पर अब इसरो अगले मिशन की तैयारी कर रहा है. अधिकारी के मुताबिक, अगला मिशन इस तरीके से डिजाइन किया जाएगा, जिससे चांद की सतह से पृथ्वी तक सैंपल लाया जा सके.
चांद पर कब भेजा जाएगा अगला मिशन
इसरो चंद्रमा पर अपना अगला मिशन कब भेजेगा, इसके जवाब में इसरो के अधिकारी ने कहा कि अभी इसकी कोई टाइमलाइन तय नहीं की गई है, लेकिन एजेंसी अपने सिस्टम को इस तरीके से तैयार कर रही है कि चंद्रमा पर लैंडिंग के बाद वहां से रिटर्न फ्लाइट आ सके. उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की लैडिंग के बाद चांद की सतह पर हॉप एक्सपेरिमेंट इसी प्लान का एक छोटा सा हिस्सा था.
जानिए क्या है हॉप टेस्ट?
बता दें कि चंद्रमा की सतह पर सफलता पूर्वक लैंडिंग के बाद इसरो ने 3 सितंबर एक बार फिर से चंद्रयान-3 के लैंडर विक्रम की दोबारा सॉफ्ट लैंडिंग कराई थी. इसी को हॉप टेस्ट कहा जाता है. इस प्रयोग के दौरान लैंडर विक्रम ने अपने इंजन से दोबारा रॉकेट फायर किया. उसके बाद ये करीब 40 सेंटीमीटर तक ऊपर गया. फिर सुरक्षित तरीके से इसने लैंडिंग की.
वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग के बाद वहां से पृथ्वी पर वापस आने के लिए हॉप टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव था. क्योंकि अभी तक कुछ देश ही इसमें सफल हो पाए हैं. इसरो के मुताबिक, हॉप टेस्ट के दौरान लैंडर विक्रम के रैंप, ILSA जैसे उपकरणों को फोल्ड कर री-डिप्लॉय किया गया. इस दौरान सब कुछ वैसा ही हुआ जैसा वैज्ञानिक चाहते थे.
जापान के साथ अगला मिशन करेगा भारत
बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी जापान के साथ मिलकर अगला चंद्र मिशन करने जा रहा है. जिसपर काम किया जा रहा है. जिसे ‘लूनार पोलार एक्सप्लोरेशन’ (LUPEX) नाम दिया गया है. इस प्रोजेक्ट के माध्यम से दोनों देश चंद्रमा की सतह पर पानी और दूसरे तत्वों का पता लगाने की कोशिश करेंगे. इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि जापानी स्पेस एजेंसी इस मिशन के लिए रोवर तैयार कर रही है. वहीं इसरो लैंडर बनाने पर काम कर रहा है. इसके अलावा इस इस प्रोजेक्ट में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) भी शामिल है और ये दोनों देश अगले चंद्र मिशन के लिए ऑब्जरवेशन इंस्ट्रूमेंट तैयार करने में लगे हुए हैं.







