नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) पर गंभीर सवाल उठाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग (ECI) से जवाब मांगा है. कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपों में दम पाया गया तो इस पूरी प्रक्रिया को रद्द भी किया जा सकता है. हालांकि न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की बेंच ने चिकाकर्ताओं से यह भी पूछा कि आखिर आप लोग SIR को लेकर इतने आशंकित क्यों हैं. अगले ही स्वर में कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट को आरोपों में सच्चाई लगती है तो वह इस प्रक्रिया को पूरी तरह से रद्द कर सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके, सीपीआई(एम), कांग्रेस और पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया. DMK की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि आयोग इस प्रक्रिया को बेहद जल्दबाजी में पूरा करना चाहता है, जिससे लाखों मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं.
सिब्बल ने कहा, “पहले मतदाता सूची संशोधन में तीन साल तक का समय लगता था, लेकिन अब इसे मात्र एक महीने में पूरा करने की बात कही जा रही है. यह प्रक्रिया न केवल असंवैधानिक है बल्कि मतदाताओं के अधिकारों का हनन भी कर सकती है.” कोर्ट ने उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
डीएमके की याचिका में कहा गया है कि 27 अक्टूबर 2025 का ECI का आदेश जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाताओं के पंजीकरण के नियम 1960 के तहत सही नहीं बैठता है. यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 325 और 326 का उल्लंघन करता है. याचिकाकर्ता आर.एस. भारती (DMK ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी) ने दलील दी कि तमिलनाडु में पहले ही अक्टूबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच SSR (विशेष सारांश संशोधन) पूरी हो चुकी है, जिसमें मतदाता सूची अपडेट की गई थी और इन-एलिजिबल नाम हटाए गए थे. ऐसे में फिर से पूर्ण स्तर पर सत्यापन की जरूरत नहीं है.
DMK ने यह भी आपत्ति जताई कि SIR के तहत चुनाव आयोग के कर्मचारियों को नागरिकता सत्यापन का अधिकार दिया गया है, जबकि यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास सिटीजनशिप एक्ट 1955 के तहत है. पार्टी ने आशंका जताई कि इस प्रावधान से बड़ी संख्या में मतदाताओं को गलत तरीके से सूची से बाहर किया जा सकता है. सिब्बल ने यह भी कहा कि तमिलनाडु में नवंबर-दिसंबर के दौरान भारी बारिश, बाढ़ राहत और कटाई के मौसम में ऐसा अभियान चलाना व्यावहारिक नहीं है. कई इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या है, जिससे डेटा अपलोड और सत्यापन प्रक्रिया बाधित होगी.
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सिब्बल से कहा, “आप ऐसा कह रहे हैं जैसे यह देश में पहली बार मतदाता सूची तैयार की जा रही हो, फिर भी आयोग को जवाब देना ही होगा.” सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सभी याचिकाओं पर चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है और कहा कि जवाब मिलने के बाद अगली सुनवाई में तय किया जाएगा कि इस संशोधन प्रक्रिया को रद्द किया जाए या नहीं. मामले की अगली सुनवाई ECI के उत्तर दाखिल होने के बाद होगी.







