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Home राज्य

कर्नाटक की जाति जनगणना पर खामोश क्यों है कांग्रेस!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 11, 2023
in राज्य
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Congress Karnataka
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बेंगलुरू: बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट से देश की राजनीति ने करवट ली है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत तमाम विपक्ष देश के अन्य राज्यों में जातीय जनगणना कराने का वादा कर रहा है। मगर मगर कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में सिद्धारमैया की सरकार 2015 में कराई गई सोशल-इकोनॉमिक सर्वे को लेकर घिरती जा रही है। कांग्रेस आलाकमान सिद्धारमैया पर जातीय सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दबाव बना रहा है, जबकि कर्नाटक का लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय इसका विरोध कर रही है। मंझधार में फंसे सीएम सिद्धारमैया के लिए इस पर फैसला लेना बड़ी चुनौती बन गई है, अब वह किसकी सुनेंगे। दूसरी ओर, विपक्ष में बैठे बीजेपी ने रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले जाति के हिसाब से फील्डिंग सजाने में जुटी है। बीजेपी ने लिंगायत समुदाय के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस येदियुरप्पा को पार्टी अध्यक्ष बनाया है। चर्चा है कि अब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी वोक्कालिगा विधायक को सौंपी जाएगी।

रिपोर्ट के आंकड़ों से नाराज हैं वोक्कालिगा और लिंगायत

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कर्नाटक में वोक्कालिगा समुदाय की आबादी 15 फीसदी मानी जाती है, जबकि लिंगायत की आबादी 17 प्रतिशत बताया जाता है। दक्षिण कर्नाटक में वोक्कालिगा और उत्तर कर्नाटक में लिंगायत का दबदबा है। विधानसभा की 100-100 सीटों पर वोक्कालिगा और लिंगायत बड़े फैक्टर हैं। 2015 में सीएम सिद्धारमैया ने सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक सर्वे कराया गया। सर्वे पर 162 करोड़ रुपये खर्च किए गए। तब इस सर्वे के जरिये कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक में जातीय जनगणना करा ली। 2017 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कर्नाटक आयोग पिछड़ा वर्ग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी, मगर सिद्धारमैया की सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।

2017 में एचडी कुमारस्वामी, फिर बीजेपी की सरकार आ गई। जातीय झगड़े की आग में झुलसने के डर से दोनों सरकारों ने पांच साल तक जातीय सर्वे की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से परहेज ही किया। तब यह चर्चा थी जातीय सर्वे के नतीजों में लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय का डेटा चौंकाने वाला था, इसलिए कांग्रेस ने इसे चुनाव से पहले नहीं छेड़ा। इस रिपोर्ट में दलितों की आबादी इन दोनों समुदायों से अधिक बताई गई है। अगर यह सच है तो जिसकी जितनी भागेदारी, उसकी इतनी हिस्सेदारी वाली थ्योरी के तहत दो बड़े समुदायों को बड़ा कुर्बानी देनी पड़ जाएगी।

रिपोर्ट सार्वजनिक हुई तो कांग्रेस को 2024 में बड़ा नुकसान

2022 में कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया ने दोबारा सत्ता संभाली तो जाति और आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट पर चर्चा शुरू हुई। बिहार में जातीय जनगणना के बाद सिद्धारमैया की सरकार पर भी रिपोर्ट सार्वजनिक करने का दबाव बढ़ा। इस सर्वे से कर्नाटक में प्रभुत्व रखने वाली दो बड़ी जातियां खुश नहीं है। कर्नाटक की जातीय जनगणना पर भी जातियों ने वैसे ही आरोप लगाए हैं, जैसे बिहार में लगे हैं। जाति समूहों का आरोप है कि सर्वे के दौरान न उनसे बात की गई और न ही आंकड़ा लिया गया। लिंगायत समुदाय कांग्रेस विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा ने खुलेआम आरोप लगा दिया कि सर्वे की रिपोर्ट घर में बैठकर लिखी गई है।

पिछले दिनों वोक्कालिगा संघ ने बेंगलुरु में एक बैठक की, जिसके दौरान उसने सरकार से जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट को खारिज करने का आग्रह किया। बैठक में उपमुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार भी मौजूद थे। सिद्धारमैया को अब सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक करने की सलाह आलाकमान से मिल रही है। अगर यह रिपोर्ट जारी होती है तो 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। सिद्धारमैया केंद्रीय नेताओं को चुनावी लाभ-हानि के बारे में समझाने में जुटे हैं, मगर अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है।

बीजेपी ने लिंगायत को प्रदेश अध्यक्ष बनाया, वोक्कालिगा विधायक होंगे नेता प्रतिपक्ष

इस बीच बीजेपी ने जाति के हिसाब से फील्डिंग सजाना शुरू कर दिया है। पार्टी ने बी एस येदियुरप्पा के बेटे बी वाई विजयेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। केंद्र के दबाव के बाद चुनावी राजनीति से बेदखल हुए लिंगायत नेता येदियुरप्पा ने पार्टी में अपने उत्तराधिकारी को स्थापित कर दिया है। उन्होंने शिवमोगा के शिकारीपुरा सीट से बेटे विजयेंद्र को टिकट दिलवाया और जीत हासिल की। शिकारीपुरा से खुद येदियुरप्पा 8 बार जीतकर विधायक रह चुके हैं। इसके बाद उन्होंने विजयेंद्र को संगठन में शीर्ष पद पर काबिज किया। येदियुरप्पा के बड़े बेटे राघवेंद्र शिवमोग्गा से सांसद हैं। पार्टी ने भी पिछले विधानसभा चुनाव से सबक लेते हुए येदियुरप्पा की मांगें मान ली है।

बीजेपी ने येदियुरप्पा को साधने के लिए बसवराज पाटिल, बसनगौड़ा पाटिल और सी टी रवि के ऊपर पहली बार विधायक बने विजयेंद्र को तरजीह दी। विजयेंद्र अगले तीन साल तक कर्नाटक में बीजेपी की कमान संभालेंगे। अब पार्टी विधानसभा में वोक्कालिगा विधायक को नेता प्रतिपक्ष बनाएगी। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी 6 साल पुरानी सामाजिक-आर्थिक सर्वे रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस को घेरने वाली है। सिद्धारमैया के लिए अब दोहरी चुनौती है, रिपोर्ट जगजाहिर किया तो जाति नाराज होगी। नहीं किया तो आलाकमान नाराज हो जाएगा।

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