नई दिल्ली: रूस के सबसे एडवांस 5th जनरेशन फाइटर जेट Su-57E के लिए भारत के संभावित खरीदार बनने की संभावनाएं अब तेजी से कम हो रही हैं. खबरें हैं कि भारत इस जेट को खरीदने के रूसी प्रस्ताव को अस्वीकार कर सकता है. इस संभावित इनकार के पीछे कई तकनीकी, परिचालन और रणनीतिक कारण हैं. भारत अब अपने स्वदेशी AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट और फ्रांस के राफेल जेट पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहा है.
भारत भी था FGFA का हिस्सा
Su-57 फाइटर जेट, जिसे रूस की सबसे एडवांस 5th जनरेशन टेक्नोलॉजी माना जाता है, को भारत ने एक समय FGFA यानी फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट के तहत संयुक्त रूप से विकसित करने की योजना बनाई थी. हालांकि, तकनीकी खामियों, इंजन की समस्याओं और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) को लेकर मतभेद के कारण भारत 2018 में इस प्रोजेक्ट से बाहर हो गया था. अब, जब रूस ने इस जेट के निर्यात संस्करण Su-57E को भारत को बेचने का प्रस्ताव दिया है, तो भारत इसे खारिज करने पर विचार कर रहा है.
स्टील्थ क्षमता पर उठे सवाल
इस संभावित खारिज करने का सबसे बड़ा कारण Su-57E की स्टील्थ क्षमता पर उठ रहे सवाल हैं. कई पश्चिमी विशेषज्ञ मानते हैं कि Su-57 की स्टील्थ क्षमता, अमेरिकी F-22 या F-35 के मुकाबले कमजोर है, क्योंकि इसका रडार क्रॉस सेक्शन बड़ा है.
इसके अलावा, भारत अब स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को तेज़ी से बढ़ा रहा है. भारत का मानना है कि AMCA प्रोजेक्ट के तहत वह अगले कुछ सालों में Su-57 के मुकाबले एक बेहतर और पूरी तरह से स्वदेशी 5th जनरेशन जेट तैयार कर सकता है.
रूस के प्रस्ताव को खारिज करने की वजह
भारतीय रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि Su-57E में ‘ट्रू 5th जनरेशन’ वाली स्टील्थ क्षमता की कमी है. आज के युद्ध में, दुश्मन के रडार से पूरी तरह बच निकलना सबसे जरूरी है. वहीं Su-57E अभी भी अपने पहले चरण के इंजन का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे ‘4.5 जनरेशन’ तकनीक पर आधारित माना जाता है. भारत को सुपरक्रूज क्षमता वाले दूसरे चरण के नए इंजन की जरूरत है, जिसके विकास में देरी हो रही है.
भारत ने फ्रांस के राफेल जेट को बहुत कम समय में अपनी वायुसेना में सफलतापूर्वक शामिल किया है और यह हाई परफॉरमेंस कर रहा है. राफेल की एडवांस टेक्नोलॉजी और पश्चिमी हथियारों के साथ उसकी संगतता भारत के लिए ज्यादा आकर्षक है.
भारत का AMCA पर फोकस
AMCA प्रोजेक्ट पूरी तरह से स्वदेशी होने के कारण, भारत के पास इसके डिजाइन, इंजन और अपग्रेड का पूर्ण बौद्धिक संपदा अधिकार होगा. वहीं, AMCA को विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों और भारतीय वायुसेना की खास जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है.
Su-57E के रूसी प्रस्ताव को खारिज करने का भारत का संभावित फैसला, 5th जनरेशन टेक्नोलॉजी में स्वदेशी विकास और पश्चिमी साझेदारी की ओर भारत के बढ़ते झुकाव की भी एक तस्वीर बया करता है.






