प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: शशि थरूर ने ‘वीर सावरकर इंटरनेशनल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2025’ को ठुकरा दिया है, जो हाल ही में घोषित किया गया था। यह घटना 10 दिसंबर को दिल्ली में होने वाले समारोह से जुड़ी है। यह अवॉर्ड हाईरेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी इंडिया (HRDS इंडिया) नामक एक NGO द्वारा शुरू किया गया है, जो RSS से जुड़ा बताया जा रहा है।
अवॉर्ड का उद्देश्य विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) के आदर्शों—जैसे राष्ट्रवाद, आत्मनिर्भरता, नैतिक साहस और सामाजिक परिवर्तन—को प्रतिबिंबित करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित करना है। यह सावरकर के सेलुलर जेल में कष्टों और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को श्रद्धांजलि के रूप में दिया जाता है। प्रत्येक विजेता को 1 लाख रुपये, सर्टिफिकेट और स्मृति चिन्ह मिलना था।
कहां हुआ समारोह !
समारोह NDMC कन्वेंशन हॉल, नई दिल्ली में होना था, जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पुरस्कार वितरित करने वाले थे। छह विजेताओं में शशि थरूर का नाम शामिल था (अन्य विजेताओं की पूरी लिस्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है)। HRDS ने थरूर का नाम बिना उनकी सहमति या पूर्व सूचना के घोषित कर दिया। थरूर को इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स से हुई, जब वे 9 दिसंबर को केरल में लोकल इलेक्शन वोटिंग के लिए गए थे।
शशि थरूर ने क्या कहा ?
थरूर ने अपना पूरा बयान X (पूर्व ट्विटर) पर जारी किया उन्होंने कहा “मैंने मीडिया रिपोर्ट्स से जाना कि मुझे ‘वीर सावरकर अवॉर्ड’ का प्राप्तकर्ता नामित किया गया है, जो आज दिल्ली में प्रस्तुत किया जाना है। मुझे यह घोषणा कल केरल में पता चली, जहां मैं लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट इलेक्शन में वोट डालने गया था। वहां तिरुवनंतपुरम में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मैंने स्पष्ट किया था कि मैं न तो इस अवॉर्ड से अवगत था और न ही इसे स्वीकार किया था और आयोजकों का नाम मेरे बिना सहमति के घोषित करना गैर-जिम्मेदाराना था।
इसके बावजूद, आज दिल्ली में कुछ मीडिया आउटलेट्स वही सवाल पूछ रहे हैं। इसलिए, मैं इस मामले को स्पष्ट करने के लिए यह बयान जारी कर रहा हूं। अवॉर्ड की प्रकृति, इसे प्रस्तुत करने वाले संगठन या अन्य संदर्भों की स्पष्टता के अभाव में आज के इवेंट में भाग लेने या अवॉर्ड स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।”
ठुकराने से थरूर क्या कहना चाहते हैं ? सतह पर, यह एक प्रक्रियागत मुद्दा लगता है—बिना सहमति और डिटेल्स के नाम घोषित करना। थरूर ने आयोजकों को “गैर-जिम्मेदार” कहा और स्पष्ट किया कि वे अवॉर्ड से अनभिज्ञ थे।
कांग्रेस के लिए विवादास्पद
वीर सावरकर कांग्रेस के लिए विवादास्पद हैं। कांग्रेस उन्हें ब्रिटिश समर्थक और गांधी हत्या में अप्रत्यक्ष भूमिका के लिए आलोचना का केंद्र मानती है। HRDS का RSS से लिंक होने के कारण, अवॉर्ड स्वीकार करना थरूर के लिए पार्टी के साथ वैचारिक टकराव पैदा कर सकता था। थरूर का ठुकराना न सिर्फ कांग्रेस की लाइन पर खरा उतरना दिखाता है, बल्कि BJP/RSS के प्रति दूरी बनाए रखने का संकेत भी।
X पर कई यूजर्स ने इसे थरूर की “कांग्रेस के प्रति वफादारी” का प्रमाण माना, जबकि कुछ ने इसे BJP का कांग्रेस को शर्मिंदा करने का प्रयास बताया। कुल मिलाकर, यह थरूर का राजनीतिक संतुलन बनाए रखने का तरीका है—उनकी उदार छवि को बनाए रखते हुए पार्टी लाइन का पालन।
क्या है आयोजकों का पक्ष
HRDS के सेक्रेटरी अजी कृष्णन ने दावा किया कि “थरूर को एक महीने पहले सूचित किया गया था। उनके प्रतिनिधि थरूर के घर गए थे, जहां उन्होंने अन्य विजेताओं की लिस्ट दी थी और थरूर ने सहमति जताई थी। लेकिन थरूर ने इसे खारिज किया। सीनियर लीडर के. मुरलीधरन ने कहा कि “स्वीकार करना पार्टी को “अपमानित” करता, क्योंकि सावरकर ने ब्रिटिशों के आगे सिर झुकाया था। थरूर का फैसला पार्टी के लिए राहत है। केरल लॉ मिनिस्टर पी. राजीव (CPI(M)) ने कहा कि “फैसला थरूर का है।
थरूर की BJP लीडर्स (जैसे मोदी) से कभी-कभी निकटता चर्चा में रहती है, लेकिन यह घटना उनकी कांग्रेस प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। समारोह हो चुका होगा, लेकिन थरूर अनुपस्थित रहे। यह घटना भारत की आजादी के नायकों पर वैचारिक बहस को फिर उभारती है।







