Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

जज का निडर होना जरूरी क्यों हैं?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
December 16, 2023
in राष्ट्रीय
A A
court
26
SHARES
855
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय किशन कौल का शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में आखिरी वर्किंग डे था। इस मौके पर एक कार्यक्रम में जस्टिस कौल ने न्यापालिका, जजों से लेकर अदालतों की भूमिका के साथ ही अपने अनुभवों को शेयर किया। जस्टिस कौल ने कहा कि मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अदालतें न्याय का मंदिर हैं। इसके दरवाजे वादियों के लिए हमेशा खुले रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट मुकदमे के लिए आखिरी विकल्प होता है।ऐसे में वादी खासकर जब इस (सर्वोच्च) अदालत में पहुंचते हैं तब तक वे मुकदमा लड़ते-लड़ते थक चुके होते हैं। जस्टिस कौल सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में छह साल और 10 महीने से अधिक के कार्यकाल के बाद 25 दिसंबर को रिटायर हो जाएंगे।

कोर्ट, जज सरकार के फंड कलेक्टर नहीं

इन्हें भी पढ़े

black-box train

अब ट्रेन में सिगरेट पीना और भीख मांगना पड़ेगा भारी, ₹2,000 का फाइन; नए नियम लागू

July 1, 2026
VB G-RAM-G

क्या है VB G-RAM-G कानून? मनरेगा से कितना अलग?

July 1, 2026
पेट्रोल उत्पाद

संकट से निपटने भारत ने बनाया महा-प्लान, अब एक महीने का तेल-गैस रखेगा बैकअप

June 30, 2026
Modi Government

मॉनसून सत्र से पहले नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल संभव नहीं, समझिए कारण

June 30, 2026
Load More

जस्टिस संजय किशन कौल ने सुप्रीम कोर्ट और उसके जज सरकार के लिए फंड कलेक्टर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कानून के सिद्धांत किसी मामले में लगने वाले रिस्क से अधिक महत्वपूर्ण हैं। जस्टिस कौल ने कहा कि मैं नहीं मानता कि हम सरकार के लिए फंड कलेक्टर हैं। स्टेक महत्वपूर्ण नहीं हैं। महत्वपूर्ण यह है कि इसमें कानून का सिद्धांत क्या है। उन्होंने कहा कि इस (शीर्ष) अदालत ने न्याय दिया है, जैसा कि अपेक्षित है – बिना पक्षपात और बिना डर के। उन्होंने कहा कि यदि एक जज अन्य हितधारकों और संस्थानों से साहस दिखाने की अपेक्षा करता है तो उसकी निर्भीकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। जस्टिस कौल ने कहा कि एक जज की निर्भीकता एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है। उन्होंने कहा कि यदि, हमारे पास मौजूद संवैधानिक सुरक्षाओं के साथ, हम इसे प्रदर्शित करने में सक्षम नहीं हैं, तो हम प्रशासन के अन्य हिस्सों से ऐसा करने की उम्मीद नहीं कर सकते हैं।

कार्यवाही स्थगित करने से बचें

जस्टिस कौल ने अदालत प्रणाली की एक और महत्वपूर्ण बीमारी – स्थगन पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अदालतों को काम करना चाहिए क्योंकि वादकारी इसी उम्मीद के साथ अदालत में आता है। उन्होंने कहा कि एक वकील के रूप में, मुझे लगा कि स्थगन संस्कृति (Adjournment Culture) प्रचलित है। मुझे लगा कि यह सही नहीं है। मेरा हमेशा से यही मानना रहा है. जिस दिन कोई मामला सूचीबद्ध हो, उसी दिन उस पर सुनवाई होनी चाहिए। जस्टिस कौल ने जोर देकर कहा कि शीर्ष अदालत में मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए बार और बेंच के बीच विश्वास बढ़ना चाहिए। जस्टिस कौल ऐसे जज रहे हैं जिन्होंने अपने फैसलों के जरिये बार-बार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कलात्मक रचनात्मकता का समर्थन किया है। उन्होंने विपरीत विचारों के प्रति सहिष्णुता की भी अपील की। उन्होंने बताया कि लोगों को एक-दूसरे के साथ सीखने के लिए रहना चाहिए ताकि दुनिया एक छोटी जगह में सिमट न जाए।

जस्टिस कौल का न्यायिक सफर

  • जस्टिस कौल, 41 साल की उम्र में वरिष्ठ वकील के रूप में नामित होने वाले सबसे कम उम्र के वकीलों में से एक थे
  • उन्हें 2001 में दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।
  • जून 2013 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्ति
  • जुलाई 2014 में मद्रास हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस बने।
  • फरवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में नियुक्ति

जस्टिस कौल ने दिल में क्या संजोया है?

सुप्रीम कोर्ट में अपने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट की देन है कि न्याय तक पहुंच हर समय निर्बाध रही है। उन्होंने कहा कि अपने विवादों के समाधान के लिए इस अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले वादियों के सामने आने वाली चुनौतियां न्याय प्रदान करते समय हमारे दिमाग में सबसे अहम होनी चाहिए। फरवरी 2017 में सुप्रीम कोर्ट में आने पर एक सीनियर सहकर्मी ने उनसे जो कहा था, वह जस्टिस कौल को बहुत प्रिय है। जस्टिस कौल ने कहा, उन्होंने मुझे बताया कि एक वादी विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरने के अंतिम विकल्प के रूप में अदालत में आता है और उसे पता चलता है कि कोई भी हल नहीं है। यदि उसके 50 बकाया हैं तो 55 दीजिए, उसे 45 मत दीजिए क्योंकि वह बड़ी कठिनाई से इस अदालत में आता है। जस्टिस कौल ने कहा, ‘यह कुछ ऐसा है जिसे मैंने अपने दिल में संजोकर रखा है।’

जस्टिस कौल के महत्वपूर्ण फैसले

  • 2010 में आर्म्ड फोर्सेज में महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन देने का फैसला
  • 2017 में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में पुष्टि की
  • 2018 में पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में फैसला, सरकारी सेवाओं में SC/ST के लिए ‘क्रीमी लेयर’ की शुरुआत
  • 2019 केंद्र सरकार की तरफ से राफेल लड़ाकू विमान की खरीद की अदालत की निगरानी में जांच का आदेश नहीं देने का निर्णय
  • 2021 में NDA में ट्रेनिंग के लिए लड़कियों को शामिल करने की अनुमति
  • 2023 में सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच में समलैंगिक जोड़ों को कानूनी मान्यता देने से इनकार का फैसला
  • 11 दिसंबर को अनुच्छेद 370 हटाने में पक्ष में फैसला फैसला, कश्मीरियों की पीड़ा पर भी बात की

22 साल से अधिक समय तक जज के रूप में सेवा करने के बाद जस्टिस कौल ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बार और बेंच को इसकी रक्षा करनी चाहिए। इसके लिए मिलकर काम करना है। जस्टिस कौल ने कहा कि आखिरकार, कोई अन्य तरीका नहीं है जिसके द्वारा न्यायपालिका अपने लिए खड़ी हो सके और मुझे लगता है कि न्यायपालिका का समर्थन करना बार का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि फिर भी, मैं इस बात से सहमत हूं कि बार जजों का है। मैं इसकी पूरी तरह सराहना करता हूं। उन्होंने कहा कि मैंने दिल्ली हाई कोर्ट में एक जज के रूप में भी अनुभव हासिल किया।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
CM Yogi Ayodhya

नगरीय विकास का मॉडल, धर्मनगरी अयोध्या में : सीएम योगी

June 15, 2023
Hindus leave India

हिन्दू भारत छोड़ो, हिन्दू मकान खाली करो, घर की दीवारों पर लिखे मिले आपत्तिजनक नारे

May 7, 2023

सीएम धामी ने पीएम मोदी से की मुलाकात, वैश्विक निवेश सम्मेलन के उद्घाटन हेतु किया आमंत्रित

December 3, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: मदरसा बोर्ड समाप्त
  • PM सनाए ताकाइची का भारत दौरा, रक्षा और टेक पर महाडील संभव! चीन की बढ़ेगी टेंशन?
  • ₹50000/10g सस्ता हो चुका सोना, फिर भी नहीं मिल रहे खरीदार?

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.