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Home राजनीति

सरकार तो बन गई, जानें अब कैसा हो सकता है मोदी 3.0 का पहला बजट

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 9, 2024
in राजनीति, राष्ट्रीय
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Modi 3.0
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नई दिल्ली: देश में भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने जा रही है. नरेंद्र मोदी को एक बार फिर संसदीय दल का नेता चुना गया है और वह तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. देश में चुनाव के बाद अब सरकार का गठन तो लगभग पूरा होने को है, लेकिन सबसे अहम बात ये है कि सरकार बनते ही सबसे बड़ा काम बजट पेश करने का है.

देश में चुनाव से पहले सरकार अंतरिम बजट पेश करती है और फिर चुनाव के बाद जो नई सरकार बनती है, वह पूर्ण बजट लेकर आती है. पूर्व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में अंतरिम बजट पेश किया था और अब पूर्ण बजट जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में होना है. इसलिए अब सबकी निगाहें इस ओर हैं कि सरकार का बजट कैसा ?

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क्या सरकार चुनेगी लोकप्रियता का रास्ता?

लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अकेले के दम पर बहुमत नहीं मिला है. उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े सूबे में बीजेपी का चुनाव प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा है. वहीं 2025 तक देश के कई राज्यों में चुनाव भी होने हैं, जिसमें बिहार और दिल्ली शामिल हैं. ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार बजट में लोकलुभावन योजनाओं का रास्ता चुन सकती है.

ऐसे में सरकार नई कल्याणकारी योजना या गरीबों की सहायता करने वाली योजनाओं का ऐलान कर सकती है. वहीं मौजूदा सरकार में गठबंधन की सहयोगी पार्टियों की अहम भूमिका है, जो अगले 5 साल तक रहने वाली है. इस बारे में मूडीज एनालिटिक्स का कहना है कि सरकार के नीति निर्माण पर अब गठबंधन के सहयोगियों की छाप दिख सकती है.

ईटी ने बीआर अंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स यूनिवर्सिटी बेंगलुरू के वाइस चांसलर और इकोनॉमिस्ट एन. आर. भानुमूर्ति के हवाले से कहा है कि हर सरकार कल्याणकारी योजनाओं पर काम करती है, लेकिन जब गठबंधन निर्णायक होता है, तब ऐसी योजनाओं पर फोकस बढ़ जाता है.

क्या लग जाएगी सुधारों पर लगाम?

नरेंद्र मोदी के पिछले 2 कार्यकाल में देश ने कई इकोनॉमिक रिफॉर्म देखे. इसमें जीएसटी को लागू करना सबसे बड़ी चुनौती थी. इसके अलावा रेरा का सही से इंप्लिमेंटेंशन, दिवाला कानून लाना इत्यादि इस सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में से एक है. ऐसे में नई गठबंधन सरकार यानी मोदी 3.0 में क्या इन सुधारों पर रोक लग जाएगी?

इस बारे में मूडीज एनालिटिक्स का कहना है कि गठबंधन सरकार आर्थिक और राजकोषीय सुधार पर रोक लगा सकती है. सरकार ने 2024-25 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.1 प्रतिशत के बराबर लाने का लक्ष्य रखा है. मौजूदा समय में ये 5.6 प्रतिशत पर है. जबकि एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए इसे 4.5 प्रतिशत होना चाहिए.

इस बारे में इकोनॉमिस्ट धनंजय सिन्हा का कहना है कि पिछले 5 से 7 साल में सरकार का फोकस सप्लाई साइड पर रहा है. जैसे कॉरपोरेट टैक्स में कटौती, बैंकों में फिर पैसा डालना, फंसे हुए कर्ज का निपटान करना और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना. सरकार को कमजोर जनादेश मिलने का एक कारण ये भी माना जा रहा है.

ऐसे में संभावना है कि मोदी 3.0 में अब सरकार डिमांड साइड पर फोकस बढ़ा सकती है. सरकार ऐसी योजनाएं ला सकती है, जो गांव के लेवल तक पैसा पहुंचाए, जहां ग्रामीण इकोनॉमी में पनप रहे रोष को कम किया जा सके.

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