नई दिल्ली। इस नवरात्र में तिथियों के घटने और बढ़ने से कंफ्यूजन बना हुआ है। अगर आप भी सप्तमी व्रत, अष्टमी व्रत और अष्टमी कन्या पूजन को लेकर कंफ्यूज हो रहे हैं तो आपको बता दें कि काशी के पंचांग में क्या लिखा है। वैसे तो स्थानीय पंचांग भी देखे जाते हैं, लेकिन काशी के पंचांग को अगर आप आप मानते हैं तो आप यहां पढ़ सकते हैं। काशी के पंचांग के अनुसार ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी ने हमें बताया कि कौन सी तिथि किस दिन है, व्रत और दुर्गा पूजा पंडालों में भी किस दिन मां की स्थापना होगी।
काशी के पंचांग के अनुसर सप्तमी कब है?
काशी के पंचांग के अनुसार सप्तमी तिथि का मान 17 अक्टूबर दिन शनिवार को होगा। नवरात्र का सातवां दिन 17 अक्टूबर को होगा। सप्तमी तिथि सूर्योदय पूर्व से लेकर रात में 5:53 बजे तक व्याप्त रहेगी। इस दिन मूल नक्षत्र दिन में 8:58 बजे तक रहेगा , उसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा।
इस दिन अतिगंड नामक योग रात में 11:06 बजे तक रहेगा। तथा गद नामक औदायिक योगा व्याप्त रहेगा। मां भगवती के सप्तम स्वरूप कालरात्रि का दर्शन पूजन किया जाएगा। इसलिए अगर सप्तमी तिथि का व्रत करना है तो शनिवार को कर सकते हैं। इस दिन सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर दिन शनिवार को प्रातः काल 8:58 बजे से पूर्व पूजा पंडालो में देवी प्रतिमाओं का स्थापना कर लेनी चाहिए।
काशी पंचांग के अनुसार अष्टमी कब है?
डॉ दिवाकर के अनुसार अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर दिन रविवार को होगी। काशी के पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि सूर्योदय पूर्व से लेकर संपूर्ण दिन एवं रात व्याप्त रहकर 19 अक्टूबर दिन सोमवार को प्रातः 7:53 बजे तक व्याप्त रहेगा। इस प्रकार उदयकालिक मान्यताओं के आधार पर देखा जाए तो नवरात्र में अष्टमी तिथि की वृद्धि हो रही है। इस दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र दिन में 11:34 बजे तक व्याप्त रहेगा उसके बाद उत्तरा आषाढा नक्षत्र लग जाएगा।
सुकर्मा नामक योग रहेगा तथा शुभ नामक औदायिक योगा व्याप्त रहेगा। महाष्टमी का व्रत 18 अक्टूबर दिन रविवार को ही किया जाएगा तथा 18 अक्टूबर को ही निशा पूजा भी की जाएगी। अष्टमी तिथि में कन्या पूजन करने वाले लोग भी 18 अक्टूबर को ही कन्या पूजन करेंगे। इसलिए अगर कन्या पूजन को और व्रत रखने को लेकर कंफ्यूजन हैं तो यहां आप अच्छे से समझ गए होंगे। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग दिन में 11:34 बजे के बाद से आरंभ होगा। इस बात का ध्यान रखें कि अष्टमी तिथि का पारण 19 अक्टूबर दिन सोमवार को दिन में 7:55 बजे के बाद किया जाएगा
काशी पंचांग के अनुसार नवमी कब है?
उदय कालिक अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर दिन सोमवार को प्रातः 07:53 बजे के बाद नवमी तिथि लग जाएगी। यद्यपि कि उदय कालिक नवमी तिथि 20 अक्टूबर को होगा। परंतु नवरात्र व्रत से संबंधित हवन पूजा आदि का कार्य 19 अक्टूबर 2026 की सुबह 7:53 बजे से 20 अक्टूबर दिन मंगलवार की सुबह 9:35 बजे तक ही किया जाएगा। नवमी तिथि में कन्या पूजन करने वाले लोग कन्या पूजन 19 अक्टूबर को दिन में 7:53 के बाद से लेकर 20 अक्टूबर दिन मंगलवार की प्रातः 9:35 से पूर्व करेंगे। नवरात्र का नवां दिन 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को दिन में 9:35 बजे तक ही व्याप्त रहेगा।
इस कारण से महानवमी का व्रत 19 अक्टूबर को ही किया जाएगा। 20 अक्टूबर को प्रातः 9:35 बजे के बाद दशमी तिथि आरंभ हो जाएगी। नवरात्र से संबंधित जो 9 दिनों का व्रत करते हैं। वे लोग 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को दिन में 9:35 बजे के बाद से लेकर शाम तक कभी भी कर सकते हैं। 20 अक्टूबर दिन को विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा। 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को दिन में 9:35 के बाद दशमी तिथि लग जाने के कारण विजयदशमी का अति पावन एवं पवित्र पर्व 20 अक्टूबर को ही होगा। विजयदशमी का परम पवित्र पर्व 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को अपरान्ह 4:08 बजे से पूर्व श्रवण नक्षत्र से युक्त दशमी तिथि में किया जाएगा।







