नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही 8वें वेतनमान को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू किया है. ये वेतनमान जनवरी से इफैक्टिव होगा, जिससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच खुशी का माहौल है. हालांकि कर्मचारी संगठन फिलहाल इसमें कुछ बदलाव की मांग कर रहे हैं, जिसको लेकर बैठकों का दौर भी जारी है. इसी बीच आपको बताते हैं कि पहले से सातवें वेतनमान की शुरुआत कैसे हुई और किस तरह वेतनमान में समय समय पर बदलाव आया है.
आजादी के बाद से अब तक कुल सात वेतन आयोग बनाए जा चुके हैं. पहला वेतन आयोग मई 1946 में लागू हुआ था, जबकि सातवां वेतन आयोग 2014-15 में लागू किया गया. Upstox की रिपोर्ट के मुताबिक नीचे दी गई टेबल से इसे आसानी से समझिए.
वेतन आयोग का शुरुआती ढांचा
पहले वेतन आयोग से लेकर सातवां वेतन आयोग तक सैलरी स्ट्रक्चर में कई सुधार किए गए, जिनका उद्देश्य कर्मचारियों की सैलरी, DA और सुविधाओं को बेहतर बनाना रहा है. शुरुआत में वेतन आयोगों की सैलरी का ढांचा काफी आसान था, इसमें बेसिक पे के साथ कुछ सीमित भत्ते शामिल होते थे. लेकिन जैसे-जैसे महंगाई की मार लोगों की जेब पर पड़ने लगी, वैसे- वैसे ही वेतन आयोग ने भी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन किया.
महंगाई भत्ते को मिला महत्व
तो वहीं तीसरे और चौथे वेतन आयोग के दौरान महंगाई भत्ता (DA) को ज्यादा महत्व दिया गया, जिससे कर्मचारीयों की आर्थिक स्थिति पर कोई प्रभाव ना पड़े. इसके बाद पांचवें वेतन आयोग ने सैलरी स्ट्रक्चर को थोड़ा व्यवस्थित किया और कई नए भत्तों को भी इसमें शामिल किया. इसके बाद छठा वेतन आयोग आया जिसने बड़ा बदलाव करते हुए पे बैंड और ग्रेड पे को लागू किया. इससे सैलरी कैलकुलेशन ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित हो गया.
सातवां वेतन आयोग
बात करें सातवें वेतन आयोग की तो इसने सिस्टम को और आसान बनाते हुए पे मैट्रिक्स लागू किया. इसमें अलग-अलग लेवल तय किए गए, जिससे कर्मचारियों को प्रमोशन और वेतन वृद्धि समझने में आसानी हुई. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर के जरिए बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी की गई. वहीं अब आठवें वेतन आयोग के लागू होने से कर्मचारियों को और भी ज्यादा लाभ मिलने वाला है.







