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Home राष्ट्रीय

नर्सिंग वाली किताब में दहेज पर ऐसा क्या लिखा जो हंगामा है बरपा!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 6, 2022
in राष्ट्रीय
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'Textbook of Sociology for Nurses'
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नई दिल्ली : दहेज प्रथा एक सामाजिक बुराई है। हम और आप यह वाक्य ना जाने कितनी बार सुन चुके होंगे। स्कूल से लेकर विभिन्न तरह के कार्यक्रमों में जब भी समाज में कुरीतियों का जिक्र होता है तो दहेज प्रथा की चर्चा जरूर होती है। अक्सर कहा जाता है कि दुल्हन ही दहेज है। वो बात अलग है कि यह सिर्फ कहा ही जाता है। अब अचानक ही कोई दहेज प्रथा के फायदे बताने लगे तो इसे क्या ही कहा जाए। दरअसल पिछले कुछ दिन से सोशल मीडिया पर एक किताब का पन्ना काफी वायरल हो रहा है। यह पन्ना टीके इंद्राणी की किताब ‘टेक्स्टबुक ऑफ सोशोलॉजी फॉर नर्सेस’ का है। यह किताब बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं के लिए हैं।

आखिर क्या है इस चैप्टर में
किताब के चैप्टर में दहेज प्रथा के गुण और फायदों की बात कही गई है। किताब में कहा गया है कि अधिक दहेज के कारण बदसूरत लड़कियों की भी शादी हो जाती है। दहेज में मिले सामान जैसे टीवी, फ्रिज, पंखा, बर्तन, कपड़े और गाड़ी से गृहस्थी को बसाने में मदद मिलती है। इसमें आगे कहा गया है कि दहेज के कारण ही लड़कियों में शिक्षा का प्रसार बढ़ा है। दहेज के बोझ के कारण ही लोगों ने अपनी बेटियों को पढ़ाना शुरू कर दिया है। जब लड़की शिक्षित और नौकरी में होगी तो दहेज की मांग कम होगी। ऐसे में यह अप्रत्यक्ष रूप से फायदा है। पैतृक संपत्ति में हिस्सा। दहेज के रूप में लड़की को अपनी पैतिृक संपत्ति में हिस्सा मिलता है।

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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक पहुंची बात
सोशल मीडिया पर इस पन्ने में लिखी बातें जो दहेज के फायदे गिनाती है, को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि राजनीतिक दल से लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग के साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक इससे जुड़ गए। शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस किताब के अंश से जुड़े ट्वीट के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिख दिया। प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया कि मैं धर्मेंद्र प्रधान से ऐसी किताबों को चलन से हटाने का अनुरोध करती हूं। प्रियंका ने आगे लिखा कि दहेज के फायदों को विस्तार से बताने वाली किताब वास्तव में हमारे पाठ्यक्रम में मौजूद हो सकती है, यह देश और उसके संविधान के लिए शर्म की बात है।

विवाद बढ़ा तो नर्सिंग काउंसिल की सफाई
किताब के कवर पर साफ लिखा है कि किताब आईएनसी के सिलेबस के अनुसार है। ऐसे में जब इस मामले में जब विवाद बढ़ा तो भारतीय नर्सिंग काउंसिल (INC) की तरफ से सफाई जारी की गई। भारतीय नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) ने अपमानजनक सामग्री वाली किताब की बिक्री के लिए एक पब्लिशर और एक लेखक की तरफ से उसके नाम के इस्तेमाल की निंदा की। आईएनसी की तरफ से कहा गया कि आईएनसी अधिनियम की धारा 16 परिषद को नर्सों, मिडवाइव्ज और हेल्थ विजिटर्स की ट्रेनिंग के लिए स्टैंडर्ड और सिलेबल को निर्धारित करने का अधिकार देती है। नीति के अनुसार, आईएनसी केवल पाठ्यक्रम निर्धारित करती है और किसी लेखक या प्रकाशक का सपोर्ट नहीं करती है।

महिला आयोग ने कहा इस पर ऐक्शन लें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से कहा है कि वह नर्सिंग छात्रों के लिए दहेज प्रथा के ‘गुणों और फायदों’ को बताने वाली किताब को लेकर ऐक्शन ले। महिला आयोग ने कहा कि किताब का चैप्टर दहेज के मौजूदा खतरे के बारे में छात्रों को एक बहुत ही गलत संदेश दे रही है। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण को भी पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई शुरू करने को कहा। दिल्ली महिला आयोग ने भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर ‘दहेज व्यवस्था का महिमामंडन करने’ के लिए लेखक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है l

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