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Home राष्ट्रीय

इस सेक्टर में 70 हजार करोड़ का टैक्स घोटाला… IT विभाग की जांच में चौंकाने वाले खुलासे

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 20, 2026
in राष्ट्रीय
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टैक्स घोटाला
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बेंगलुरु: देशभर में रेस्टोरेंट सेक्टर से जुड़ा एक बड़ा टैक्स घोटाला सामने आया है. आयकर विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि 2019-20 से अब तक करीब 70,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर छिपाया गया. यह खुलासा पिछले साल नवंबर में हैदराबाद के कुछ रेस्टोरेंट्स पर हुई रूटीन रेड से शुरू हुई जांच के बाद हुआ.

आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा 133A के तहत जांच करते हुए 2019-20 से 2025-26 तक के छह वित्तीय वर्षों का लगभग 60 टेराबाइट ट्रांजेक्शनल डेटा खंगाला. जांच में सामने आया कि संबंधित बिलिंग सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल देशभर में एक लाख से अधिक रेस्टोरेंट करते हैं और यह भारत के रेस्टोरेंट बाजार का लगभग 10 प्रतिशत कवर करता है.

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बैकएंड एनालिसिस में करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये की कुल बिलिंग दर्ज पाई गई. इनमें से 13,317 करोड़ रुपये की एंट्रियों को “पोस्ट-बिलिंग डिलीशन” के रूप में चिन्हित किया गया, जो बिक्री आंकड़ों में सुनियोजित हेरफेर की ओर इशारा करता है.

डिजिटल फॉरेंसिक जांच और एआई का इस्तेमाल

सॉफ्टवेयर प्रदाता के अहमदाबाद स्थित केंद्र से बैकएंड एक्सेस मिलने के बाद हैदराबाद स्थित आयकर भवन की डिजिटल लैब में फॉरेंसिक जांच की गई. जांचकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जेनरेटिव AI टूल्स की मदद से 1.77 लाख रेस्टोरेंट आईडी से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया. ओपन-सोर्स जानकारी के जरिए जीएसटी नंबर और पैन से मैपिंग भी की गई.

कैसे दिया गया अंजाम?

  • कैश बिलों की चयनात्मक डिलीशन: रेस्टोरेंट्स कथित तौर पर कार्ड, यूपीआई और कैश समेत सभी ट्रांजेक्शन बिलिंग सिस्टम में दर्ज करते थे. लेकिन रिटर्न फाइल करने से पहले कैश ट्रांजेक्शन से जुड़े कुछ बिल डिलीट कर दिए जाते थे, जिससे घोषित आय कम दिखाई जाती थी.
  • बल्क डिलीशन: कुछ मामलों में चुनिंदा तारीखों की पूरी बिलिंग रिकॉर्ड (कभी-कभी 30 दिन तक) मिटा दी जाती थी और आयकर रिटर्न में वास्तविक बिक्री का सिर्फ एक हिस्सा दिखाया जाता था.
  • बिना डिलीशन के अंडर-रिपोर्टिंग: कुछ संस्थाओं ने बिलिंग एंट्री डिलीट नहीं की, लेकिन आयकर रिटर्न में दर्ज टर्नओवर वास्तविक बिक्री से कम दिखाया.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 3,734 पैन नंबरों के विश्लेषण में पांच साल के दौरान 5,141 करोड़ रुपये की कथित बिक्री दबाने के संकेत मिले. इन दोनों राज्यों के 40 रेस्टोरेंट्स की विस्तृत जांच में ही करीब 400 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाने का मामला सामने आया. अधिकारियों का अनुमान है कि कुछ मामलों में 27 प्रतिशत तक बिक्री घोषित नहीं की गई.

कर्नाटक में सबसे ज्यादा डिलीशन

राज्यवार आंकड़ों में कर्नाटक में लगभग 2,000 करोड़ रुपये की डिलीशन दर्ज की गई, जो सबसे ज्यादा है. इसके बाद तेलंगाना (1,500 करोड़) और तमिलनाडु (1,200 करोड़) का स्थान है. जिन पांच राज्यों में सबसे ज्यादा कथित टैक्स चोरी के मामले सामने आए हैं, उनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात शामिल हैं.

शुरुआत में सर्च ऑपरेशन हैदराबाद के रेस्टोरेंट्स पर केंद्रित थे, बाद में विशाखापट्टनम और तेलंगाना-आंध्र प्रदेश के अन्य शहरों तक विस्तार किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने जांच का दायरा देश के अन्य हिस्सों तक बढ़ा दिया है.

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह निष्कर्ष एक विशेष बिलिंग सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म से जुड़ा है. हालांकि, रेस्टोरेंट उद्योग में उपयोग किए जा रहे अन्य सॉफ्टवेयर सिस्टम की भी जांच की जा सकती है.

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