नई दिल्ली: तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म पर हमला बोला है। बुधवार को उन्होंने कहा कि नई संसद में हिंदी अभिनेताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित नहीं किया गया था। क्योंकि मुर्मू एक आदिवासी समुदाय से हैं और एक विधवा हैं। इसे हम सनातन धर्म कहते हैं।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उदयनिधि स्टालिन ने द्रौपदी मुर्मू का उदाहरण देते हुए कहा था कि उन्हें नए संसद भवन के उद्घाटन में आमंत्रित नहीं किया गया, क्योंकि वह आदिवासी हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सनातन जैसी डेंगू, मलेरिया वाली टिप्पणी जाति-आधारित समाज के खिलाफ थी, न कि हिंदू धर्म के खिलाफ।
अन्नामलाई ने स्टालिन को घेरा
तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने उदयनिधि पर पलटवार किया है। उन्होंने डीएमके को घेरते हुए पूछा कि फिर पार्टी ने राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी का समर्थन क्यों नहीं किया?
राहुल गांधी ने संसद में उठाया मुद्दा
राहुल गांधी ने भी द्रौपदी मुर्मू की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी बुधवार को संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर बोलते हुए नए संसद भवन में द्रौपदी मुर्मू की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह काफी अच्छी इमारत है। लेकिन सच कहूं तो, मुझे इस प्रक्रिया में भारत के राष्ट्रपति को देखना अच्छा लगता। भारत की राष्ट्रपति एक महिला हैं, वह आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं और एक सदन से दूसरे सदन में इस स्थानांतरण में उनका दिखना उचित होता।
दरअसल, गणेश चतुर्थी के अवसर पर संसद का कामकाज पुराने भवन से नए भवन में शिफ्ट हो गया है। मंगलवार को कई अभिनेताओं ने नए संसद भवन का दौरा किया।
सनातन को बीमारी बताकर खत्म करने का किया था आह्वान
इससे पहले भी उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म पर विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म डेंगू, कोरोना, मलेरिया जैसी बीमारी है। इसे खत्म करना होगा। इस बयान के बाद देशभर के संतों ने उनकी आलोचना की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन पर पलटवार किया था।







