नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने को है. लेकिन इससे पहले ही इसको लेकर देश का सियासी पारा चढ़ गया है. इस सत्र में केंद्र की मोदी सरकार द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को दोबारा पेश किए जाने की सरगर्मी तेज है. इसी बीच, विपक्षी खेमे से सरकार को उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) की वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बिल का खुलकर समर्थन किया है. उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील की है कि अब महिलाओं को उनका हक देने का सही समय आ गया है.
सोशल मीडिया पर किया ऐलान
प्रियंका चतुर्वेदी सोशल मीडिया पर अक्सर अपने बेबाक विचारों के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा कि अब महिलाओं के लिए इस आरक्षण को हकीकत में बदलने का वक्त आ गया है.
दरअसल, आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त, 2026 तक चलना है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि सरकार इस सत्र में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने और देश में सीटों के परिसीमन के लिए एक बार फिर संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है.
दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में सरकार
रिपोर्ट के अनुसार, एनडीए सरकार इस बिल को दोनों सदनों से पास कराने के लिए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) के कुछ दलों जैसे DMKऔर NCP (शरद पवार गुट) से संपर्क साध रही है, ताकि वोटिंग के वक्त वे कम से कम सदन से गैर-हाजिर रहें. भाजपा सूत्रों का कहना है कि सरकार इस बिल को पटल पर तभी रखेगी, जब वह संसद में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरी तरह सुनिश्चित कर लेगी.
पहले गिर चुका था विधेयक
आपको बता दें कि इसी साल अप्रैल में सरकार संसद के विशेष सत्र के दौरान एक ऐसा ही बिल लेकर आई थी. इस बिल में साल 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं को आरक्षण देने और संसद की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था. लेकिन विपक्षी एकजुटता और दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण यह संविधान संशोधन विधेयक सदन में गिर गया था. अब देखना होगा कि प्रियंका चतुर्वेदी के इस रुख के बाद क्या बाकी विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर नरम पड़ते हैं या नहीं.







