अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर परिसर में स्थायी वैदिक पुजारी प्रशिक्षण पाठशाला शुरू करने का निर्णय लिया है. इस पहल का उद्देश्य वैदिक और रामानंदी परंपरा के अनुरूप प्रशिक्षित पुजारियों की नई पीढ़ी तैयार करना है. जो न केवल राम मंदिर बल्कि देश-विदेश के विभिन्न मंदिरों में भी शास्त्रोक्त विधि से पूजा-अर्चना कर सकें. ट्रस्ट का मानना है कि इस पाठशाला के माध्यम से सनातन परंपरा, वैदिक संस्कार और पूजा-पद्धति को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा.
धार्मिक समिति के सदस्य रामानंद दास ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए आने वाले अभ्यर्थियों का चयन शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप किया जाएगा. उनके अनुसार, आवेदकों की शैक्षणिक योग्यता, संस्कृत शिक्षा और धार्मिक आस्था को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल डिग्री होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भारतीय वैदिक सनातन परंपरा के प्रति गहरी श्रद्धा और सेवा का भाव भी आवश्यक है.
इन अभ्यर्थियों को मिलेगा प्रशिक्षण
रामानंद दास के अनुसार, प्रशिक्षण के इच्छुक अभ्यर्थियों के पास कम से कम शास्त्री की उपाधि होनी चाहिए. यदि किसी के पास आचार्य की उपाधि है तो उसे और अधिक उपयुक्त माना जाएगा. साथ ही अभ्यर्थी संस्कृत की परंपरागत शिक्षा से जुड़ा हो और वैदिक विधि-विधान का मूलभूत ज्ञान रखता हो. उनका कहना है कि जो व्यक्ति भगवान श्रीराम की सेवा और पूजा के लिए स्वयं को योग्य बनाना चाहता है, उसे इस प्रशिक्षण का अवसर मिलना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार यज्ञोपवीतधारी ब्राह्मणों को प्राथमिकता दिए जाने का मत धार्मिक समिति के भीतर रखा गया है. उनके अनुसार, प्राचीन काल से वेद अध्ययन, वेद अध्यापन, यज्ञ और पूजा-अर्चना की परंपरा ब्राह्मण समाज से जुड़ी रही है. हालांकि अंतिम पात्रता और चयन संबंधी नियम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे.
योग्य अभ्यर्थियों का व्यापक स्तर पर चयन
धार्मिक समिति के सदस्य ने बताया कि पहले जब राम मंदिर के लिए पुजारियों का प्रशिक्षण कराया गया था, तब अभ्यर्थियों की आयु 18 से 27 वर्ष निर्धारित की गई थी. उस समय उत्तर प्रदेश के निवासियों को पात्र माना गया था और अयोध्या जनपद के अभ्यर्थियों को वरीयता दी गई थी. बाद में चयन प्रक्रिया में कुछ शिथिलता बरती गई और योग्य अभ्यर्थियों का व्यापक स्तर पर चयन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया.
केवल कर्मकांड सिखाना नहीं, यह भी उद्देश्य
प्रशिक्षण के दौरान चयनित विद्यार्थियों को संध्या-गायत्री का उपदेश, भगवान श्रीराम के मंत्रों का अभ्यास, वैदिक पूजा-पद्धति, रामानंदी परंपरा, मंदिर अनुशासन, धार्मिक आचार-विचार और सेवा भाव का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. उद्देश्य केवल कर्मकांड सिखाना नहीं, बल्कि ऐसे पुजारी तैयार करना है जो श्रद्धा, अनुशासन और समर्पण के साथ भगवान श्रीराम की सेवा कर सकें.
ट्रस्ट के अनुसार इस स्थायी पाठशाला में चयनित विद्यार्थियों को प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क दिया जाएगा. उनके रहने और भोजन की व्यवस्था भी ट्रस्ट की ओर से की जाएगी, ताकि आर्थिक कारणों से कोई योग्य अभ्यर्थी इस अवसर से वंचित न रहे.
पुजारियों की नई पीढ़ी होगी तैयार
फिलहाल ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, चयन प्रणाली और प्रशिक्षण की अवधि से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे. इसके बाद इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकेंगे. राम मंदिर परिसर में शुरू होने जा रही यह स्थायी वैदिक पुजारी प्रशिक्षण पाठशाला सनातन परंपरा के संरक्षण और प्रशिक्षित पुजारियों की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.







