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राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया के आधार स्तंभ हैं शिक्षक

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 4, 2024
in राष्ट्रीय, विशेष
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teacher
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रमेश पोखरियाल 'निशंक'रमेश पोखरियाल ‘निशंक’


नई दिल्ली: मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्या है और इसे कैसे सफलतापूर्वक लागू हो सकता है ? मेरा सर्वत्र यही उत्तर रहा है कि नयी शिक्षा नीति नवभारत निर्माण की आधारशिला है और देश के शिक्षक ही शिक्षा नीति के माध्यम से विश्वगुरु भारत का निर्माण करने में सक्षम हैं ।

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शिक्षा ज्ञान, जानकारी और समृद्धि के वास्तविक धारक शिक्षक ही होते है जिसका इस्तेमाल कर वह हमारे जीवन के लिये हमें विकसित और तैयार करते हैं। हमारी सफलता के पीछे हमारे शिक्षक का हाथ होता है। हमारे माता-पिता की तरह ही हमारे शिक्षक के पास भी ढ़ेर सारी व्यक्तिगत समस्याएँ होती हैं लेकिन फिर भी वह इन सब को दरकिनार कर रोज स्कूल और कॉलेज आते हैं तथा अपनी जिम्मेदारी का अच्छे से निर्वाह करते हैं।शिक्षक केवल ज्ञान के प्रदाता नहीं होते, वे हमारे जीवन के मार्गदर्शक और भविष्य के निर्माता होते हैं। कई बार मुझे महसूस होता है कि हिमालय की कठिन परिस्थितियों में, जहाँ मैंने आठ किलोमीटर की यात्रा करके शिक्षा प्राप्त की, वहीं से मैंने शिक्षा के महत्व को समझा। इस कठिन यात्रा ने मुझे शिक्षा की शक्ति का अहसास कराया। बाद में, जब मैंने एक शिक्षक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, तो मैंने न केवल शिक्षा के महत्व को महसूस किया, बल्कि यह भी समझा कि शिक्षक का रोल केवल किताबों तक सीमित नहीं होता। शिक्षक जीवन की बुनियाद रखने वाले होते हैं, जो हमारे समाज के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

सर्वप्रथम मैं सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की ढेर सारी शुभकामनायें देता हूँ अपनी प्रखरता, उत्कृष्टता एवं समर्पण की भावना से प्रेरित होकर आपने राष्ट्र निर्माण का जो संकल्प लिया है उसका मैं नमन करता हूँ। शिक्षक दिवस एक विशिष्ट दिन है जब हम अपने अध्यापकों को उनकी नि:स्वार्थ सेवाओं से भावी पीढ़ी के निर्माण के लिए अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं । शिक्षक अपने छात्रों के लिए मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शन होतें है। शिक्षक दिवस का दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्म दिवस के अवसर पर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। हम इन महान व्यक्तित्व को एक राजनीतिज्ञ, विद्वान, दार्शनिक और महान शिक्षाविद के रूप में उनके योगदान की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

मेरे राजनीतिक सफर में, जब मुझे प्रदेश का मुख्यमंत्री एवं भारत का शिक्षा मंत्री बनने का अवसर मिला, तो मैंने हर स्तर पर शिक्षा को इस तरह से आकार देने का संकल्प लिया, जिससे भारत एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभर सके। पहली भारत केंद्रित , विश्व के सबसे बड़े नवाचार से उपजी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाना एक सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि यह भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। एक अध्यापक होने के नाते मैं गर्व से कह सकता हूँ कि इस नीति की सफलता का वास्तविक आधार हमारे शिक्षक ही हैं।

महर्षि अरविंद ने कहा था कि शिक्षक राष्ट्र की संस्कृति के माली होते हैं। वे अपने ज्ञान से हमारे समाज को सुसंस्कृत और शक्तिशाली बनाते हैं। संत कबीर ने गुरु को ईश्वर से भी बड़ा माना है, क्योंकि गुरु ही हमें ईश्वर से मिलाने का मार्ग दिखाता है। आज, इस उक्ति का अर्थ और भी गहरा हो जाता है, जब हम देखते हैं कि हमारे शिक्षक न केवल विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान कर रहे हैं, बल्कि वे उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार कर रहे हैं।

शिक्षक राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया के स्तंभ हैं। वे नई पीढ़ी को नैतिक, जिम्मेदार और उत्पादक नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका योगदान अदृश्य होते हुए भी समाज के हर पहलू को प्रभावित करता है। शिक्षक अवसरों और संभावनाओं के द्वार खोलते हैं, जिससे हमारे समाज का हर बच्चा अपने सपनों को पूरा कर सके। वे छात्रों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के बीज बोते हैं, जो एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य है, भारत को एक आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करना, और इस उद्देश्य को केवल शिक्षक ही साकार कर सकते हैं। वे शिक्षा के माध्यम से छात्रों में आत्मनिर्भरता की भावना को जागृत करते हैं, जिससे वे अपने जीवन में आत्मनिर्भरता की नींव रख सकें। शिक्षक ही हैं जो छात्रों को सही दिशा दिखाते हैं, उन्हें जीवन के लिए तैयार करते हैं, और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करते हैं।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे महान विचारकों ने भी शिक्षकों की महत्ता को पहचाना और उनका सम्मान किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी देश को भ्रष्टाचार मुक्त और सुंदर दिमागों का देश बनाना है, तो इसमें शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

शिक्षकों का महत्व: समाज के निर्माता
शिक्षक हमारे समाज के सबसे महत्वपूर्ण सदस्यों में से एक होते हैं। वे न केवल बच्चों को शिक्षा देते हैं, बल्कि उन्हें जीवन का उद्देश्य भी प्रदान करते हैं, उन्हें एक सफल नागरिक बनने के लिए तैयार करते हैं, और जीवन में सफल होने की प्रेरणा देते हैं। आज के बच्चे कल के नेता हैं, और शिक्षक ही वह महत्वपूर्ण बिंदु हैं जो बच्चों को उनके भविष्य के लिए तैयार करते हैं।

शिक्षक विद्यार्थियों के शैक्षिक सफलता, व्यक्तिगत विकास, और जीवनभर की सीखने की यात्रा पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। वे छात्रों में सकारात्मक संबंधों को बढ़ावा देते हैं और उन्हें उनकी पूरी क्षमता तक पहुँचने के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षण के माध्यम से वे छात्रों में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नींव रखते हैं, जो एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।शिक्षकों का प्रभाव केवल शिक्षा तक सीमित नहीं होता; वे समाज के भविष्य को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। शिक्षक बच्चों को उनके सबसे प्रभावशाली वर्षों में शिक्षित करते हैं, चाहे वह प्री-स्कूल हो, अतिरिक्त पाठ्यक्रम गतिविधियाँ हों, खेल हो, या पारंपरिक कक्षाएँ हों। शिक्षक अगली पीढ़ी के नेताओं को इस तरह से आकार देने की क्षमता रखते हैं जिससे समाज स्थानीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर सकारात्मक और प्रेरणादायक बने।

शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं। वे एक समर्थन प्रणाली के रूप में कार्य कर सकते हैं जो छात्रों के जीवन में अन्यत्र अनुपलब्ध हो सकती है। वे आदर्श और प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं जो छात्रों को आगे बढ़ने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षक अपने छात्रों को उनकी असफलताओं और सफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं और अच्छे शिक्षक कभी भी अपने प्रतिभाशाली छात्रों को उनकी पूरी क्षमता तक पहुँचने से रोकने नहीं देते।

शिक्षण एक कठिन काम है, लेकिन यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आप किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में सबसे अधिक प्रभाव डाल सकते हैं। शिक्षक न केवल ज्ञान का प्रसार करते हैं, बल्कि वे समाज के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वे विद्यार्थियों में रचनात्मकता को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करते हैं।

शिक्षक समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत होते हैं। वे बच्चों को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, कड़ी मेहनत करने, और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षा का सही मार्गदर्शन और समर्थन देकर, शिक्षक एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान देते हैं, जो आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है।

शिक्षक न केवल बच्चों के जीवन को आकार देते हैं, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत आधार भी प्रदान करते हैं। उनका योगदान अदृश्य होते हुए भी समाज के हर पहलू को प्रभावित करता है। शिक्षक वह पुल हैं जो बच्चों को उनकी शिक्षा से जोड़ते हैं और उन्हें एक बेहतर भविष्य की दिशा में अग्रसर करते हैं। इस शिक्षक दिवस पर, हम सभी को शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए, जो न केवल हमारे जीवन को आकार देते हैं, बल्कि पूरे समाज को एक सकारात्मक दिशा में ले जाते हैं। शिक्षकों का समर्पण, उनकी मेहनत, और उनका दृढ़ संकल्प ही हमें एक मजबूत, आत्मनिर्भर और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में उभरने में मदद करेगा।

आज, हमारे शिक्षकों के समर्पण और मेहनत की बदौलत ही हमारा समाज और देश आगे बढ़ रहा है। शिक्षक हमारे कल के भविष्य के निर्माता हैं। वे न केवल हमारे समाज को सकारात्मक दिशा देते हैं, बल्कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की नींव भी रखते हैं। इस शिक्षक दिवस पर, मैं उन सभी शिक्षकों को सलाम करता हूँ जिन्होंने न केवल मुझे, बल्कि पूरे देश को आगे बढ़ने का मार्ग दिखाया। आपका समर्पण और आपकी मेहनत ही हमारे भविष्य को उज्ज्वल बनाती है। आइए, हम सब मिलकर शिक्षकों के इस अनमोल योगदान का सम्मान करें और उन्हें वह सम्मान दें जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। शिक्षकों की मेहनत और उनके समर्पण के बिना, हमारा आत्मनिर्भर भारत का सपना अधूरा है। इसलिए, हमें उनके योगदान को समझना और उनका सम्मान करना चाहिए, ताकि वे शिक्षा के क्षेत्र में और भी उत्कृष्ट कार्य कर सकें और भारत को विश्व में एक नई ऊँचाई पर ले जा सकें

शिक्षक बना सकते हैं विश्व गुरु हमेशा से मैंने कहा है कि शिक्षक भारत को विश्व गुरु बना सकते हैं.

गुरु बिना ज्ञान न उपजे, गुरु बिन मिल सके ना मोक्ष ।
गुरु बिन लिखे ना सत्य को, गुरु बिन मिटे ना दोष ।।

देश, समाज, विश्व उत्थान के लिए शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिकाः-
देश, समाज, विश्व उत्थान के लिए शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्णहै और इस शिक्षा का केन्द्र बिन्दु हमारे शिक्षक हैं। सौभाग्य से डॉ.अब्दुल कलामका सानिध्य मुझे मिलता रहा, डॉ. अब्दुल कलाम ने शिक्षकों के लिए लिखा है कि-‘‘शिक्षक शिक्षा एक महान पेशा है जो चरित्र, योग्यता और भविष्य को आकार देता है। अगर लोग मुझे अच्छे शिक्षक के रूप में याद करते हैं तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।’’ देश के पूर्व राष्ट्रपति और सर्वोत्कृष्ट वैज्ञानिक रहे डॉ. कलाम के विचारों को जानकर मन में यह ढांढस जरूर बंधता है कि आज भी हमारे समाज में गुरुओं के प्रति अगाध सम्मान है।

केवल शिक्षक ही विश्व गुरु बना सकते हैंः-
पुराने कालखण्ड में भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने का श्रेय यदि किसी को देना हो तो निश्चित रूप से अपने गुरुओं को दे सकते हैं। गुरुकुलों की श्रेष्ठ परम्परा, ज्ञान-विज्ञान अर्जित करने के लिए उनका समर्पण ही हमारी समृद्धि का मुख्य आधार था। प्रधानमंत्री जी के नव भारत के निर्माण का विषय हो या भारत को पुनः विश्व गुरु स्थापित करने का संकल्प हो, या इसकी आधारशिला आप लोग ही हैं।

नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन की जिम्मेवारीः-
यशस्वी प्रभानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व वाली सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारत को वैश्विक शक्ति बनाने के लिए कृतसंकल्पित हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का यह प्रारुप हमारे सामने है। इस प्रारुप में विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापरक, व्यवहारिक, प्रोद्योगिकीयुक्त, रोजगारोन्मुख, नवाचारयुक्त, संस्कारयुक्त मूल्यों पर आधारित शिक्षा पर हमारा ध्यान केन्द्रित है। यह तभी सम्भव है जब हमारे पास सर्वोत्कृष्ट अध्यापक होंगे. इसीलिए श्रेष्ठ मानकों के आधार पर विश्वस्तरीय अध्यापकों को तैयार करने हेतु प्रशिक्षण की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। उन्हें सॉफ्ट स्किल्स सिखाने की बात की गई है। चाहे स्कूली या उच्च शिक्षा हो दोनों में समयबद्ध तरीके से अध्यापकों में क्षमता विकास प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण माना गया है। भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं नवाचार को मुख्य आधार बनाते हुए शोध को बढ़ावा देते हुए विश्व प्रतिस्पर्धा में अपनी प्रभावी भूमिका स्थापित करने के लिए हम कृतसंकल्पित हैं।

विद्यार्थियों में सोचने की क्षमता को विकसित करनाः-
डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा- ‘‘हमारा लोकतंत्र अज्ञानता, अनुशासन और अरुचि के कारण भ्रमित हो गया है। शैक्षिक संस्थाएं हैं पर उनका सांस्कृतिक  स्तर नहीं है। हमें लिखना-पढ़ना तो सिखाया जाता है पर सोचना नहीं सिखाया जाता, जो बेहतर जानते हैं, बोलने से डरते हैं।’’ सोचने का प्रशिक्षण हमें हमारा अध्यापक देगा पर अगर उसमें सोचने की क्षमता नहीं होगी फिर तो बच्चों की क्षमता का विकास करना असंभव है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति अत्यन्त भव्य और उत्साहपूर्ण है, परन्तु इसका व्यवहारिक रूप से क्रियान्वयन कैसे सुनिश्चित होगा। यह एक चुनौती है इस सब के लिए योग्य गुरुजनों की आवश्यकता है। ऐसे गुरुओं की आवश्यकता है जो न केवल प्रखर हों बल्कि अपने कत्र्तव्य के प्रति समर्पित हों।

राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि का स्तम्भ है योग्य अध्यापकः- अपने विदेशी प्रवासों के दौरान कई विद्यालय, विश्वविद्यालयों को नजदीकी से देखने का मौका मिला एक बात समझ में आई कि चाहे फिनलैण्ड हो, दक्षिण कोरिया हो, जापान, कनाड़ा हो, नार्वे, जर्मनी, अमेरिका हो इन देशों की समृद्धि और सफलता का मूल कारण उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा है। अगर आप उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा की बात करें तो उसका आधार स्तम्भ सर्वोत्कृष्ट अध्यापक है और सर्वोत्कृष्ट अध्यापक बनने के लिए सर्वोत्कृष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। हमारा यह निश्चय है कि हमारे अध्यापक विश्व स्तरीय अध्यापक हों और पूरे विश्व में भारतीय कीर्ति को फैलायें।

अपनी मजबूरी से इच्छा से बने अध्यापकः- हम चाहते हैं कि अध्यापक स्वेच्छा से अध्यापन को चुने, मजबूरी में अध्यापक न बने। अध्यापक बनना हमारी प्राथमिकता हो। दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में इंजीनियर, वैज्ञानिक, डॉक्टरों की तर्ज पर अध्यापकों को प्रशिक्षित किया जाता है और उनका आर्थिक, सामाजिक स्तर इन्हीं लोगों के बराबर होता है। राष्ट्र के भविष्य के निर्माण को जो सम्मान मिलना चाहिए उसे दिलाने के लिए हम कृतसंकल्प हैं। वहीं हमारे अध्यापकों को अपनी गरिमा का पूरा ध्यान रखते हुए कार्य करने की आवश्यकता है। मैं, हमारे शिक्षकों के प्रति हार्दिक आभार सम्मान व्यक्त करता हूं और भावी पीढ़ियों को जिम्मेदार नागरिक और अच्छे व्यक्ति बनने में सहायक उनके सफल प्रयास का अभिनंदन करता हूं।

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