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Home धर्म

देश के वो मशहूर मंदिर जहां हिंदुओं के अलावा किसी और धर्म के लोगों को नहीं मिलती है एंट्री

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 6, 2024
in धर्म
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मां कालका जी
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भारत में कई मंदिर हैं जो अपनी मान्यताओं की वजह से चर्चा में बने रहते हैं और जिनके रहस्य के बारे में आज तक कोई नहीं जान पाया है. इन रहस्यमयी मंदिरों के साथ कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जिनके कायदे-कानून काफी सख्त हैं. ऐसे कई मंदिर हैं जहां प्रवेश करने से पहले कपड़े बदलकर पारंपरिक रूप से धोती पहननी होती है, जिनमें शर्ट और पैंट पहन कर मंदिर में पूजा करने की मनाही है. जबकि कई ऐसे मंदिर भी हैं जहां सिर्फ और सिर्फ हिंदुओं को ही मंदिर परिसर के अंदर प्रवेश करने की इजाजत है. इन मंदिरों में गैर हिंदू या किसी अन्य धर्म के लोगों को प्रवेश नहीं मिलता है. आइए जानें उन मंदिरों के बारे में जहां गैर हिंदुओं के प्रवेश की मनाही है.

तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर

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यह देश का सबसे अमीर हिंदू मंदिर है. इस मंदिर में हिंदू धर्म के अलावा अन्य धर्म के लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध है. यहां पर गैर हिंदुओं का प्रवेश निषेध है. अगर कोई दूसरे धर्म के लोग इस मंदिर में प्रवेश करना चाहते हैं तो उन्हें एक शपथ पत्र देना होता है जिसमें भगवान वेंकटेश्वर में आस्था की घोषणा करनी होती है.

गुरुवायुर मंदिर , केरल

केरल में स्थित गुरुवायुर मंदिर धार्मिक हिंदू धर्म की आस्था का केंद्र है. यह मंदिर पांच हजार साल पुराना है. यहां पर सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश दिया जाता है, किसी अन्य धर्म के लोग इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं. इस मंदिर के प्रमुख देवता भगवान गुरुवायुरप्पन हैं जो भगवान कृष्ण के बाल गोपाल स्वरुप में हैं. इस जगह को भगवान कृष्ण और भगवान विष्णु का घर माना गया है. साथ ही इसे दक्षिण का बैकुंठ और द्वारिका भी कहा जाता है.

पद्मनाभस्वामी मंदिर, केरल

भहवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर केरल के तिरुअनन्तपुरम में स्थित है. यह केरल के एक ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है. इस मंदिर के बारे में धर्म शास्त्रों एवं पुराणों में भी वर्णन मिलता है. इस मंदिर को 16वीं शताब्दी में त्रावणकोर समय के राजा-महाराजाओं ने बनवाया गया था. हर साल लाखों पर्यटक देश-विदेश से यहां आते हैं लेकिन गैर हिंदुओं को मंदिर के अंदर आने की अनुमति नहीं है.

जगन्नाथ मंदिर, पुरी

यह मंदिर भगवान विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है. जगन्नाथ मंदिर बंगाल की खाड़ी पर स्थित शहर पुरी भुवनेश्वर के पास है. इस मंदिर में भी हिंदुओं के अलावा किसी और के प्रवेश की इजाजत नहीं है. मंदिर के दरवाजे के पास एक दिशा पट्टी लगी हुई है जिस पर लिखा है, यहां रुढ़िवादी हिंदुओं को भीतर जाने की अनुमति है. इतना ही नहीं, जिन लोगों का गैर हिंदुओं से संबंध हो उन्हें भी यहां दर्शन करने की अनुमति नहीं मिलती है. साल 1984 में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी यहां दर्शन करने की अनुमति नहीं मिली थी क्योंकि उनके पति अन्य धर्म के थे.

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर

उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में बना लिंगराज मंदिर काफी प्रसिद्ध और प्राचीन है. रोजाना हजारों की संख्या में भक्त मंदिर के दर्शन करने आते हैं लेकिन इस मंदिर में सिंर्फ हिंदू धर्म के लोग अंदर जा सकते हैं. इस मंदिर की प्रसिद्धि ऐसी है कि दूर पश्चिमी देशों से भी भक्त दर्शन करने के लिए आते थे लेकिन साल 2012 में एक विदेशी पर्यटक ने यहां आकर मंदिर के कर्म-कांडों में अड़चन पैदा की थी जिसके बाद से मंदिर के ट्रस्ट बोर्ड द्वारा गैर हिंदुओं प्रवेश इस मंदिर में मना कर दिया गया.

कपालेश्वर मंदिर, चेन्नई

तमिलनाडु के चेन्नई के में स्थित कपालेश्वर मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में द्रविड़ सभ्यता के समय हुआ था. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. इस मंदिर के बारे में धार्मिक मान्यता है कि इसका नाम शिव जी के नाम पर ही रखा गया है. मंदिर के नाम का संधि विच्छेद करने पर पता चलता है कि कपा का अर्थ है सिर और भगवान भोले का अन्य नाम अलेश्वर है. इस मंदिर में भी हिंदुओं के अलावा किसी भी अन्य धर्म के पर्यटकों के अंदर आने पर रोक है.

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