नई दिल्ली: कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस के इस फैसले का समर्थन किया है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने धार्मिक कार्यक्रम को राजनीतिक कार्यक्रम में बदलकर 140 करोड़ भारतीयों का अपमान किया है।
सिद्धारमैया ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव के शैव और शाक्तों का राम मंदिर में कोई अधिकार नहीं है, वाले बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। राजनीति के लिए राम मंदिर के नाम का इस्तेमाल करने के विरोध में चार शंकराचार्यों ने भी इस समारोह में शामिल न होने का फैसला किया है।
सिद्धारमैया ने किया कांग्रेस के फैसले का समर्थन
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कर्नाटक के सीएम ने कहा, ‘कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल नहीं होने का बिल्कुल सभी फैसला लिया है। मैं इस फैसले का समर्थन करता हूं।’ उन्होंने इसी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ परिवार के नेताओं पर धार्मिक कार्यक्रम को राजनीतिक बनाकर भगवान राम और 140 करोड़ भारतीयों का अपमान करने का आरोप लगाया है।
सिद्धारमैया ने कहा, ‘यह सभी हिंदुओं के साथ विश्वासघात है। यह एक धार्मिक कार्यक्रम है जिसे श्रद्धापूर्वक आयोजित करना चाहिए था, लेकिन इसे राजनीतिक प्रचार बना दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि राम जन्मभूमि विवाद के पहले दिन से ही कांग्रेस अपने रुख पर कायम है।’
पीएम मोदी पर लगाया आरोप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘पीएम मोदी को देश की सत्ता संभालते हुए 10 साल हो गए, लेकिन मतदाताओं के सामने अपनी उपलब्धियों के आधार पर चुनाव जीतने का आत्मविश्वास उनके भीतर नहीं है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा हड़बड़ी में यह कार्यक्रम कर रही है।
कर्नाटक के सीएम ने कहा कि जनता भाजपा और संघ परिवार की राजनीति को समझ रही है। वे इनके जाल में फंसने वाले नहीं हैं। जनता अभी से ही राम मंदिर के निर्माण के लिए ईंट के नाम पर लिए गए दान का हिसाब मांग रही है। उन्होंने कहा कि हमें उस हिंदू धर्म से परेशानी नहीं है, जिसका पालन महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, नारायण गुरु जैसे महान व्यक्तियों ने किया है। हमें भाजपा के पाखंडी हिंदुत्व से परेशानी है, जो धर्म के नाम पर राजनीति करती है।
कांग्रेस एमएलसी ने भी किया वरिष्ठ नेताओं के फैसले का समर्थन
मल्लिकार्जुन खरगे, ‘सोनिया गांधी और अधीर रंजन चौधरी द्वारा रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के निमंत्रण को अस्वीकार करने पर भाजपा ने आलोचना की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के इस फैसले को पार्टी के एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने सही ठहराया है। उन्होंने कहा, यह बिल्कुल सही निर्णय है। सभी कांग्रेसी इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि इसका धर्म के साथ कोई लेना-देना नहीं है। यह कोई धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि राजनीतिक कार्यक्रम है। भाजपा-आरएसएस-वीएचपी के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने का फैसला बिल्कुल सही है। जगतगुरु शंकराचार्य हिंदू धर्म के प्रमुख है और जब प्रमुख ने ही इस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया तो आप क्या इन्हें हिंदू विरोधी कहेंगे?’







