चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पता नहीं श्रीलाल शुक्ल का कालजयी उपन्यास ‘राग दरबारी’ पढ़ा है या नहीं! उसमें एक चुनाव का प्रसंग है। एक बाबाजी उस गांव में पहुंचते हैं, जहां प्रधान का चुनाव होना है। वे धुनी रमाते हैं, अखंड कीर्तन शुरू करते हैं, गांजा-भांग की महफिल जमती है और वे इशारों इशारों में बता देते हैं कि भगवान ने उस गांव के लिए किसको प्रधान चुना है। नशा उतरने से पहले लोगों के दिल दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि भगवान ने उनके लिए किसको चुना है। और इस तरह बाबाजी की पसंद का उम्मीदवार चुनाव जीत जाता है। चुनाव जीतने की यह पद्धति नेवादावाली पद्धति के तौर पर स्वीकार की गई और अलग अलग इलाकों में लोगों ने इसे अपने अपने हिसाब से कारगर तरीके से आजमाया।
प्रशांत किशोर बिहार में इसी नेवादावादी पद्धति से काम कर रहे हैं। फर्क यह है कि वे इशारों की बजाय खुल कर बिहार के लोगों को बता रहे हैं कि कौन दो लोग हैं, जिनकी वजह से बिहार बरबाद हुआ है और आगे उनको नहीं चुनना है। वे सुराज अभियान चला रहे हैं और बिहार में पदयात्रा कर रहे हैं। वे भी धुनी रमाए हुए हैं, अपनी तरह के भजन-कीर्तन हो रहे हैं और वे लोगों को बता रहे हैं कि पिछले 30-35 साल में लालू प्रसाद और नीतीश कुमार ने बिहार को बरबाद कर दिया है। वे कहीं कहीं भाजपा पर भी हमला कर रहे हैं लेकिन दाल में नमक के बराबर भाजपा उनके निशाने पर है।
वे बड़ी सावधानी से यह बात छिपा जा रहे हैं कि बिहार की बरबादी अगर नीतीश कुमार की वजह से हुई है तो उसमें तीन-चौथाई समय तक भाजपा भी उनके साथ थी। 2013 से 2017 के चार साल को छोड़ दें तो 2005 से 2022 के 17 साल के नीतीश कुमार के कार्यकाल में 13 साल भाजपा उनकी सहयोगी रही है। 13 साल तक भाजपा के उप मुख्यमंत्री रहे हैं और अहम मंत्रालय भाजपा के नेताओं ने संभाले हैं। लेकिन प्रशांत किशोर के प्रचार का असर यह हो रहा है कि भाजपा उन 13 सालों की जिम्मेदारी से मुक्त हो रही है या उस पर परदा पड़ रहा है।
लोगों के दिमाग में यह बात बैठ रही है कि बिहार जिस स्थिति में है उसके लिए जिम्मेदार लालू प्रसाद और नीतीश कुमार हैं। हालांकि जाति में बंटे बिहार में यह प्रचार कितना काम आएगा, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि बिहार की युवा पीढ़ी में या जो लोग बाहर हैं उनके दिमाग में यह बात बैठ रही है कि पिछले साढ़े तीन दशक से सिर्फ दो पार्टियों का राज रहा है और सिर्फ दो चेहरे ही बिहार की बदहाली के लिए जिम्मेदार हैं। सो, भले प्रशांत किशोर अपने लिए या बिहार की भलाई के लिए काम कर रहे हों लेकिन उनके प्रचार का लाभार्थी भाजपा बन रही है। तभी जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि प्रशांत किशोर भाजपा के लिए काम कर रहे हैं।






