नई दिल्ली। वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा अस्तित्व में आई। इस लोकसभा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले लोगों की संख्या अधिक है। प्रशासनिक दृष्टि से तीन जिलों के अधीन आती है। हालांकि सीलमपुर, बाबरपुर और मुस्तफाबाद जैसी विधानसभा मुस्लिम बहुल हैं।
अनधिकृत कालोनियों की संख्या अधिक
अभी तक इस लोकसभा क्षेत्र पर तीन आम चुनाव हुए हैं। जहां एक बार कांग्रेस और दो बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। इस लोकसभा क्षेत्र में ज्यादातर विधानसभाएं अनधिकृत कालोनियों वाली है। जहां सड़क, पार्क, सामुदायिक भवन, पार्किंग, अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है।
केवल मनोज तिवारी बचा पाए टिकट
इस बार के लोकसभा चुनाव में जहां भाजपा ने दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से छह पर मौजूदा सांसद का टिकट काट दिया, लेकिन मनोज तिवारी इकलौते सांसद है, जो तीसरी बार चुनाव मैदान में है।
जबकि कांग्रेस और आप के आईएनडीआई गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के हिस्से में आई है। कांग्रेस ने यहां से जेएनयू में विवादित नारों को लेकर प्रसिद्धि पाने वाले कन्हैया कुमार को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाले दोनों प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला होगा।
इनके बीच मुकाबला
भाजपा: मनोज तिवारी
पेशा: गायक एवं कलाकार भोजपुरी सिनेमा में मनोज तिवारी प्रसिद्ध हैं, इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी से दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
मजबूत पक्ष: कलाकार होने की वजह से वह प्रसिद्ध हैं और भाजपा के स्टार प्रचारक भी हैं।
कमजोर पक्ष: एक ही सीट से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं, ऐसे में सत्ता विरोधी माहौल का सामना करना पड़ सकता है।
कांग्रेस प्रत्याशी: कन्हैया कुमार
पेशा: समाज सेवा, जेएनयू में छात्रसंघ से प्रसिद्धि पाई थी।
मजबूत पक्ष: अच्छे वक्ता हैं।
कमजोर पक्ष: कांग्रेस की स्थानीय इकाई की ओर से उन्हें बाहरी बताना और जेएनयू के विवादित मामलों में उनका नाम आना।







