प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। बीजेपी संगठन में नई टीम के गठन के बाद अब मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक आगामी कैबिनेट विस्तार में कई वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि कुछ नए और युवा चेहरों को सरकार में जिम्मेदारी मिल सकती है।
सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, संभावित विस्तार में 15 से 17 नए चेहरों को मंत्री बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से कैबिनेट विस्तार या किसी मंत्री के विभाग में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
प्रदर्शन बनेगा सबसे बड़ा पैमाना
संभावित फेरबदल में मंत्रियों के राजनीतिक कद के साथ-साथ उनके कामकाज और ग्राउंड कनेक्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी के भीतर मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा किए जाने की चर्चा है।
2027 में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव और 2029 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए सरकार और संगठन के स्तर पर ऐसी टीम तैयार करने पर जोर हो सकता है, जो जनता के बीच सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को प्रभावी तरीके से पहुंचा सके।
अश्विनी वैष्णव को मिल सकता है बड़ा प्रमोशन
कैबिनेट में संभावित बदलाव को लेकर सबसे प्रमुख चर्चाओं में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम सामने आ रहा है। वर्तमान में उनके पास रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय हैं।
राजनीतिक चर्चाओं में उनके कामकाज को देखते हुए उन्हें सरकार के शीर्ष स्तर के प्रभावशाली मंत्रियों में और महत्वपूर्ण भूमिका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही, उनके पास मौजूद कई मंत्रालयों के पुनर्वितरण की संभावना भी चर्चा में है।
नितिन गडकरी के मंत्रालय में बदलाव की अटकल
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उनके मंत्रिमंडल से बाहर होने की बात स्पष्ट नहीं है। ज्यादा संभावना उनके विभाग में बदलाव को लेकर जताई जा रही है।
चर्चाओं के मुताबिक सरकार कुछ भारी-भरकम मंत्रालयों की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण कर सकती है। गडकरी के संदर्भ में E-20 पेट्रोल जैसे मुद्दों पर हुई राजनीतिक बहस का भी उल्लेख किया गया है।
14 मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालय
मौजूदा स्थिति में कई केंद्रीय मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। रिपोर्ट के मुताबिक 14 मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग हैं। ऐसे में कैबिनेट विस्तार के दौरान कुछ मंत्रालयों का पुनर्वितरण कर नए मंत्रियों को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं, जबकि मौजूदा व्यवस्था में लगभग 69 मंत्री हैं। इस लिहाज से नए चेहरों को शामिल करने के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है।
युवा, महिला और चुनावी राज्यों पर नजर
संभावित कैबिनेट विस्तार में केवल राजनीतिक अनुभव ही नहीं, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
बीजेपी और विपक्ष दोनों की नजर इस बात पर है कि नई कैबिनेट में:
- युवाओं और नए चेहरों को कितना प्रतिनिधित्व मिलता है।
- महिलाओं की भागीदारी कितनी बढ़ती है।
- उत्तर प्रदेश को कितना प्रतिनिधित्व मिलता है।
- पंजाब और गोवा जैसे चुनावी राज्यों को कितना महत्व मिलता है।
- सहयोगी दलों को कितनी जगह दी जाती है।
इन समीकरणों के जरिए सरकार 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है।
सितंबर-अक्टूबर में विस्तार की चर्चा
राजनीतिक चर्चाओं में कैबिनेट विस्तार का समय सितंबर या अक्टूबर के आसपास बताया जा रहा है। हालांकि, तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कुल मिलाकर संभावित फेरबदल का संकेत यह है कि मोदी सरकार आने वाले चुनावी दौर से पहले मंत्रिमंडल को नए चेहरों, बेहतर प्रदर्शन और व्यापक सामाजिक-क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के साथ पुनर्गठित करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल कैबिनेट विस्तार से जुड़ी सभी जानकारियां संभावनाओं और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित हैं। अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर ही होगा।







