नई दिल्ली: यूक्रेन से चल रही जंग की वजह से रूस में वर्कर्स की कमी हो रही है और उसके कई सारे सेक्टर्स को कामगारों की जरूरत है। अभी तक मध्य एशियाई देशों के नागरिक यहां काम करने आते थे। लेकिन अब रूस की कंपनियां भारत की तरफ नजरें घुमा रही हैं और यहां के वर्कर्स को हायर करने में प्राथमिकता दिखा रही हैं। रूस को इस दशक के अंत तक 1.10 करोड़ वर्कर्स की जरूरत है। बूढ़ी होती आबादी के चलते उसे ये संख्या पूरी करने के लिए विदेश से हायरिंग करनी होगी।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब दिसंबर में भारत आए थे, तब भारतीय वर्कर्स को लेकर टेंपरेरी लेबर माइग्रेशन पर बात हुई थी। उनके लिए रूस जाना आसान बनाने पर भी चर्चा की गई। इसे लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर भी हुआ था। इस समझौते से पहले ही रूस में भारतीयों को मिलने वाले वर्क परमिट की संख्या बढ़ चुकी थी। पिछले साल 56 हजार भारतीयों को वर्क परमिट मिला, जबकि 2021 में यही संख्या 5 हजार थी। इस वक्त रूस में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और चीन से सबसे ज्यादा वर्कर्स आ रहे हैं।
भारतीयों को क्यों जॉब देना चाहता है रूस?
अभी तक भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों से आने वर्कर्स बड़े शहरों में बर्फ हटाने का काम करते थे। मगर अब वे कंस्ट्रक्शन, रेस्तरां जैसी फील्ड में भी जॉब कर रहे हैं। वे अब दूर-दराज के शहरों में भी नौकरी करने पहुंच रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉस्को स्थित रिक्रूटमेंट एजेंसी इंट्रूड की ऑपरेशन डायरेक्टर एलेना वेलायेवा ने कहा, ‘हम रूसी जॉब मार्केट में एक बड़ा बदलाव देख रहे हैं।’ इस रिक्रूटमेंट एजेंसी की स्थापना दो साल पहले हुए थी और अब वह भारत से हायरिंग कर रहा है।
वेलायेवा ने बताया कि रूस की कंपनियां अब उन विदेशी वर्कर्स को जॉब देने में दिलचस्पी दिखा रही हैं, जो वीजा और कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों से बंधे होते हैं। उनका कहना है कि मध्य एशियाई देशों से आने वाले वर्कर्स वीजा फ्री सुविधा का फायदा उठाते हैं, जिस वजह से वह आसानी से यहां पर जॉब भी बदल पाते हैं। भारतीयों को हायर करने का फायदा ये है कि वे वीजा की शर्तों से बंधे होते हैं और सिर्फ उसी कंपनी के लिए जॉब कर सकते हैं, जिसने उन्हें स्पांसर किया है।
जॉब देने के लिए चलाए जा रहे प्रोग्राम
एलेना वेल्याएवा ने बताया कि इंट्रूड ने रूसी वेल्डर एसोसिएशन के साथ साझेदारी करके दक्षिण भारत के चेन्नई में वेल्डरों के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया है, जहां लोगों को रूस में नौकरी पर रखने से पहले ट्रेनिंग दी जाती है और उनका मूल्यांकन किया जाता है। अन्य एजेंसियों ने होटल और अन्य पदों पर काम करने के लिए आने वाले विदेशी वर्कर्स के लिए रूसी भाषा शॉर्ट टर्म क्रैश कोर्स शुरू किए हैं। भाषा सीखने की वजह से उनके लिए रूस में जॉब करना आसान हो जाता है।
मुंबई स्थित अंबे इंटरनेशनल के डायरेक्टर अमित सक्सेना ने कहा, ‘रूस उन देशों की लिस्ट में सबसे नया नाम है जो भारतीयों को रोजगार दे रहा है। रूस में इस समय वर्कर्स की कमी है। इसलिए उसे भारतीय वर्कर्स की जरूरत है।’ अंबे इंटरनेशनल ने रूस के लिए भारतीय वर्कर्स की भर्ती लगभग तीन महीने पहले ही शुरू की थी और वह भी सिर्फ मॉस्को क्षेत्र के लिए। मगर अब यह रूस के सुदूर पूर्व – व्लादिवोस्तोक और सखालिन द्वीप में भी कर्मचारियों की भर्ती कर रहा है।







