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Home राष्ट्रीय

अधर में फंसी राहुल गांधी की पदयात्रा, आपसी कलह से कैसे पार पा पाएगी कांग्रेस

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 20, 2022
in राष्ट्रीय, विशेष
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Rahul Gandhi
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मसला ये है कि हम एक ऐसी छत में रहते हैं जोकि पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. दरअसर, ये बाप दादा के जमाने का घर था तो इसकी मरम्मत समय-समय पर नहीं की गई. पहले तो सब सही था मगर एकदम से इसकी सारी छते चूने लगी हैं. एक जगह सही करवाओं तो पता चलता है दूसरी ओर चूने लगी. कहानी के अगले चरण में जाएं तो इससे पहले हम बता दें कि ये छत कांग्रेस की है और जो पानी टपक रहा है वो है इसकी अंदरूनी कलह. दूसरा ठीक कराओ तब तक पहले वाला फिर उखड़ जाता है. अब समझ नहीं आ रहा है कि आखिरकार इस पुराने मकान का क्या करें. बाबा दादाओं की जागीर है तो इसका कुछ कर नहीं सकते. अब ये बारिश का मौसम भी रास नहीं आता. पहले तो इस मौसम में गर्म चाय के साथ पकौड़ियां काफी पसंद आती थी. अब तो चाय लेकर बैठो तो ऊपर से टपकना टपक जाता है…. हैं न मुसीबत. कुछ ऐसी ही स्थिति कांग्रेस के साथ हो गई है. अब आप सोच रहें होंगे कि बात जब इतनी सी थी तो इसको ऐसे एक कहानी से क्यों जोड़ा गया. हां, हां आप परेशान मत होइये. यहां पर हम आपको इतिहास या भूगोल की जानकारी नहीं दे रहे बल्कि ये बता रहे हैं कि कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा क्यों मुश्किल में पड़ती जा रही है.

राहुल गांधी और कांग्रेस को इस भारत यात्रा से काफी उम्मीदें हैं. 2014 और फिर 2019 में जिस तरह से पार्टी की हार हुई उससे भी टेंशन ये है कि कांग्रेस अंदर से भी टूटती जा रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने साथ छोड़ दिया है. ये यात्रा ऐसे वक्त पर हो रही है जब कि दो साल बाद देश में लोकसभा के चुनाव हैं और उससे पहले कई राज्यों में भी चुनाव होने बाकी है. फिलहाल राहुल गांधी के साथ जनता का कनेक्ट भी नजर आ रहा था. ऐसी बहुत सारी तस्वीरें सामने आ रहीं थीं जिसमें राहुल गांधी लोगों के साथ कनेक्ट कर रहे थे. यात्राएं बदलाव लाती हैं इसका एक लंबा इतिहास है. कई नेताओं की तकदीर इन्हीं यात्राओं ने बदली भी है. खैर, इतिहास की बात नहीं, बात वर्तमान की होगी. कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा इस वक्त दक्षिण भारत में हैं. 30 सितंबर तक यात्रा कर्नाटक पहुंचेगी. कर्नाटक में इस यात्रा को 22 दिन बिताने हैं. जोकि पूरी यात्रा के सबसे ज्यादा दिन होंगे. लेकिन कर्नाटक कांग्रेस में तो अलग ही खिचड़ी पक रही है. वहां पर अस्तित्व की लड़ाई इतनी बढ़ गई है कि नेता आपस में ही उलझे पड़े हैं.

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डीके शिवकुमार- सिद्धारमैया विवाद
इस यात्रा का प्लस पॉइंट ये है कि दक्षिण भारत में राहुल गांधी ने अपना वोट बैंक फिक्स कर दिया. दक्षिण भारत में बीजेपी काफी जोर आजमाइश कर रही थी मगर इस यात्रा ने कांग्रेस को साउथ इंडिया में और मजबूत कर दिया मगर क्या उत्तर भारत के बिना दिल्ली की गद्दी संभव है. जाहिर है इसका जवाब न ही होगा. कर्नाटक कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई इस कदर आपदा है कि नेता एक दूसरे पर ही आरोप लगा रहे हैं. डीके शिवकुमार और पूर्व सीएम सिद्धारमैया में बीच अनबन चल रही है. ये काफी पुरानी रंजिश है. रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का सबसे अच्छा इस्तेमाल करने वाले डीके शिवकुमार भले ही ईडी की चक्कर काट रहे हों मगर कर्नाटक में सत्ता की पूरी ख्वाहिश रखते हैं. इस वक्त वो कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं और अगले साल यहां पर राजस्थान के साथ ही चुनाव होने वाले हैं.

खुलकर नाराजगी सामने आई
डीके शिवकुमार की पूर्व सीएम और कांग्रेस के बड़े नेता सिद्धारमैया से नाराजगी खुलकर सामने आ गई. डीके शिवकुमार का कहना है कि पार्टी में कुछ लोग यात्रा की सफलता के लिए पर्याप्त रूप से साथ नहीं दे रहे हैं. अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया खेमे ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को कोई श्रेय देने से इनकार किया है. अब जब कि यात्रा 30 सितंबर को कर्नाटक में पहुंचने जा रही है ऐसे में दोनों बड़े नेताओं के बीच ये अनबन का खामियाजा कहीं राहुल गांधी को न भुगतना पड़ जाए. बीजेपी का आईटी सेल इस वक्त एकदम चौकन्ना बैठा है. जैसे आम के बाग का मालिक अपने फलों की रखवाली करता है बिल्कुल वैसे. जैसे आम गिरा वैसे उसको उठाकर अंदर करना. इसी तरह बीजेपी आईटी सेल बैठा है कि कहीं कांग्रेस से चूक हो अगले दिन हो हंगामा मचा दें. कांग्रेस को सावधान रहना होगा.

दिल्ली में बढ़ी सरगर्मी
कांग्रेस में अध्यक्ष पद का चुनाव भी होना है. उसके लिए दिल्ली में सरगर्मी बढ़ गई है. कांग्रेस आलाकमान ने उनको तुरंत दिल्ली वापस लौटने का फरमान जारी किया है. वो राहुल गांधी के साथ यात्रा में थे. सोनिया गांधी ने उनको दिल्ली बुला लिया है. अब दिल्ली में सरगर्मी इस बात की है कि कांग्रेस का प्रेसिडेंट कौन बनेगा. बड़ा सवाल है. क्योंकि 22 सालों से कांग्रेस में कोई चुनाव नहीं हुए हैं. आखिरी बार सन् 2000 में सोनिया गांधी और जतिन प्रसाद के बीच अध्यक्ष पद का चुनाव हुआ था, जिसे सोनिया गांधी आसानी से जीत गईं थीं. इसके बाद पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को भी बनाया गया था लेकिन 2019 हार के बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था.

कांग्रेस नेता शशि थरूर- अशोक गहलोत
कांग्रेस नेता शशि थरूर और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत अध्यक्ष पद के दावेदार बताए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि थरूर ने सोनिया गांधी से मुलाकात भी की है और अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की. जानकारी के मुताबिक सोनिया गांधी ने भी कहा है कि जितने लोग चुनाव लड़ेंगे पार्टी के लिए उतना ही अच्छा है. अब कहा जा रहा है कि थरूर से ज्यादा करीबी अशोक गहलोत है. लेकिन शशि थरूर को लेकर अक्सर बड़े पद की मांग उठती रहती है.

राहुल गांधी के सामने दोहरी टेंशन
अब राहुल गांधी की यात्रा के बीच दो बातें हैं. पहली टेंशन तो ये कि 30 तारीख से पहले क्या कर्नाटक कांग्रेस में सबकुछ ठीक हो जाएगा. दूसरी टेंशन ये कि पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव अगर किसी कारणवश टलता है तो क्या पार्टी में टूट का खतरा तो नहीं हो जाएगा. अक्टूबर में कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव होने वाले हैं. राहुल गांधी अपनी यात्रा कर रहे हैं. इस दौरान वो काफी मेहनत भी कर रहे हैं. कांग्रेस और राहुल दोनों को इससे उम्मीदें हैं.

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