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Home राष्ट्रीय

घुसपैठ के अलावा ‘अन्य कारण’ क्या हैं, जिनसे बदल रही देश की डेमोग्राफी?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 29, 2026
in राष्ट्रीय
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घुसपैठ
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नई दिल्ली। भारत की डेमोग्राफी क्या बदल रही है? अब इसकी स्टडी के लिए केंद्र सरकार ने एक हाई लेवल कमेटी बना दी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कमेटी बनाए जाने का ऐलान किया है. यह कमेटी एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. हालांकि, जरूरत पड़ी तो इसका कार्यकाल 6 महीने और बढ़ाया जा सकता है.

इस कमेटी का काम घुसपैठ और दूसरे कारणों से बदल रही भारत की डेमोग्राफी पर स्टडी करना है. डेमोग्राफी चेंज से कैसे निपटा जा सकता है? इसे लेकर भी कमेटी अपने सुझाव देगी.

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गृह मंत्री अमित शाह ने X पर पोस्ट कर कहा है कि अप्राकृतिक तरीके से डेमोग्राफी बदलना किसी भी देश के वर्तमान और भविष्य के लिए बड़ी चुनौती है. इसी चुनौती से निपटने के लिए 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हाई-लेवल कमेटी बनाने का ऐलान किया था और अब सरकार ने इस कमेटी का गठन कर दिया है.

उन्होंने बताया कि इस कमेटी के अध्यक्ष रिटायर्ड जज प्रकाश प्रभाकर नावलेकर होंगे. कमेटी में जनगणना आयुक्त के साथ-साथ रिटायर्ड आईएएस दुर्गा शंकर शर्मा, रिटायर्ड आईपीएस बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि सदस्य होंगे. गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (foreigners-I) इसके सदस्य सचिव होंगे.

इस कमेटी की जरूरत क्यों?

केंद्र सरकार लंबे समय से डेमोग्राफी चेंज होने की बात करती रही है. पिछले साल 15 अगस्त को लाल किले से भाषण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेमोग्राफी चेंज को एक बड़ी चुनौती बताया था.

पीएम मोदी ने कहा था, ‘ये घुसपैठिए मेरे देश के नौजवानों की रोजी-रोटी छीन रहे हैं. ये घुसपैठिए मेरे देश की बहन-बेटियों को निशाना बना रहे हैं. यह बर्दाश्त नहीं होगा. ये घुसपैठिए भोले-भाले आदिवासियों को भ्रमित कर उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं.’

तब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि एक षड्यंत्र के तहत और सोची-समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है. तब उन्होंने कहा था कि इसलिए एक हाई पावर डेमोग्राफिक मिशन शुरू किया जा रहा है.

अब गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि डेमोग्राफिक चेंज हमारी संप्रभुता के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना में गंभीर बदलाव और जनजातीय समाज के संरक्षण से जुड़ी एक गंभीर समस्या है.

उन्होंने कहा कि यह कमेटी अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे डेमोग्राफिक चेंज का मूल्यांकन करेगी और धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों के पैटर्न का विश्लेषण करेगी और इसका समाधान बताएगी.

डेमोग्राफी चेंज के कारण क्या हैं?

बीजेपी नेताओं की ओर से अक्सर डेमोग्राफी चेंज को लेकर बयान आते रहते हैं. बीजेपी नेता अक्सर घुसपैठ और मुस्लिमों के ज्यादा बच्चे पैदा करने को इसका कारण बताते हैं.

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अक्सर दावा करते हैं कि उनके राज्य में डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है. पिछले साल अक्टूबर में हिमंता ने एक ग्राफ शेयर किया था और दावा किया था कि असम दशकों से हो रही अवैध घुसपैठ के कारण डेमोग्राफी चेंज का शिकार रहा है. इस ग्राफ में बताया गया था कि 1971 में असम की आबादी में 24.5% मुस्लिम थे, जो अब बढ़कर 38% से ज्यादा हो गए हैं.

सीएम हिमंता ने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि बंगाल, असम और बिहार में अगले 20 सालों तक चुनाव का एक अहम मुद्दा डेमोग्राफी चेंज ही रहेगा. उन्होंने यह भी कहा था कि मूल निवासियों पर डेमोग्राफी चेंज का असर अब महसूस होता है.

अमित शाह डेमोग्राफी चेंज के लिए सबसे बड़ा कारण ‘घुसपैठ’ को मानते हैं. पिछले साल अक्टूबर में अमित शाह ने X पर आबादी को लेकर कुछ आंकड़े जारी किए थे. इसमें 1951 से 2011 तक की जनसंख्या के आंकड़े बताए गए थे.

शाह ने दावा किया था कि 2001 से 2011 में हिंदू जनसंख्या में 16.8% की बढ़ोतरी हुई थी और मुस्लिम आबादी 24.6% की दर से बढ़ी. उन्होंने कहा था कि ‘1951 से लेकर 2011 तक जनसंख्या वृद्धि दर में जो असमानता दिखती है, उसका कारण ‘घुसपैठ’ है.’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘लव जिहाद’ को डेमोग्राफी चेंज का कारण बताया था. इसी साल जनवरी में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, ‘डेमोग्राफी बदलने की साजिश हो रही है. लव जिहाद के नाम पर हमारी बेटियों के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है, उसे रोका जाएगा.’

बदलती डेमोग्राफी के पीछे बीजेपी नेता तो मुस्लिमों के ज्यादा बच्चे पैदा करने को भी बड़ा कारण बताते रहे हैं. कई बीजेपी नेता खुलेआम बोल चुके हैं कि हिंदुओं को भी ज्यादा बच्चे पैदा करना चाहिए.

बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक बार कहा था कि एक खास समुदाय की आबादी बढ़ने के कारण भारत की डेमोग्राफी बदल रही है.

क्या सच में बदल रही है डेमोग्राफी?

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले एक प्रधानमंत्री की इकनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल की एक रिपोर्ट आई थी. यह रिपोर्ट 1950 से 2015 के बीच आबादी में अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी पर थी.

इस रिपोर्ट में 167 देशों में जनसंख्या के हालात पर गौर किया गया था, जहां 1950 से 2015 के बीच बहुसंख्यकों की आबादी में लगभग 22% की गिरावट आई है.

इस रिपोर्ट में बताया गया था कि 1950 से 2015 के बीच हिंदुओं की आबादी में 7.82% की कमी आई है. 1950 में देश की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 84.68% थी, जो 2015 में घटकर 78.06% हो गई थी. जबकि, इसी दौरान मुस्लिमों की आबादी बढ़ी है. 1950 में देश की आबादी में 9.84% मुस्लिम थे और 2015 में ये 14.09% हो गए. 1950 की तुलना में 2015 में मुसलमानों की आबादी 43.15% बढ़ गई थी.

इस रिपोर्ट में डेमोग्राफी चेंज के कारणों के बारे में नहीं बताया गया था. सिर्फ आबादी के आंकड़ों के हिसाब से बताया था कि आबादी कैसे बदल रही है.

हालांकि, इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि सिर्फ मुसलमानों की ही आबादी नहीं बढ़ी है, बल्कि ईसाइयों और सिखों की आबादी भी बढ़ी है. 1950 में देश की आबादी में 2.25% ईसाई थे, जो 2015 में बढ़कर 2.36% हो गए. इसी तरह सिखों की हिस्सेदारी 1950 में 1.24% थी, जो 2015 में बढ़कर 1.85% हो गई. 1950 से 2015 के बीच ईसाइयों की आबादी 5.38% और सिखों की आबादी 6.58% बढ़ गई थी.

कुल मिलाकर, भारत की बदलती डेमोग्राफी के पीछे घुसपैठ, धर्मांतरण, कथित लव जिहाद और ज्यादा आबादी को बड़ा कारण बताया जाता है. लेकिन अब तक आधिकारिक तौर पर इसका कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है. उम्मीद है इस कमेटी की रिपोर्ट से इस सवाल का जवाब भी मिल जाएगा.

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