लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में उम्मीदवारों के चयन की कवायद तेज हो गई है. इसी सिलसिले में बीजेपी की कोर कमेटी की अहम बैठक हुई, जिसमें संभावित प्रत्याशियों के नामों पर विस्तार से मंथन किया गया. बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम और पार्टी के महामंत्री संगठन समेत वरिष्ठ नेता शामिल हुए. हालांकि, कई दौर की चर्चा के बावजूद 11 एमएलसी सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी. सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग दावेदारियों के चलते पेंच फंसा हुआ है.
मूल कैडर बनाम दूसरे दलों से आए नेताओं पर खींचतान
बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के मूल कैडर और दूसरे दलों से आए नेताओं के बीच संतुलन बनाने की है. पार्टी का एक धड़ा चाहता है कि एमएलसी चुनाव में लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे मूल कैडर के नेताओं को मौका दिया जाए. वहीं, पार्टी के कुछ नेता दूसरे दलों से बीजेपी में आए नेताओं को भी विधान परिषद भेजने के पक्ष में हैं. इसी वजह से संभावित नामों पर अंतिम फैसला नहीं हो पा रहा है. पार्टी नेतृत्व सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के साथ-साथ संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं की दावेदारी को भी ध्यान में रख रहा है.
निर्दलीय एमएलसी की बीजेपी में एंट्री पर भी नजर
इस बीच तीन मौजूदा निर्दलीय एमएलसी के बीजेपी में शामिल होने की चर्चाओं ने भी उम्मीदवार चयन को और दिलचस्प बना दिया है. गोरखपुर एमएलसी क्षेत्र से निर्दलीय एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और एमएलसी आकाश अग्रवाल की बीजेपी में ज्वाइनिंग को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है. दोनों के बीजेपी में शामिल होने की संभावनाओं के बीच पार्टी के भीतर इनके नामों को लेकर भी चर्चा हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, अगर इन नेताओं की बीजेपी में एंट्री होती है तो एमएलसी चुनाव में उनकी दावेदारी का समीकरण भी बदल सकता है. ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी भी नाम को अंतिम रूप देने से पहले सभी संभावनाओं पर विचार कर रहा है.







