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Home राज्य

मणिपुर हिंसा पर अब क्यों नाराज हुए आरएसएस प्रमुख?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 11, 2024
in राज्य, राष्ट्रीय
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Mohan Bhagwat
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इंफाल : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मणिपुर हिंसा पर न सिर्फ चुप्पी तोड़ी है, बल्कि केंद्र सरकार को खुले तौर पर नसीहत भी दे दी। नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय वर्ष के समापन पर मोहन भागवत ने कहा कि एक साल से मणिपुर शांति की राह देख रहा है। इससे पहले 10 साल शांत रहा। पुराना गन कल्चर समाप्त हो गया, ऐसा लगा। और अचानक जो कलह वहां पर उपजा या उपजाया गया, उसकी आग में अभी तक जल रहा है, त्राहि-त्राहि कर रहा है। इस पर कौन ध्यान देगा? प्राथमिकता देकर उसका विचार करना यह कर्तव्य है। उनके इस बयान के कई मतलब मायने निकाले जा रहे हैं। अब बदले राजनीतिक परिदृश्य में बीजेपी पर टिकी है। सवाल यह है कि अगर संघ नाराज है तो मणिपुर में बीजेपी नेतृत्व बदलेगी? माना जा रहा है कि संघ प्रमुख के बयान के बाद मणिपुर में मुख्यमंत्री एन. वीरेन सिंह सरकार बदल सकती है। बता दें कि इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी राज्य की दोनों सीटें गंवा चुकी है।

दस साल की शांति के बाद जलने लगा मणिपुर

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मई 2023 से मणिपुर में दस साल की शांति के बाद हिंसा शुरू हुई। कुकी और मैतेई समुदाय के बीच हिंसा में अब तक 226 से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी। पांच हजार से ज्यादा घर जलाए गए और 60 हजार से अधिक लोग बेघर हो गए। राज्य में 5000 घंटे इंटरनेट बंद रहा। असम के कछार और मिजोरम में मणिपुर के लोगों ने शरण ले रखी है। इस हिंसा ने एक बार फिर कुकी उग्रवादियों को पनपने का मौका दे दिया। पिछले साल जुलाई में जब दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का वीडियो आया तो पूरा देश हिल गया। सीबीआई की चार्जशीट में यह सामने आया कि 4 जून को पुलिस की लापरवाही के कारण महिलाओं के साथ भीड़ ने बदसलूकी की थी। हिंसा की घटनाओं के बाद मणिपुर की एन बीरेन सिंह सरकार की काफी आलोचना हुई, मगर बीजेपी नेतृत्व ने उनकी सत्ता कायम रखी। एक साल बाद फिर से मणिपुर के जिरीबाम में हिंसा भड़की है। सोमवार को उग्रवादियों ने सीएम के काफिले पर भी हमला किया। इसी बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान आया, जिसमें उन्होंने राज्य के हालात पर चिंता जताई।

अनायास नहीं आया मोहन भागवत का बयान

आरएसएस प्रमुख का मणिपुर हिंसा पर बयान अनायास नहीं आया है। चिंता का विषय यह है कि एक साल बाद भी सरकार हिंसा का समाधान नहीं निकाल सकी है। मणिपुर से पलायन का सिलसिला एक साल से जारी है। 60 हजार के अधिक लोग अपने पैतृक इलाके को छोड़कर राहत शिविरों में रह रहे हैं। पिछले साल गृह मंत्री अमित शाह ने हिंसा के लिए म्यांमार से आए कुकी लोगों को जिम्मेदार ठहराया था, जिनके आने से मैतेई लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई। इस बीच बांग्लादेश से भी कुकी हमार हो संगठन के 200 उग्रवादियों के भारत में आने की शक जताया गया। राज्य के कई इलाकों में लोग सुरक्षा बलों के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। मोहन भागवत के बयान के बाद विपक्ष के नेताओं की प्रतिक्रिया आई है। शिवसेना यूबीटी के संजय राउत ने कहा कि यह आरएसएस का आशीर्वाद है, जबकि तेजस्वी यादव ने उनकी प्रतिक्रिया को देर से आया बयान बता दिया।

क्यों शुरू हुई मणिपुर में हिंसा, कारण जान लीजिए

पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर की आबादी 33 लाख है, जिनमें आधी आबादी मैतेई समुदाय की है। इंफाल की घाटी में अधिकतर मैतेई रहते हैं। कुकी और नगा समुदाय की जनसंख्या 43 फीसदी है, जिन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है। उनके पहाड़ी इलाके भी इस कानून के कारण संरक्षित है, जहां मैतेई जमीन नहीं खरीद सकते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में मैतेई समुदाय ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग की थी। सरकार बनने के बाद मैतेई ने आंदोलन शुरू किया, जिसका कुकी समुदाय ने विरोध किया। कुकी समुदाय का कहना है कि अगर मैतेई को एसटी का दर्जा मिल जाता है, उनकी जमीन छिन जाएगी। पहाड़ के इलाके में मैतई जमीन खरीदकर बसेंगे। 3 मई 2023 को अचानक विरोध हिंसा में बदल गया और दोनों समुदाय आपस में भिड़ गए। अब इस संघर्ष में कूकी उग्रवादियों की एंट्री हो गई, जो सुरक्षा बलों के साथ मैतेई लोगों को निशाना बना रहे हैं।

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