नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चौंकाने वाले करते रहे हैं। अब वह अमेरिका के नेतृत्व वाले सबसे बड़े सुरक्षा संगठन NATO से ही एग्जिट का ऐलान कर सकते हैं। उन्होंने NATO को पेपर टाइगर कहा है और कहा कि उसकी इस हैसियत को व्लादिमीर पुतिन भी जानते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मैं इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रहा हूं क्या अमेरिका को नाटो से बाहर निकल जाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि NATO संगठन के सदस्य देशों ने ईरान के खिलाफ हमारे अभियान में साथ नहीं दिया है। स्पेन, ब्रिटेन, तुर्की, हंगरी जैसे कई देशों ने इस जंग में अमेरिकी रुख से अलग विचार जाहिर किए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने द टेलीग्राफ को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह संभावना है कि अमेरिका ही इस संगठन को छोड़ दे। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह संगठन पेपर टाइगर है। यह पहला मौका है, जब अमेरिका ने अपने यूरोपीय सहयोगियों को लेकर इतनी सख्त राय जाहिर की है। यदि हमने ऐसा किया तो फिर दोबारा विचार नहीं होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘हां, हम दोबारा इस पर नहीं सोचेंगे। मैंने कभी नाटो पर ज्यादा भरोसा नहीं किया। मैं हमेशा से जानता था कि यह संगठन एक पेपर टाइगर है। व्लादिमीर पुतिन भी यह चीज जान चुके हैं।’
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कई नाटो देशों ने इस मसले पर ईरान के मसले पर अमेरिका का साथ देने से इनकार किया है। दरअसल ट्रंप ने नाटो सहयोगियों से कहा था कि आप लोग भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने वॉरशिप भेजें ताकि उसे खुलवाया जा सके। हालांकि ज्यादातर देशों ने इससे इनकार कर दिया है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप अब बौखलाए हुए हैं। वह पहले भी नाटो की फंडिंग में अमेरिका के सबसे ज्यादा योगदान को लेकर सवाल उठा चुके थे। उनका कहना था कि आखिर यूरोप के देशों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अकेले अमेरिका ही क्यों उठाए। यूरोप के देशों को अपनी सुरक्षा के लिए फंडिंग बढ़ानी चाहिए। अब उन्होंने जो बात कही है, वह अहम है और दुनिया में हलचल मचा सकता है।
यदि नाटो से बाहर होने का फैसला अमेरिका ने लिया तो रूस के लिए यह बड़ी राहत होगी। उसका तो विरोध ही नाटो के विस्तार को लेकर रहा है। यूक्रेन के नाटो में शामिल होने की संभावना के चलते ही उसने हमला किया था। उसका कहना था कि ऐसी स्थिति में तो नाटो देशों की सेनाएं हमारी सीमा पर आ जाएंगी। अब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस संगठन को ऑटोमेटिक होना चाहिए। हम बार-बार क्यों आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं ज्यादा आग्रह क्यों करूं। हम तो यूक्रेन में खुद ही गए थे। वह हमारी समस्या नहीं था। फिर हमने ऐक्शन लिया। हम उनके लिए हमेशा खड़े हैं, लेकिन वे हमारे साथ कब आएंगे।






