Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

उच्च शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) का कार्यान्वयन: गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर- सफलता की गाथा

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 7, 2022
in राष्ट्रीय
A A
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

प्रो. आलोक चक्रवाल

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) एक परिवर्तनकारी सुधार है, जिस पर बहुत अधिक चर्चा हुई है। इस नीति को राष्ट्र निर्माण की दिशा में बहुत सकारात्मक कदम कहा जा सकता है। यह नीति शिक्षार्थियों के बीच आर्थिक विकास और शैक्षिक उत्कृष्टता के लिए ज्ञान को मूल्यवर्धन में बदलने की एक रूपरेखा है। इसका उद्देश्य, एक तरफ, शिक्षार्थियों को 21वीं सदी के कौशल और नवाचार, महत्वपूर्ण समस्या समाधान, रचनात्मकता और डिजिटल साक्षरता से सुसज्जित करना है, जबकि दूसरी तरफ उन्हें प्राचीन भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के साथ प्रबुद्ध करना है। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (जीजीवी) में एनईपी-2020 को उसकी वास्तविक भावना के साथ लागू करना हमारी प्राथमिकता रही है। विश्वविद्यालय ने एनईपी-2020 के कार्यान्वयन के लिए कई पहलों की शुरुआत की है और चरणबद्ध तरीके से इसके विभिन्न आयामों को व्यवस्थित रूप से लागू करना शुरू कर दिया है।

इन्हें भी पढ़े

IRCTC server AI

IRCTC पर सर्वर डाउन के बावजूद AI ने सेकेंडों में काटा कन्फर्म तत्काल टिकट

September 26, 2026
Petal Gehlot

कौन हैं पेटल गहलोत, जिन्होंने UNGA में पाकिस्तान को धो डाला!

September 26, 2026
cji suryakant

‘हम अधिकारों की रक्षा करेंगे’, छात्रों के शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट पर बोले CJI

September 26, 2026
PM Modi

PM मोदी ने मंत्रियों की ली ‘परफॉर्मेंस रिपोर्ट’, चिंतन शिविर में दिए ये बड़े निर्देश

September 25, 2026
Load More

विश्वविद्यालय के लिए, एनईपी-2020 के कार्यान्वयन का अर्थ अनिवार्य रूप से एनईपी-2020 में परिकल्पित विभिन्न विषयों पर आधारित इको-सिस्टम में और समग्र तरीके से शिक्षार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्रदान करना है। इस प्रकार, व्यक्तिगत ज्ञान, सामाजिक जुड़ाव और शिक्षार्थी की क्षमताओं में विस्तार, आर्थिक विकास में मूल्यवर्धन के माध्यम से ज्ञान परिवर्तन को सक्षम करना आदि प्राथमिक लक्ष्य रहे हैं। योजनाओं और लक्ष्यों को तैयार करने की रणनीति के तहत उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो शिक्षार्थियों को सक्षम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करने का हमारा प्रयास रहा है कि शिक्षार्थी वैश्विक व राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रासंगिक कौशल प्राप्त करें और एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करें, जो शिक्षार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करता हो।

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय ने एनईपी-2020 को अभिनव तरीके से लागू करने की यात्रा शुरू की है, जिसमें संकाय सदस्यों व हितधारकों ने विषयों पर विचार-विमर्श किया है और प्रसिद्ध विचारकों सहित राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ बातचीत के परिणामस्वरूप एनईपी-2020 को लागू करने के लिए रणनीतिक योजनाओं और लक्ष्यों को अंतिम रूप दिया गया है।
‘परिणामोन्मुख उच्च शिक्षा को संस्थागत रूप कैसे दिया जाए’, इस विषय पर लम्बी बहस के फलस्वरूप परिणाम-आधारित पाठ्यक्रम से ज्ञान-प्राप्ति की योजना का विकास हुआ है। यूजीसी के परिणाम-आधारित ज्ञान-प्राप्ति के पाठ्यक्रम की रूपरेखा (एलओसीएफ) को, एनईपी-2020 के अनुरूप बनाने के लिए संशोधित किया गया है। जीजीवी में संशोधित एलओसीएफ आधारित सीबीसीएस प्रणाली अब संचालन में है। तदनुसार, शिक्षार्थियों का मूल्यांकन; ज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियों, समझ में विस्तार, समस्या-समाधान दृष्टिकोण को विकसित करने, कौशल व मूल्यों के निर्माण तथा नवीन दृष्टिकोण विकसित करने के आधार पर किया जाएगा। रणनीतियों में शिक्षण-ज्ञान-प्राप्ति प्रक्रियाओं को एकीकृत करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग, एमओओसी/ओडीएल के माध्यम से पहुंच बढ़ाना, ओडीएल/एमओओसी के लिए गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री विकसित करना आदि शामिल हैं।

एलओसीएफ आधारित स्नातक कार्यक्रम के जरिए अंतर्विषयक क्षेत्रों की पहचान की गई है और एक विभिन्न विषयों पर आधारित इकोसिस्टम विकसित किया गया है। सीखने के नतीजों के साथ पाठ्यक्रम का आकलन करके एलओसीएफ को सभी पूर्वस्नातक (यूजी) और व्यावसायिक कार्यक्रमों में लागू किया गया है। सभी पूर्वस्नातक (यूजी) कार्यक्रमों को विभिन्न विषय संबंधी विकल्पों की दृष्टि से पुनर्गठित किया गया है और परिणाम आधारित पाठ्यक्रम के उद्देश्यों (सीओ), कार्यक्रम के उद्देश्यों (पीओ) और कार्यक्रम आधरित विशिष्ट उद्देश्यों (पीएसओ) को शामिल करने हेतु सभी स्नातकोत्तर (पीजी) कार्यक्रमों के पाठ्यक्रम को संशोधित किया गया है। पूर्वस्नातक (यूजी) कार्यक्रमों के पाठ्यक्रमों के 23 प्रतिशत हिस्से और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के पाठ्यक्रमों के 34 प्रतिशत हिस्से को प्रायोगिक ज्ञान से जुड़े घटकों के लिए लक्षित किया गया है।

अंतर्विषयक, विभिन्न विषय, एनएसएस/एनसीसी, योग, स्पोर्ट्स और भारत बोध कार्यक्रमों के पूर्वस्नातक (यूजी) पाठ्यक्रमों के जरिए शिक्षार्थियों के अनुभवों को समृद्ध किया गया है। इसी प्रकार, सभी स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में अध्ययन की अन्य पद्धतियों के खुले वैकल्पिक विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही, सभी कार्यक्रमों में अनिवार्य इंटर्नशिप का प्रावधान किया गया है। कला, सामाजिक विज्ञान और वाणिज्य के छात्रों को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से, पूर्वस्नातक (यूजी) कार्यक्रमों के लिए 51 नए योग्यता उन्नयन पाठ्यक्रम (एईसी), 41 कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम और विभिन्न मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें वैशेषिक से भौतिकी, भारतीय गणित का इतिहास, भगवत गीता और रस विद्या सहित प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित नवीन पाठ्यक्रम शामिल हैं।

संविधान की अनुसूची-5 के तहत केंद्रीय जनजातीय इलाके में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की अवस्थिति को ध्यान में रखकर,  विशेष तौर पर जनजातीय छात्रों और आम तौर पर वंचित वर्गों के छात्रों के लिए समानता, पहुंच और समावेशन की स्थिति में सुधार की दृष्टि से गंभीर प्रयास किए गए हैं। महिमा गुरु पीठ की स्थापना, राष्ट्रीय विद्रोह में भगवान बिरसा मुंडा के योगदानों के बारे में प्रकाशन, जनजातीय इलाकों के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदानों को मुख्यधारा में लाना कुछ ऐसी ही पहल हैं।

विश्वविद्यालय ने प्रवेश-निकास के विविध विकल्पों और एबीसी के प्रावधानों के साथ चार वर्ष की अवधि वाले डिग्री कार्यक्रम भी तैयार किए हैं। एबीसी के लिए यूजीसी के विनियमन और बहु प्रवेश/निकास प्रणाली को अपनाया गया है तथा एबीसी के तहत क्रेडिट ट्रांसफर से संबंधित नियमों को शामिल करते हुए प्रासंगिक अध्यादेशों में संशोधन, पाठ्यक्रम पंजीकरण आदि की प्रक्रिया को पूरा किया गया है।

शिक्षण के साथ अनुसंधान एवं नवाचार का सामंजस्य बिठाने और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (जीजीवी) को विश्वव्यापी मानकों के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार एक उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में रूपांतरित करने के उद्देश्य से विभिन्न विषयों पर आधारित और समग्र इकोसिस्टम के लिए शैक्षणिक बुनियादी ढांचे में सुधार से संबंधित कई पहल की गई हैं।

एनईपी-2020 को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए न केवल विभिन्न स्तरों पर सटीक समझ एवं समन्वय की आवश्यकता है, बल्कि शिक्षकों की सशक्त भागीदारी और सक्रिय भूमिका भी अत्यंत जरूरी है। इस संबंध में संकाय की भूमिका को इस ओर पूरी तरह से उन्मुख करने एवं नए सिरे से परिभाषित करने के लिए कई सफल ‘संकाय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम’ शुरू किए गए हैं।

सीखने के मिश्रित तरीके के लिए संकाय के प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण और क्षमता निर्माण को बेहतरीन बनाया गया है। इसे दीक्षा/स्वयं, एनपीटीईएल जैसे प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्मों के अधिकतम उपयोग, और ‘समर्थ’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से शैक्षणिक प्रक्रियाओं व परिणामों को बेहतर करने के लिए पर्याप्त प्रौद्योगिकी सहायता देकर संभव किया गया है।

भारतीय ज्ञान प्रणाली, भाषा, मूल्यों और संस्कृति को वर्तमान ज्ञान प्रणाली के साथ एकीकृत करने, जैसा कि एनईपी-2020 में विशेष जोर दिया गया है, के लिए विशिष्ट प्रयास शुरू किए गए हैं। शिक्षा को अधिक अनुभवात्मक बनाने के लिए अध्यापन सीखने की शिक्षा पद्धति का पुनर्गठन किया गया है। इसके लिए सभी पाठ्यक्रमों में 40 प्रतिशत अनुभवात्मक शिक्षण को शामिल किया गया है, जो कि वर्तमान में औसतन लगभग 23 प्रतिशत है। डिग्री कार्यक्रम के लिए पाठ्यक्रम तैयार करके भारतीय ज्ञान प्रणाली को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, कार्यक्रम के प्रत्येक पाठ्यक्रम में विषय आधारित विशिष्ट भारतीय मूल्य, भारतीय संस्कृति और भारतीय इतिहास शामिल हैं।

अंत में एक और महत्वपूर्ण बात। विश्वविद्यालय ने शिक्षा के माध्यम से ‘स्वाबलंबी भारत’ की दिशा में अहम योगदान देने के लिए ‘स्वाबलंबी छत्तीसगढ़’ नामक एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय ने एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से ‘आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ कार्यक्रम’ शुरू किया है। ‘स्वाबलंबी छत्तीसगढ़’ का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में प्रवेश करने पर सीखने के अपार अवसर प्रदान करना है, और इस तरह से उन्हें वास्तविक जीवन का अनुभव कराना; कौशल बढ़ाने एवं क्षमता निर्माण के अवसर प्रदान करना; उनमें आत्मविश्वास उत्पन्न करना और एक ऐसा माहौल प्रदान करना है जो उन्हें उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करे।
(लेखक, कुलपति, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर हैं)

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

ज्वलंत सवाल : बीस वर्ष बनाम अपने वजूद के लिये संघर्ष करता ‘मेरु गौं’

December 23, 2022
Cm dhami

सीएम धामी बोले–उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने सभी विभाग करें विजिलेंस को सहयोग

March 28, 2025

गांधीजी का अपमान क्यों?

October 10, 2022
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • IRCTC पर सर्वर डाउन के बावजूद AI ने सेकेंडों में काटा कन्फर्म तत्काल टिकट
  • कौन हैं पेटल गहलोत, जिन्होंने UNGA में पाकिस्तान को धो डाला!
  • ऑनलाइन पर नई फिल्मों-सीरीज का आया तूफान, ये वीकेंड होगा धमाकेदार

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.