नई दिल्ली: 26 फरवरी 2019 को भारत द्वारा बालाकोट स्ट्राइक के छह साल पूरे हो चुके हैं। तब भारती वायुसेना ने पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकी शिविरों को निशाना बनाया था। तब भारत ने पाकिस्तान के एफ-16 (F-16) विमान को भी मार गिराया था। भारत ने पुलवामा आतंकी हमले का बदला लेते हुए ये कार्रवाई की थी। लेकिन अब ट्रंप युग में पाकिस्तान के इन्हीं विमानों को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू जेट बेड़े के लिए हाल ही में 397 मिलियन डॉलर की मंजूरी कई सवाल खड़े कर रही है। खास बात यह भी है कि वह भारत को एफ-35 फाइटर प्लेन बेचने की पेशकश भी कर चुके हैं। इसी कारण उनके इरादे पर भारत को संदेह हो रहा है।
एफ-16 का इस्तेमाल कर पाकिस्तान ने नियम तोड़ा था
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में एक घातक आतंकी हमले के बाद भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के शिविरों को निशाना बनाते हुए बालाकोट में हवाई हमले किए थे। जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान वायु सेना ने एफ-16 लड़ाकू विमानों को तैनात किया, और भारतीय वायुसेना के साथ उसका हवाई युद्ध हुआ था। भारत ने पाकिस्तान पर इसके उपयोग की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुआ कहा था कि अमेरिका द्वारा दिए गए एफ-16 विशेष रूप से आतंकवाद विरोधी उद्देश्यों के लिए हैं। लेकिन पाकिस्तान ने भारत पर जवाबी हमले में इसका उपयोग किया।
हालांकि अमेरिका ने शुरू में सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से परहेज किया, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि अमेरिका ने अगस्त 2019 में पाकिस्तान को फटकार लगाई थी। तत्कालीन शस्त्र नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के अवर सचिव एंड्रिया थॉम्पसन ने पीएएफ प्रमुख एयर चीफ मार्शल मुजाहिद अनवर खान को एक पत्र लिखकर विमान को इस तरह से इस्तेमाल करने पर चिंता जताई थी। अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इस तरह की कार्रवाइयों से संवेदनशील अमेरिकी तकनीकें तीसरे पक्ष के सामने आ सकती हैं और साझा सुरक्षा ढांचे को कमजोर कर सकती हैं।
अब अमेरिका का क्या प्लान है?
अब अमेरिका ने एफ-16 के लिए 397 मिलियन डॉलर के पैकेज का ऐलान किया है। इसा उद्देश्य पाकिस्तान के F-16 बेड़े को अमेरिका समर्थित निगरानी कार्यक्रम के तहत बनाए रखना है, जो 2022 में स्वीकृत पिछले 450 मिलियन डॉलर के पैकेज पर आधारित है। नियमों के मुताबिक, इन जेट विमानों का इस्तेमाल आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए होना था। अब भारत को संदेह है कि क्या पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए यह फैसला सही है।
अमेरिका F-16 बेड़े की निगरानी करने की योजना
- तकनीकी सुरक्षा दल: अमेरिकी वायु सेना के कर्मियों और ठेकेदारों से मिलकर बनी यह टीम F-16 के उपयोग की चौबीसों घंटे निगरानी करने के लिए पाकिस्तान में तैनात रहेगी।
- प्रतिबंधित बेस एक्सेस: पाकिस्तान को उन बेस तक पहुंच सीमित करनी होगी जहां F-16 रखे गए हैं, ताकि चीनी-डिजाइन किए गए JF-17 विमानों से अलग रखा जा सके।
- परिचालन संबंधी मंजूरी: पाकिस्तान के बाहर सभी F-16 संचालन या संयुक्त अभ्यास में भागीदारी के लिए अमेरिकी सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता होगी।
- हथियार नियंत्रण: उन्नत मध्यम दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (AMRAAM) मिसाइलों को निर्दिष्ट बेस तक सीमित रखा जाएगा, जिससे तैनाती के जोखिम सीमित होंगे।
- बेस सीमाएं: F-16 को केवल शाहबाज एयरबेस (जैकबाबाद) और मुशफ एयरबेस (सरगोधा) पर तैनात किया जाएगा।
ट्रंप का डबल गेम और भारत के सवाल व चिंताएं
भारत की चिंताएं बालाकोट हमले के दौरान पाकिस्तान द्वारा एफ-16 इस्तेमाल के नियमों की अनदेखी से उपजी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर 2022 में अमेरिका की यात्रा के दौरान फंडिंग के लिए अमेरिकी कदम की आलोचना करते हुए कहा था, आप ये बातें कहकर किसी को मूर्ख नहीं बना सकते हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस फैसले को परेशान करने वाला करार दिया और क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर इसके प्रभाव पर सवाल उठाया।
ट्रंप का नया फैसला भारत-अमेरिका संबंधों की परीक्षा जरूर लेगा जो साझा रणनीतिक लक्ष्यों और आपसी विश्वास पर टिका हुआ है। ट्रंप के इस फैसले पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि उन्होंने भारत को एफ-35 बेचने की भी पेशकश की है। एक तरफ वह पाकिस्तान को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत से बड़ी डील करना चाहते हैं। इसे ट्रंप का दोतरफा गेम माना जा रहा है।







