प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। विजयादशमी के पावन अवसर पर 18 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की माधव शाखा की ओर से नई दिल्ली के रामकृष्ण पुरम (आरके पुरम) स्थित झंडू सिंह पार्क के संघ स्थान पर शस्त्र पूजन एवं पथ संचलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भगवान श्रीराम के आदर्शों, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, चरित्र निर्माण तथा राष्ट्रसेवा के मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ शस्त्र पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने विजयादशमी के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए समाज में सद्भाव, अनुशासन और संगठन की भावना को मजबूत करने का संकल्प व्यक्त किया। इसके पश्चात आयोजित पथ संचलन में स्वयंसेवकों ने अनुशासित तरीके से सहभागिता की। आयोजन के माध्यम से समाज को एकजुट रहने, अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया गया।
भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान
कार्यक्रम के बौद्धिक सत्र को संबोधित करते हुए जिला श्रमिक प्रमुख मथुरा प्रसाद जी ने कहा कि “विजयादशमी हमें भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करती है। श्रीराम का जीवन मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, सत्य और न्याय का प्रतीक है। आज आवश्यकता है कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में समरसता तथा परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करें।”
उन्होंने कहा कि “विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन शक्ति, साहस और जिम्मेदारी के महत्व की याद दिलाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना भी विजयादशमी के दिन हुई थी। संघ का उद्देश्य समाज को संगठित करना, व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करना और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को जागृत करना है। उन्होंने स्वयंसेवकों से सामाजिक एकता और समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
अनेकता में एकता ही समाज की शक्ति: सुधीर जी
नगर कार्यवाह सुधीर जी ने अपने संबोधन में कहा कि “वर्तमान समय में भगवान श्रीराम के पदचिह्नों पर चलने और उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता उसकी विशेषता है और अनेकता में एकता की भावना ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है।”
उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ समन्वय स्थापित करें, आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में कार्य करें और अपने आचरण से समाज के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें। सामाजिक सद्भाव, सेवा और संगठन की भावना को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
रामवीर जी ने दिया सेवा, संस्कार और सामाजिक समरसता का संदेश
कार्यक्रम में उपस्थित रामवीर जी ने भी स्वयंसेवकों को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराने वाला संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “किसी भी संगठन की वास्तविक शक्ति उसके सदस्यों के अनुशासन, संस्कार, समर्पण और सेवा भावना में निहित होती है। स्वयंसेवकों का दायित्व केवल कार्यक्रमों में सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के बीच रहकर लोगों की समस्याओं को समझना, जरूरतमंदों की सहायता करना और सामाजिक एकता को मजबूत बनाना भी है।”
राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन: शाखा पालक रामवीर जी
वहीं शाखा पालक रामवीर जी ने कहा कि “भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और जनकल्याण की प्रेरणा देता है। इन आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाकर ही एक सशक्त, संस्कारित और समरस समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में विश्वास और सहयोग की भावना बढ़ाएं तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करें।”
बड़ी संख्या में गणमान्य स्वयंसेवकों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर जिला श्रमिक प्रमुख मथुरा प्रसाद जी, अय्यप्पा मंडल कार्यवाह ललित जी, नगर कार्यवाह सुधीर जी, शाखा कार्यवाह किशोर जी, शाखा मुख्य शिक्षक देवेंद्र जी, शाखा पालक रामवीर जी, मीडिया प्रमुख प्रकाश जी, शूरवीर जी, रामवीर जी, गणेश जी, ब्रह्म प्रकाश जी, पवन जी, वरिष्ठ स्वयंसेवक महेंद्र शर्मा जी, पूर्व मुख्य शिक्षक श्याम जी, देवेंद्र जी, योगेंद्र जी, अमन जी, सी.एन. बाबू जी, बालचंद्रन जी, रविंद्र जी, गोपाल जी, प्रदीप जी, अजय जी सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्र, समाज और संगठन के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करने के संदेश के साथ हुआ। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने स्वयंसेवकों को भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक समरसता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।







