वाराणसी: 2020 में कोविड ने भारत में एंट्री ली और 2022 तक इसके अलग-अलग वेरिएंट ने खूब कहर बरपाया है. कोविड कम तो हुआ, लेकिन एक्सपर्ट ने पहले ही कहा था कि यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. यही वजह है कि वाराणसी में लगभग 4 साल बाद फिर से कोविड ने दस्तक दे दी है.
27 साल के युवक में इसके वायरस की पुष्टि हुई है. हालांकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इस मामले में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार कर दिया है, लेकिन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने मरीज के भर्ती होने की बात कही है.
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. केके गुप्ता ने बताया कि इस मरीज के सभी घर वालों को भी क्वारंटाइन में रहने की सलाह दी गई है. 27 वर्षीय युवक वाराणसी के आशापुर क्षेत्र का रहने वाला है. इसके अलावा उसके संपर्क में आए सभी लोगों की जांच कराई जा रही है. हालांकि जिस युवक में कोरोना की पुष्टि हुई है उसकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है. बीते कुछ दिनों से उसके चेस्ट में दिक्कत थी. वह निमोनिया के इलाज के लिए 12 जुलाई को अस्पताल में भर्ती हुआ था. कोरोना जैसे लक्षण होने के कारण उसकी जांच कराई गई, जिसमें कोरोना की पुष्टि हुई है.
इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी मुकेश कुमार का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. इधर चिकित्सा अधीक्षक प्रो. केके गुप्ता ने बताया कि वाराणसी के सर सुंदरलाल अस्पताल में 6 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार रखा गया है. इसी वार्ड में कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है.
कोविड टाइम में यह हॉस्पिटल कोविड डेडिकेटेड हॉस्पिटल था. उस समय यहां कोरोना के सैकड़ों पेशेंट भर्ती होते थे. उस समय से ही आइसोलेशन वार्ड को यहां एक्टिव रखा गया है. जिसे समय और जरूरत के हिसाब से बढ़ाया घटाया जाता है. इसके अलावा कोविड के जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी लैब भी अस्पताल में संचालित है, जिसमें कोरोना की टेस्टिंग कराई जा सकती है.
बता दें कि बीते माह भी प्रदेश की राजधानी और अयोध्या में करीब 9 केस मिले थे, जिसमें पीजीआई और केजीएमयू के पांच चिकित्सकों की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. वहीं, राम जन्मभूमि परिसर समेत अयोध्या में चार स्थानों पर कोरोना के 4 पाजिटिव मरीज पाए गए थे.






