प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
कर्णप्रयाग। उत्तराखंड की आस्था, परंपरा और सामूहिक स्मृति से जुड़ी सबसे बड़ी यात्राओं में से एक—श्री नंदा देवी राजजात—अब वर्ष 2026 में आयोजित नहीं होगी। राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने कर्णप्रयाग में आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि हिमालयी क्षेत्र में आवश्यक कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए, जिस कारण यात्रा को 2027 तक स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।
हर 12 वर्ष में निकलने वाली लगभग 280 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा को ‘हिमालयी महाकुंभ’ कहा जाता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पहाड़ की पहचान, लोक-संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही सामूहिक चेतना का प्रतीक है। ऐसे में इसका टलना सिर्फ तारीखों का बदलाव नहीं—बल्कि गांवों की वर्षों की तैयारी, स्थानीय रोजगार, और क्षेत्र की उम्मीदों पर सीधा असर है।
‘अधूरे काम’—पर कौन ज़िम्मेदार ?
प्रेस वार्ता में जिन “आवश्यक कार्यों” का हवाला दिया गया, उन्हें लेकर स्पष्टता का अभाव है। कौन से काम अधूरे हैं ? क्या ये सड़क, पुल, पैदल मार्ग, स्वास्थ्य, संचार या आपदा प्रबंधन से जुड़े हैं? 12 वर्षों के अंतराल के बावजूद ये तैयारियां समय पर क्यों नहीं हो सकीं ? इन सवालों के जवाब अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
स्थानीय नाराज़गी, राजनीति के आरोप
राजजात के स्थगन से स्थानीय लोगों में निराशा साफ़ झलक रही है। कई ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने सरकार पर यात्रा को राजनीतिक चश्मे से देखने और प्रबंधन में ढिलाई बरतने के आरोप लगाए हैं। स्थानीय व्यापारियों, घोड़ा-खच्चर संचालकों, होम-स्टे और कारीगरों के लिए राजजात आजीविका का बड़ा अवसर होती है—जिस पर अब एक साल की और अनिश्चितता जुड़ गई है।
2027 की तैयारी, क्या होगी ठोस समयरेखा ?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 2027 के लिए सरकार और प्रशासन कब तक स्पष्ट रोडमैप जारी करेंगे। क्या कामों की डेडलाइन तय होगी ? क्या नियमित प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी ? और सबसे अहम—क्या अगली राजजात सिर्फ काग़ज़ों में नहीं, ज़मीन पर भी पूरी तैयारी के साथ दिखेगी?
सरकार से सीधे सवाल
12 वर्षों की अवधि में आवश्यक कार्य पूरे क्यों नहीं हुए ? क्या स्थगन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी ? स्थानीय समुदायों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई का क्या प्रावधान है ? 2027 तक के लिए स्पष्ट, सार्वजनिक और समयबद्ध कार्ययोजना कब जारी होगी ?
नंदा देवी राजजात केवल एक यात्रा नहीं—यह उत्तराखंड की आत्मा से जुड़ा आयोजन है। ऐसे में इसके बार-बार टलने के कारणों पर पारदर्शिता, जवाबदेही और ठोस कार्रवाई की मांग अब और तेज़ हो गई है।






