प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को संपन्न हुआ, और 12 नवंबर से विभिन्न एग्जिट पोल जारी होने शुरू हो गए। कुल 243 सीटों पर बहुमत के लिए 122 सीटें जरूरी हैं। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में सत्ताधारी एनडीए (बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी आदि) को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है, जबकि महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल, वीआईपी) को 80-110 सीटें मिलने का अनुमान है। हालांकि, एक्सिस माई इंडिया जैसे कुछ पोल्स में मुकाबला कांटे का बताया गया है, और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा पसंदीदा (34%) दिखाया गया। असली नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।
एग्जिट पोल्स को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं—तेजस्वी यादव ने इन्हें “गोदी मीडिया का प्रॉपगैंडा” बताया और कहा कि मतदान खत्म होने से पहले ही ये जारी हो गए। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने दावा किया कि तेजस्वी ही सीएम बनेंगे। वहीं, एनडीए ने इन्हें सही बताते हुए जश्न की तैयारी शुरू कर दी है।
आरजेडी की स्थिति
ज्यादातर पोल्स में आरजेडी को 53-76 सीटें मिलने का अनुमान है, जो इसे सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बना सकती है (एक्सिस माई इंडिया के अनुसार)। लेकिन गठबंधन के बिना बहुमत दूर। वोटर प्राथमिकताएं युवा (18-29 वर्ष) और बेरोजगार मतदाता महागठबंधन की ओर झुके (46% फर्स्ट टाइम वोटर्स ने आरजेडी को चुना)। महिलाओं ने एनडीए को सपोर्ट किया (45% महिलाएं एनडीए के पक्ष में)। सीएम पसंद: तेजस्वी 34%, नीतीश 22%। वोटिंग टर्नआउट 66.91% (ऐतिहासिक उच्च), महिलाओं का टर्नआउट पुरुषों से 8.8% ज्यादा।
अगर एग्जिट पोल सही साबित हुए, तो तेजस्वी यादव का बिहार राजनीति में भविष्यएग्जिट पोल्स के अनुसार, अगर एनडीए 130+ सीटें जीतता है, तो महागठबंधन की हार पक्की। यह तेजस्वी के लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि वे 2020 से लगातार विपक्ष के चेहरे बने हैं। लेकिन बिहार की राजनीति में “पलटवार” आम है—नीतीश कुमार जैसे नेता कई बार सत्ता बदल चुके हैं।
संभावित परिदृश्य और तत्कालीन प्रभाव (2025-2026)
विपक्षी नेता के रूप में मजबूती: हार के बावजूद आरजेडी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बनेगी, जो तेजस्वी को विधानसभा में मजबूत आवाज देगी। वे नीतीश सरकार पर रोजगार, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाकर दबाव बनाएंगे। युवाओं और मुस्लिम-यादव वोट बैंक (कुल 30-35%) में उनकी पकड़ मजबूत रहेगी।
आरजेडी में लालू प्रसाद की बेटियां (मीसा भारती, रोहिणी आचार्य) नाराजगी जता चुकी हैं। हार से आंतरिक कलह बढ़ सकता है, जो तेजस्वी की कमान को कमजोर करेगी। नीतीश की उम्र का फायदा 75 वर्षीय नीतीश की सेहत खराब होने पर बीजेपी अपना सीएम चुन सकती है। इससे तेजस्वी को 2029 तक इंतजार करना पड़ेगा।
मध्यम अवधि (2026-2029)
तेजस्वी “बिहार फर्स्ट” एजेंडे (नौकरी हर घर, मां-बहन योजना) से राष्ट्रीय स्तर पर उभर सकते हैं। इंडिया गठबंधन में राहुल गांधी के साथ उनकी जोड़ी मजबूत होगी, खासकर 2029 लोकसभा चुनावों में। लेकिन लालू की छवि (भ्रष्टाचार केस) बाधा बनेगी। प्रशांत किशोर की पार्टी (0-2 सीटें) अगर बढ़ी, तो आरजेडी का वोट शेयर कटेगा। तेजस्वी को ईबीसी (36% आबादी) वोटों पर ज्यादा फोकस करना पड़ेगा। अगर एनडीए कमजोर हुआ, तो तेजस्वी नीतीश के साथ “महागठबंधन 2.0” बना सकते हैं—जैसा 2015 में हुआ। इससे वे डिप्टी सीएम या सीएम बन सकते हैं।
सीएम बनने की 32% संभावना
पीपुल्स पल्स के अनुसार, तेजस्वी की लोकप्रियता (युवाओं में 40%) उन्हें 2029 में मजबूत दावेदार बनाएगी। लेकिन हार से “चुनावी जिंक्स” टूटना मुश्किल होगा। लगातार हार से आरजेडी कमजोर हो सकती है, और तेजस्वी को नया वोट बैंक (महिलाएं, ईबीसी) बनाना पड़ेगा। सकारात्मक पक्ष: उनकी उम्र (36 वर्ष) फायदेमंद है—नीतीश के बाद बिहार का “यंग लीडर” बन सकते हैं।
कुल मिलाकर, एग्जिट पोल सही हुए तो तेजस्वी की राह चुनौतीपूर्ण लेकिन रोमांचक रहेगी। वे विपक्ष के मजबूत स्तंभ बने रहेंगे, लेकिन सत्ता के लिए 2029 तक इंतजार या रणनीतिक गठबंधन जरूरी। याद रखें, 2020 में भी एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे—14 नवंबर का इंतजार ही अंतिम सत्य है।







