नोएडा। नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टावर ध्वस्त हुए आठ माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक उनके निर्माण के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण के अफसरों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। करीब डेढ़ महीने पहले मामले के जांच अधिकारी ने नोएडा प्राधिकरण से इन टावर के निर्माण से संबंधित रिकॉर्ड मांगा था, लेकिन उन्हें पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
इस प्रकरण में शासन की ओर से गठित एसआईटी की जांच के बाद 26 अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। 11 अधिकारियों की जांच करीब डेढ़ माह पहले शासन के निर्देश पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव को सौंपी गई थी। ओएसडी ने इन 11 अधिकारियों की जांच का पूरा रिकॉर्ड पूर्व के जांच अधिकारी एसीईओ प्रवीण मिश्रा से मांगा था।
इन अधिकारियों की जांच से संबंधित रिकॉर्ड मंगलवार को जांच अधिकारी को मिला, लेकिन एमरॉल्ड कोर्ट सोसाइटी में ध्वस्त हुए इन टावर की प्लानिंग से संबंधित रिकॉर्ड प्राधिकरण की ओर से जांच अधिकारी को उपलब्ध नहीं कराया गया। इस प्रकरण में जिन 26 अधिकारियों पर आरोप हैं, उनमें से 20 सेवानिवृत्त हो चुके हैं। दो लोगों की मौत हो चुकी है और चार निलंबित हो चुके हैं।
सुपरटेक और आरडब्ल्यूए आमने-सामने
सुपरटेक एमलॉल्ड कोर्ट सोसाइटी की आरडब्ल्यूए और सुपरटेक ग्रुप ट्विन टावर की करीब सवा दो एकड़ खाली जमीन को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। आरडब्ल्यूए इस कीमती जमीन पर पार्क विकसित करना चाहती है। जबकि, बिल्डर ग्रुप का दावा है कि यह भूखंड सोसाइटी से अलग है और उसका आवंटन प्राधिकरण से अलग से 80 करोड़ रुपये में कराया गया था। सेक्टर-93ए स्थित एमरॉल्ड कोर्ट सोसाइटी में खड़े हुए सुपरटेक के ट्विन टावर को 28 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ध्वस्त कर दिया गया था। अब इन टावर का मलबा भी पूरी तरह साफ हो चुका है और इन टावर की जमीन पर कब्जा लेने को लेकर विवाद हो गया है।
दीवार का निर्माण नहीं हुआ : सोसाइटी की आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों का कहना है कि ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण के समय ही सोसाइटी की करीब 100 मीटर लंबी दीवार गिर गई थी, जिसका अभी तक निर्माण नहीं हो सका है। इस दीवार का निर्माण शीघ्र कराने की मांग की है।
ट्विन टावर की खाली जमीन को लेकर ठनी
एमरॉल्ड कोर्ट की आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष यूबीएस तेवतिया ने बताया कि बिल्डर की ओर से इस जमीन की तारबंदी कराकर जमीन को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया गया था। यह जमीन एमरॉल्ड कोर्ट सोसाइटी की है, जिस पर पार्क बनाया जाएगा। इसके संबंध में उन्होंने सोसाइटी की ओर से प्राधिकरण को भी पत्र भेज दिया है। सुपरटेक का कहना है कि यह भूखंड एमरॉल्ड कोर्ट सोसाइटी से अलग है, जिसका आवंटन उन्होंने अलग से करीब 80 करोड़ रुपये में कराया था। वह इस भूखंड को सोसाइटी को कैसे दे सकते हैं, जिस पर मालिकाना हक उनका है। इसको लेकर प्राधिकरण के अधिकारियों से भी वार्ता कर उनके सामने पूरा पक्ष और दस्तावेज रखे जाएंगे।







