नई दिल्ली: दुनिया में इस वक्त पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की खूब चर्चा है. बीते दिनों इजराइल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर ऐसे ही लड़ाकू विमानों से बमों की बारिश की थी, जिसमें उसके चीफ नसरल्लाह और कई अन्य कमांडर मारे गए थे. इन लड़ाकू विमानों से ऐसे-ऐसे बम गिराए गए जिससे कि जमीन में 60 फीट गहरी खाई बन गई. इन्हें स्टील्थ फाइटर जेट भी कहा जाता है. यानी इनको इंटरसेप्ट करना करीब-करीब असंभव है. ये दुश्मर की रडार प्रणाली को आसानी से चकमा देकर उसकी सीमा में घूस जाते हैं और कहर बरपाकर लौट आते हैं.
इजराइल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट एफ-35 का इस्तेमाल किया था. इस वक्त दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों के पास ही ऐसे फाइटर जेट हैं. वैसे रूस ने भी ऐसे फाइटर जेट बना लेने का दावा किया है. चीन के पास भी ऐसे फाइटर जेट हैं. चीन ने पांचवीं पीढ़ी के दो फाइटर जेट एफसी-31 और जे-20 हैं. एफसी-31 को जल्द ही वह अपनी वायु सेना को सौंपेगा. दूसरी तरफ जे-20 को उसने विशेष तौर पर अपनी सेना के लिए बनाया है. उसने उस विमान को दुनिया के किसी अन्य देश को नहीं बेचने की योजना बनाई है.
पाकिस्तान के पास 5th Gen फाइटर
इस बीच रिपोर्ट आ रही है कि चीन एफसी-31 फाइटर जेट पाकिस्तान को देने की योजना पर काम कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी एयर फोर्स के पायलट एफसी-31 उड़ाने की चीन में ट्रेनिंग भी शुरू कर चुके हैं. ऐसे में भारत की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. भारत चीन और पाकिस्तान दोनों से खतरे का सामना कर रहा है.
ऐसे में एक अच्छी खबर है. वैसे तो इस वक्त भारत के पास राफेल और सुखोई-30 जैसे लड़ाकू विमान हैं. ये चार से साढ़े चार पीढ़ी के फाइटर जेट बताए जाते हैं. ये शानदार फाइटर जेट हैं और इसमें बेहद एडवांस मिसाइल सिस्टम लगे हुए हैं. लेकिन, 5th जेन फाइटर की बात ही अलग है.
एफ-35 का बाप
भारत ने फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविशएन (Dassault Aviation) से वायु सेना के लिए 36 लड़ाकू विमान खरीदे थे. अब नौसेना के लिए राफेल के मरीन वर्जन की खरीदारी की तैयारी चल रही है. इस बीच दसॉल्ट एविशएन ने सुपर राफेल बनाने का दावा किया है. कंपनी का कहना है कि सुपर राफेल हर मामले में अमेरिकी एफ-35 से बीस है. यह फाइटर जेट ग्लोबल स्तर पर हर मामले में एफ-35 को सीधी टक्कर देगी. इस सुपर राफेल को राफेल एफ5 नाम भी दिया गया है.
bulgarianmilitary.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ सालों में एफ-35 की वजह से दसॉल्ट एविएशन के हाथ से कई कॉन्ट्रेक्ट निकल गए. फिर कंपनी ने सुपर राफेल पर काम किया. अब वह इस सुपर जेट के जरिए दुनिया के बाजार में सीधे एफ-35 को टक्कर देने की योजना बना रही है.
जाम हो जाएंगे दुश्मन के रडार
इस सुपर राफेल में दुश्मन देश के रडार को जाम करने, किसी भी हमले से खुद को बचाने जैसे फीचर्स हैं. इतना ही नहीं ये दुश्मक के सभी एयर डिफेंस का तोड़ निकालने की क्षमता रखते हैं. इसमें हाइपरसोनिक न्यूक्लियर मिसालनें तैनात की जा सकती हैं. इससे दुश्मन के हर बेड़े को तोड़कर उसके इलाके में परमाणु बम गिराया जा सकता है. कंपनी का कहना है कि सुपर राफेल केवल एक लड़ाकू विमान नहीं है बल्कि यह एक एंटीग्रेटेड कंबैट सिस्टम है.
भारत की ‘अपनी’ कंपनी
अब आप सोच रहे होंगे कि राफेल तो फ्रांसीसी कंपनी है. इसको अपनी कैसे कहा जा सकता है. आप बिल्कुल सही समझ रहे हैं. लेकिन, मौजूदा वक्त में रूस के बाद फ्रांस दूसरा सुपर पावर हैं जिसके साथ भारत की सैन्य साझेदारी बेहद मजबूत है. भारत ने बीते सालों में फ्रांस के साथ सैन्य साझेदारी को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है. भारत ने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों की कंपनियों को नजरअंदाज कर बीते सालों में दसॉल्ट एविएशन के साथ साझेदारी बढ़ाई है. एयरफोर्स के लिए 36 जेट खरीदने के बाद भारत उससे 26 मरीन एयरक्राफ्ट भी खरीदने की तैयारी में है.
दसॉल्ट राफेल विमानों के मेंटेनेंस के लिए भारत के साथ मिलकर काम रही है. ऐसे में ऐसी कंपनी को अपनी न कहा जाए तो क्या कहा जाएगा. राफेल से पहले भी भारतीय वायु सेना के बेड़े में मिराज-2000 जेट पहले से मौजूद हैं. इसे भी दसॉल्ट ने डेवलप किया है. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक दसॉल्ट एविएशन दिल्ली से लगे नोएडा में बड़ा प्लांट लगा रही है जहां इन राफेल और मिराट-2000 विमानों का मेंटेनेंस किया जाएगा.







