Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विशेष

क्या नई विश्व व्यवस्था के लिए अपरिहार्य है विश्वयुद्ध?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
October 16, 2023
in विशेष, विश्व
A A
war
23
SHARES
765
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

अनुज अग्रवाल


और इसराइल पर हमास द्वारा आतंकी हमला करा, रुस व चीन ने अमेरिका व नाटो पर निर्णायक चोट कर ही दी। हालांकि मंच पर ईरान, तुर्की व कतर खेल खेल रहे हैं किंतु पर्दे के पीछे डोरियां रुस – चीन के हाथो में ही हैं।यह सीधा सीधा अमेरिका पर हमला है और अमेरिका इसी रूप में इसको ले भी रहा है क्योंकि इजराइल का जन्म व अस्तित्व अमेरिका पर ही टिका हुआ है।नृशंस, ख़ूँख़ार व घातक इस युद्ध के लंबा और बहुत लंबा चलने के आसार हैं क्योंकि लगभग सभी इस्लामिक कट्टरपंथी गुट व राष्ट्र इससे जुड़ते जा रहे हैं। तेल – गैस की आर्थिक व्यवस्था पर कब्जे के इस खेल में सदियो से चल रहा इस्लाम बनाम ईसाई-यहूदी संघर्ष भी उभर कर सामने आ गया है, बल्कि इसी को हथियार बनाया है रुस व चीन ने। प्रथम व दूसरे विश्व युद्ध के साथ बनी विश्व व्यवस्था जिसके माध्यम से अमेरिका नाटो की मदद से दुनिया को हाँक रहा है , को बदलने का निर्णायक युद्ध।

इन्हें भी पढ़े

ट्रंप भैंसा

बांग्लादेश का ‘ट्रंप भैंसा’ बना ग्लोबल सेंसेशन, 700 किलो के भैंसे को मिली VIP सुरक्षा

May 29, 2026
meta

Meta का बड़ा फैसला: अब Instagram, Facebook और WhatsApp इस्तेमाल करने के लिए देने पड़ेंगे पैसे!

May 29, 2026
Siddaramaiah DK Shivakumar

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व की लड़ाई, क्या सिद्धारमैया की बराबरी कर पाएंगे डीके शिवकुमार?

May 28, 2026
BJP

बीजेपी ने चार राज्यों में किए बड़े संगठनात्मक बदलाव, जानिए दिल्ली में कमान किसके हाथ ?

May 28, 2026
Load More

यूएसएसआर के विघटन एवं चीन में थ्येनमान नरसंहार के बाद इन दोनों देशों में आयी बाज़ार अर्थव्यवस्था के बाद पिछले दो दशकों में रूस व चीन दोनों फिर से आर्थिक ताकत बनते गए और क्षेत्रीय सैन्य महाशक्ति भी। चीन सन् 2008 से ही अमेरिका को पिछाड़ने की कोशिश में है। सन् 2008 की आयी आर्थिक मंदी अमेरिकी व नाटो देशों की अर्थव्यवस्था तोड़ने का चीनी षड्यंत्र ही था तो उसके जवाब में कोरोना वायरस को चीन में छोड़ना व रुस के पुराने साथी यूक्रेन में अपनी कठपुतली सरकार बना रुस को घेरना अमेरिकी षड्यंत्र। किंतु अमेरिकी खेल उल्टे पड़ गए और चीन ने कोरोना वायरस को वुहान से निकलने नहीं दिया उल्टे पूरी दुनिया में फैला दिया तो रूस ने यूक्रेन का ऐसा सर्वनाश किया कि पूरे यूरोप की हालत पतली हो गई और अमेरिकी भी यूक्रेन को सहायता देता देता मंदी का शिकार हो चला। रुस व चीन गठजोड़ हो सकता है आत्मघाती खेल खेल रहे हों किंतु अमेरिका व नाटो देश भी बुरी तरह हाँफ रहे हैं।

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के चक्कर में अमेरिका को अफगानिस्तान से बीच में ही भागना पड़ा तो हाल ही में फ्रांस नाइजर को छोड़ भाग निकला क्योंकि यूक्रेन युद्ध में उनके संसाधन कम पड़ते जा रहे हैं और उस पर अब मध्य पूर्व एशिया का महासँकट। यूक्रेन संकट से कई गुना बड़ा भी और खतरनाक भी। फिलिस्तीन – इसराइल विवाद की यह उलझन तेल कूटनीति व अरब देशों से कमजोर पड़ते रिश्तों के बीच अमेरिका को इस क्षेत्र व खेल से बाहर न कर दे। अगर अरब लीग, ओपेक देश, इस्लामिक देश व इस्लामिक जिहादी गुट रुस – चीन के इस खेल के खिलाड़ी बन इजराइल को मिटाने पर आमादा हो गए तो अपनी साख व अपने प्यादे इजराइल का अस्तित्व बचाने के लिए अमेरिका व नाटो देशों को स्वयं मैदान में कूदना होगा और इसके परिणाम विश्व का दो गुटों में विभाजन व भयंकर व दीर्घकालिक विश्व युद्ध होगा। ऐसा होना अब लगभग तय हो ही चुका है।आमने – सामने का घातक हथियारों से लड़े जाने वाला यह युद्ध तब ही ख़त्म होगा जब पुरानी विश्व व्यवस्था बदलने की स्थिति आएगी। शायद ऐसा न भी हो क्योंकि विनाशक हथियारों को इतनी बड़ी खेप दोनों पक्षों के पास है कि वे एक दूसरे का संपूर्ण विनाश न कर बैठें।

महाशक्तियों के इस खेल को कुछ ऐसे समझा जा सकता है –
1) रूस और चीन, अमेरिका व नाटो के पिछले तीस सालों से दुनिया पर चले आ रहे वर्चस्व को तोड़ने पर उतारू हैं। चूँकि रुस के पास तेल और गैस के बड़े भंडार हैं और चीन का कब्जा दुनिया के आधे से अधिक विनिर्माण क्षेत्र पर है इसलिए वे अमेरिका व नाटो के वर्चस्व को तोड़ने का माद्दा रखते हैं।यूक्रेन युद्ध के बीच रुस व चीन ने अरब मुस्लिम देशों से अपनी दोस्ती व संबंध बहुत तेज़ी से अच्छे किए हैं व उनकी अमेरिका व नाटो से दूरी पैदा कर दी है।

2) रुस – चीन गठजोड़ ने अमेरिकी ख़ेमे की तरह दुनिया के हर देश में अपनी व्यापक पकड़ व घुसपैठ कर ली है। वैचारिक स्तर पर यह बाज़ार समाजवाद बनाम बाज़ार पूंजीवाद का युद्ध है जो वैचारिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व सामरिक सभी मोर्चों पर लड़ा जा रहा है। स्थिति यह हो चुकी है कि लगभग सभी देशों में दो प्रमुख राजनीतिक दलों/ गुटों में से एक रुस – चीन गुट के बाजार समाजवाद का तो दूसरा अमेरिका व नाटो के बाज़ार पूंजीवाद का समर्थक है। भारत में भी यह एनडीए व इंडी गठबंधन की विचारधारा में स्पष्ट दिखता है।
3) आर्थिक के साथ साथ इन दोनों गुटों में कई जगह व देशों में धार्मिक विभाजन का रूप भी लिए हुए है। विशेषकर एशिया व अफ़्रीका में यह इस्लाम व ईसाइयत के खूनी संघर्ष व वर्चस्व की लड़ाई में सदियों से चला आ रहा है यद्यपि यहाँ के अधिकांश हिंदू व बौद्ध या तो निरपेक्ष हैं अथवा ईसाइयों के साथ खड़े हैं।

4) प्रथम विश्व युद्ध के बाद मित्र देशों विशेषकर इंग्लैंड द्वारा तुर्की का 46 इस्लामिक देशों में विभाजन और दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका की शह पर मुस्लिम देशों के बीच यहूदी देश इजराइल का गठन नाटो देशों की तेल कूटनीति और बाँटो व राज करो की कूटिलनीति का हिस्सा था। कुछ ऐसा ही खेल उन्होंने भारत का विभाजन करके किया था। जिसके दंश दक्षिण एशिया आज भी झेल रहा है। इसके बाद से पिछले 75 वर्षों से अमेरिका के नेतृत्व में नाटो देश तेल उत्पादक मुस्लिम देशों का सफलतापूर्वक शोषण व दोहन कर रहे हैं, इनके विवादों को हवा देते हुए कट्टरपंथी व आतंकी गुटों को बढ़ावा देते रहते है व अपना उल्लू साधते रहते हैं। रुस व चीन के उभरने से इन देशों को नया सहारा मिल गया है और वे अमेरिका व नाटो से पल्ला झाड़ने व अपने मतभेद भुलाने की ठान बैठे हैं। “उभरते – उगते एशिया” से नाटो दहशत में है व इसको बिखेरने की पूरी कोशिश में लगा है। बड़ा संघर्ष यानि विश्व युद्ध ही इस संघर्ष को निर्णायक स्वरूप दे सकता है। इसलिए हर नया संघर्ष दुनिया को विश्व युद्ध की ओर धकेल रहा है।

5) यूक्रेन युद्ध में अपने बड़े साधन व हथियार गँवाए नाटो के लिए खाड़ी में नया युद्ध बहुत बड़ी आफत जैसा है जो उसकी कमर तोड़ के रख देगा और यही रुस – चीन गुट चाहता भी है। इसलिए उम्मीद है कि चीन ताइवान पर जल्द ही हमला कर दे और नाटो एक और युद्ध का मोर्चा खुलने से बुरी तरह उलझ जाए व हार मान बैठे या भयानक विनाश को न अंजाम दे बैठे।कोरोना महामारी से चोट खाए विश्व के कम से कम सौ देश आर्थिक मंदी, अराजकता व गृहयुद्ध का शिकार हैं। अफ़्रीका व दक्षिण अमेरिका के देशों में भी हालात बहुत खराब हैं। ऐसे में विश्व युद्ध दुनिया को भीषण तबाही, नरसंहार, भूख, गरीबी व बेरोजगारी की ओर ले जाएगा।

6) आर्थिक मंदी से जूझ रहे विश्व को क्लाइमेट चेंज की मुसीबतें भी रोजाना छका रही हैं और हर दिन विश्व के किसी न किसी भाग में प्राकृतिक आपदाएं व विनाश अब आम बात है ऐसे में युद्ध के नित नए मोर्चे खुलते जाने से सप्लाई चैन फिर से टूटने के आसार हैं , शेयर बाजार का फिसलना व अर्थव्यवस्था का गर्त में जाना तय है। ऐसे में होने वाले भयावह विनाश व मौत के मंजरों की कल्पना मात्र से ही सिहरन पैदा हो जाती है। WHO एक और घातक वायरस एक्स के शीघ्र फैलने की घोषणा कर ही चुका है जो कोरोना से कई गुना घातक हो सकता है। यह वायरस दोनों गुटों के बीच चल रहे युद्ध का ही हिस्सा हो सकता है।

7) बढ़ता संघर्ष अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संधियों, समझौतों, आयात – निर्यात, व्यापार, प्रोजेक्टो सभी के लिए श्मशान सिद्ध होगा। यूएन, जी -20, ब्रिक्स आदि सभी पहल बेमानी सिद्ध होती जायेंगी। बाज़ार अर्थव्यवस्था में बाजार भी जब उत्कर्ष पर पहुँच जाता है तो युद्ध ही बाजार के पुनर्गठन का एकमात्र रास्ता होता है इसलिए भी विश्व युद्ध अपरिहार्य है और नई विश्व व्यवस्था भी।
😎 दुनिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत की स्थिति व भूमिका क्या हो यह भी विचारणीय, गंभीर व संवेदनशील मुद्दा है। अमेरिका व नाटो भारत को चीन के विरुद्ध खड़ा करना चाह रहा है और इसीलिए विशेष महत्व दे भी रहा है। हाल ही में भारत में हुए जी – 20 शिखर सम्मेलन की उपलब्धियां व भारत को मिली बढ़त व महत्व नए अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में फीका पड़ गया है और परिस्थिति बहुत तेज़ी से बदल रहीं हैं।

कूटनीति शक्ति व संसाधनों को पाने का संघर्ष होता इस बार यह संघर्ष लंबा चलने की उम्मीद है शायद एक दशक तक भी। शांति व संवाद भी कूटनीति के हथियार हैं और ये हथियार तभी काम आते है जब आपके पास असली हथियार पर्याप्त मात्रा में हों। भारत को यह बात समझनी होगी और तय करना होगा कि वह किस रूप में इस निर्णायक संग्राम में भागीदार बनेगा – एक व्यापारी के रूप में , मूक दर्शक के रूप में या पक्षकार के रूप में।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
india-china

PM मोदी पर चीन की भविष्यवाणी, अबकी बार 430 पार!

May 16, 2024
Yati Narasimha Nanda

Pahalgam Attack: सर्वोच्च सत्ताधिकारियों से ‘हिंदू नरसंहार’ का उत्तर मांगने निकले यति नरसिंहानंद !

April 26, 2025

इक्कीस बनाम सत्ताईस में फंसे मौलाना

December 13, 2022
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • हार्दिक पंड्या क्यों किया MI टीम छोड़ने का फैसला, जानिए
  • ये हैं LIC की 5 सबसे बेहतरीन पॉलिसी, 45 रुपए से बना सकते हैं 25 लाख का फंड
  • NEET पेपर लीक कैसे हुआ इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.