नई दिल्ली। भाद्रपद पूर्णिमा तिथि का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. इसी दिन से पितृ पक्ष शुरू होता है. इस तिथि पर मां लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से मां लक्ष्मी की उपासना जो भी भक्त भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर करता है उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और धन की समस्या खत्म होती है.
भाद्रपद पूर्णिमा तिथि इस साल 26 सितंबर को यानी आज है. भक्त इस दिन पूर्णिमा तिथि के व्रत का संकल्प करते हैं और मां लक्ष्मी की उपासना कर चंद्र देव को अर्घ्य देते हैं. मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए भाद्रपद पूर्णमा पर किस विधि से मां लक्ष्मी की पूजा करें, शुभ मुहूर्त क्या है और आज चंद्रोदय का सटीक समय क्या रहने वाला है? आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
भाद्रपद पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर शुरू हो चुकी है. पूर्णिमा तिथि 26 सितंबर को रात 10 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर स्नान-दान व पूजा करने के लिए कौन-कौन से शुभ मुहूर्त पड़ रहे हैं आइए इस बारे में जानें.
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 53 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 28 मिनट तक.
- अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक.
- विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक.
भाद्रपद पूर्णिमा पूजा विधि
- पूर्णिमा तिथि पर सुबह उठ जाएं और स्नान आदि कर साफ कपड़े पहनें.
- सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पूर्णिमा का व्रत का संकल्प करें.
- अब घर के मंदिर में चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं.
- इसके बाद लक्ष्मी जी और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें.
- विष्णु जी को चंदन का तिलक लगाएं. माता लक्ष्मी को सिंदूर का तिलक लगाएं.
- ताजे लाल फूल अर्पित करें और भगवान की प्रतिमा के सामने घी का दीया चलाएं.
- फल, मिठाई या खीर का भोग लगाएं.
- धूप जलाएं और भगवान का ध्यान करें व पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें.
- विष्णु जी और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक आरती कर कर पूजा को संपन्न करें.
- शाम के समय चंद्रोदय हो जाए तो चंद्रमा को कच्चे दूध से अर्घ्य दें और व्रत का पारण कर लें.
भाद्रपद पूर्णिमा 2026 चंद्रोदय का समय
भाद्रपद पूर्णिमा तिथि पर शाम के 6 बजकर 18 मिनट पर चंद्रोदय होगा. पूर्णिमा का व्रत पूर्ण करने के लिए तय समय पर चंद्र दर्शन करें और चंद्रमा को अर्घ्य दें. इसके बाद व्रत का पारण कर व्रत को संपन्न करें.







