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Home राज्य

गुजरात को ऐसे जीतना क्या जीतना?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 29, 2022
in राज्य, विशेष
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gujarat election
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हरिशंकर व्यास


नरेंद्र मोदी गुजरात जीतेंगे लेकिन योगी आदित्यनाथ के बूते यदि जीते तो मोदी-शाह के लिए क्या डूबने वाली बात नहीं? यदि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के वोटों के बंटने से जीते तो वह क्या जीते? लगभग हर दिन प्रधानमंत्री की रैलियों तीन महीने से लगातार प्रचार, पूरे देश के भाजपा नेताओं की कथित कॉरपेट बाम्बिंग, विपक्ष के उम्मीदवारों को तोडऩे से लेकर पानी की तरह पैसा बहाने के तमाम हथकंडों के बावजूद यदि कांग्रेस 40-50 सीट जीत जाए, भाजपा के वोट 40 प्रतिशत तक गिर जाएं और आप 20-25 प्रतिशत वोट पा जाए तो वह क्या नरेंद्र मोदी की वाहवाही वाली जीत होगी?

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सोचें, कल्पना करें कि जिस गुजरात में 27 साल से हिंदू राज है। नरेंद्र मोदी का कथित विकास मॉडल है वहां अरविंद केजरीवाल की फ्री बिजली या हजार रुपए मुफ्त जैसी रेवडिय़ों का शहरी गुजराती दिवाना दिखलाई दे। केजरीवाल से मोदी-शाह इतने घबराएं कि उसी वक्त में दिल्ली में एमसीडी के चुनाव करवाएं और एक नगरपालिका के चुनाव में केंद्र के मंत्री से लेकर चार-चार मंत्री एक साथ प्रचार करते हुए दिखें। अरविंद केजरीवाल एंड पार्टी को गुजरात छोड़ कर दिल्ली के चुनाव के लिए लौटना पड़े।

पर मेरा मानना है कि दिल्ली हो या गुजरात या हिमाचल प्रदेश हर तरफ नरेंद्र मोदी अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाने, साम-दाम-दंड-भेद सब कुछ झोंकने के बावजूद चुनाव जीतते हुए भी हारेंगे। इसलिए कि असली हार-जीत तो तब होती है जब खेल ईमानदार हो। गुजरात और उसके प्रमुख गढ़ सूरत में क्या नौबत जो आप पार्टी को अपने उम्मीदवार के अपहरण की चिंता करनी पड़ी। ये चुनाव ऐसे ही हैं कि यदि फुटबॉल विश्व कप में मोदी की कप्तानी में शाह, जेपी नड्डा, योगी की टीम खेल रही होती तो दुनिया देखती कि इस टीम ने इग्लैंड के खिलाडियों को खरीद लिया, किसी को पैसे दिए, किसी का अपहरण किया, उनका खाना-पानी गायब कर दिया और हर खिलाड़ी को डरा दिया कि यदि तुमने खेला तो ईडी-सीबीआई छोड़ देंगे।

सचमुच नरेंद्र मोदी के लोकतंत्र में चुनाव, जबरिया चुनाव हो गए हैं। हर तरह की नौटंकी, जबरदस्ती का चुनाव। बस, जीतना है तो सब कुछ लुटा कर मतलब सत्य-संस्कार-चरित्र, ईमानदारी-खेल की भावना आदि को दांव पर लगा कर बस जीत जाओ। विपक्ष के पास नहीं रहने दो, उसके तैयार हुए खिलाड़ी को खरीद लो, उनका खर्चा-पानी खत्म कर दो, रेफरी को खरीदे रखो, एकतरफा नारेबाजी-तालियां बजवाओ और आखिर में रेफरी से घोषणा करवा दो कि नरेंद्र मोदी भारत केसरी, गुजरात केसरी, हिंदू केसरी!

हैरानी की बात है कि ऐसे खेले से मोदी-शाह उबते हुए नहीं हैं? कल्पना करें कि ब्रिटेन में चुनाव और राजनीति मोदी-शाह जैसी हो जाए, ऋषि सुनक चुनाव जीतने का फॉर्मूला मोदी का अपना लें तो क्या होगा? या दुनिया के ओलंपिक, विश्व फुटबॉल कप के मालिक मोदी-शाह बन जाएं वे अपनी हिंदू शैली में खेल-खिलाडिय़ों के आयोजन करवाएं तो अपनी टीम को कैसे जितवाएंगे? पैसे से सौदे-धंधे करेंगे? खिलाडिय़ों को खरीदेंगे? खिलाडिय़ों के पीछे ईडी-सीबीआई को छोड़ेंगे मगर होगा वहीं, खेल उसी फिक्स अंदाज में जैसे भारत के चुनाव हो रहे हैं!

गुजरात से सुनाई दे रहा है कि जीतेंगे तो मोदी? क्यों? इसलिए क्योंकि वे हार नहीं सकते? क्या महंगाई है? हां, है! क्या बेरोजगारी है? हां, है? क्या तकलीफें हैं? बहुत ज्यादा? तब वोट किसको दोगे? भाजपा को, कमल को! मोदी जीतेगा। मतलब मानो सब पूर्व निर्धारित! मैदान में दूसरा कोई है ही नहीं! सामने न कांग्रेस और न आप किसी में खेलने, ताकत लगाने, उम्मीदवारों में दम फूंकने, मतदान के दिन तक जी जान से मेहनत करने की क्षमता है ही नहीं!

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