कानपुर। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में सब्सिडी घोटाले की जांच अब प्रदेश स्तर पर तेज हो गई है। उद्योग विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के उपायुक्त उद्योगों से संदिग्ध लाभार्थियों और ऋण वितरण की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब तक केवल 40 जिलों से ही रिपोर्ट प्राप्त हुई है। बैंक आफ इंडिया की फ्राड मानिटरिंग रिपोर्ट (एफएमआर) में कानपुर की कई शाखाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आने के बाद विभाग ने अन्य जिलों में भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
उद्योग निदेशक के.विजयेन्द्र पांडियन ने इस मामले में संयुक्त आयुक्त उद्योग सुनील कुमार की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी,कमेटी ने सभी 75 जिलों से रिपोर्ट मांगी गई थी, दो माह बाद केवल 40 जिलों से रिपोर्ट आई है। उद्योग विभाग ने बैंक अधिकारियों को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं।
30 खाते संदिग्ध मिले थे
बीते फरवरी माह में बैंक आफ इंडिया की आंतरिक जांच में सामने आया था कि कई लाभार्थियों ने कागजों पर उद्योग स्थापित दिखाकर करोड़ों रुपये की सब्सिडी हासिल कर ली। बैंक की आडिट रिपोर्ट के अनुसार दादा नगर, सीसामऊ, कौशलपुरी, मंधना और रनियां शाखाओं के 30 खाते संदिग्ध पाए मिले थे। चार शाखा प्रबंधकों ने मुख्यालय को एफएमआर भेजते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि की गई थी। इसके बाद 15 बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया था।
जांच में ये आया सामने
जांच में यह भी सामने आया था कि ओडीओपी दिशा-निर्देशों के विपरीत एफडीआर के विरुद्ध एलएटीडीआर ऋण स्वीकृत किए गए। सब्सिडी की राशि खाते में आने के बाद उसे दो वर्ष तक सुरक्षित रखने के बजाय दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। कई मामलों में ऋण वितरण के बाद एफडी वापस कर खाते बंद कर दिए गए। कुछ शाखाओं में ऋण संबंधी मूल दस्तावेज भी सुरक्षित नहीं मिले। दादा नगर शाखा की जांच में खुलासा हुआ कि एक ही परिवार अथवा समूह से जुड़े प्रतिष्ठानों ने बार-बार एफडी बनाकर ओडीओपी के तहत ऋण लिया।
इस तरह से हुआ घोटाला
प्रत्येक मामले में करीब 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी प्राप्त की गई। यह प्रक्रिया कम से कम 11 बार दोहराई गई, जिससे लगभग 2.20 करोड़ रुपये की सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई गई थी। सीसामऊ शाखा में एम/एस एवन टेक्सटाइल्स समेत कई खातों में वर्ष 2022 से 2025 के बीच नियमों के विपरीत ऋण स्वीकृत होने और आवश्यक अभिलेख सुरक्षित न रखने की बात सामने आई है। बैंक की रिपोर्ट में एम/एस एस एंड डी सन्स, टापलाइन इंडस्ट्रीज, जेडएस पालिमर्स, काश्वी प्लास्टिक्स, पूजा प्लास्टिक्स और विद पेपर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड समेत कई खाताधारकों के लेनदेन संदिग्ध बताए गए हैं।
इतने करोड़ की सब्सिडी गई
जिला उद्योग केंद्र के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक कानपुर में 625 इकाइयों को करीब 56.95 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की गई। शुरुआती जांच में छह करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी में गड़बड़ी पकड़ी गई थी। इन मामलों के सामने आने के बाद उद्योग निदेशक ने जांच कमेटी गठित की थी, लेकिन ओडीओपी की रिपोर्ट देने में 35 जिलों के उपायुक्त उद्योग रिपोर्ट देने में कतरा रहे हैं, इन्हें दोबारा से रिमाइंडर भेजकर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा सके।







