नई दिल्ली : संभल के अमरपति खेड़ा और चंद्रेश्वर तीर्थ की ऐतिहासिक जमीनों की जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने दौरा किया. इस दौरान राजस्व विभाग की टीम की सहायता से जमीन की पैमाइश कराई गई और उसे ASI के रिकॉर्ड से मिलाया गया.
जांच में सामने आया कि चंद्रेश्वर तीर्थ की 50 बीघा भूमि और अमरपति खेड़ा की डेढ़ बीघा भूमि पर अवैध कब्जे हैं. इस महत्वपूर्ण खोज के बाद अधिकारियों ने इन कब्जों की विस्तृत जानकारी जुटाई.
संरक्षित स्थल होने के बावजूद रखरखाव में लापरवाही
हालांकि, अमरपति खेड़ा और चंद्रेश्वर तीर्थ 1920 से ASI के संरक्षण में हैं, लेकिन उचित देखभाल न होने की बात भी सामने आई है. इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने ASI को पत्र लिखकर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे.
संभल के ऐतिहासिक स्थल पर बढ़ रहा अतिक्रमण
यह मामला संभल सदर तहसील के अल्लीपुर खुर्द गांव से जुड़ा हुआ है, जहां ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थल अवैध कब्जों के कारण खतरे में हैं. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण बेहतर ढंग से किया जाएगा.
अमरपति खेड़ा 1920 से पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित है. यहां पृथ्वीराज चौहान के समकालीन गुरु अमर बाबा सहित 21 साधु-संतों की समाधियां हैं. चंद्रेश्वर महादेव मंदिर, चंदायन गांव में स्थित है. यहां प्राचीन शिव मंदिर है.







