नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान 141 सांसदों को लोक सभा और राज्य सभा से निलंबित किया गया है। इसे लेकर सियासत तेज है। अब तक लोक सभा से 95 और राज्य सभा से 46 सांसदों को सस्पेंड किया जा चुका है। निलंबन पर विपक्ष के सांसदों का कहना है कि संसद की सुरक्षा में चूक के बाद इस मामले में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बयान की मांग को दबाने के लिए सांसदों को निलंबित किया गया है। अब बात आती है कि सांसदों के सस्पेंड होने के बाद उनके पास कितनी पावर बचती है। उनके अधिकारों, सैलरी और भत्तों में कितनी कटौती होती है, सस्पेंशन कैसे खत्म होता है? तो आइए जानते हैं ऐसे ही कई सवालों के जवाब…
क्यों किया जाता है सांसदों को निलंबित?
सदन में सभापति के मना करने के बाद भी लगातार हंगामा करने या सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने पर सांसदों को निलंबित किया जा सकता है। निलंबन सभापति के द्वारा किया जाता है लेकिन निलंबन कितने दिनों के लिए होगा ये संसद के रूल बुक के हिसाब से तय किया जाता है।
नियम 374 के अनुसार कोई सदस्य अध्यक्ष के आधिकार की अवहेलना करता है तो वो सदस्य को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर सकते हैं। इस सत्र के दौरान ऐसा ही हुआ है। सांसदों को शीतकालीन सत्र के शेष कार्यवाही से निलंबित किया गया है।
निलंबन के बाद सांसद क्या कर सकते हैं क्या नहीं?
संसद से निलंबन के बाद सांसद सदन कक्ष में प्रवेश नहीं कर सकते। इसके अलावा उन्हें अलग-अलग समितियों की होने वाली बैठकों में शामिल होने की अनुमति नहीं होती है। वो किसी तरह की चर्चा का हिस्सा भी नहीं बन सकते हैं। निलंबित सांसद के पास किसी को नोटिस देने का अधिकार भी नहीं होता है।साथ-ही-साथ वो अपने सवालों के जवाब मांगने का अधिकार भी खो देते हैं। सस्पेंडेड सांसद सरकार से सवाल नहीं कर सकते हैं।
निलंबन के बाद भत्ते और सैलरी पर कितना असर पड़ता है?
अक्सर ऐसा होता है कि किसी सरकारी अधिकारी के सस्पेंड होने के बाद उसकी आधी सैलरी ही उसे मिलती है, यानी निलंबन के बाद आधी सैलरी काट ली जाती है। सांसदों के केस में ऐसा नहीं होता है। सरकारी कर्मचारी की तरह उनकी सैलरी नहीं काटी जाती है। लेकिन निलंबन के बाद संसद सदस्य को दैनिक भत्ते का भुगतान नहीं किया जाता है। क्योंकि इस भत्ते के लिए उन्हें लोकसभा/राज्यसभा सचिवालय में रखे रजिस्टर में हस्ताक्षर करना होता है।
आसान भाषा में समझिए, सांसदों को वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 के तहत कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। एक सांसद को एक लाख रुपए वेतन के अलावा कई तरह के भत्ते मिलते हैं। इन भत्तों में सदन की कार्यवाही में शामिल होने के लिए मिलने वाला भत्ता भी शामिल है। जब कोई सांसद सदन से निलंबित होता है तो उसे सदन की कार्यवाही में शामिल होने के लिए मिलने वाला भत्ता नहीं दिया जाता है। बाकी के भत्तों और सैलरी में किसी प्रकार की कोई कटौती नहीं होती है।
क्या पहले भी खत्म हो सकता है सस्पेंशन?
सांसदों का सस्पेंशन यूं तो पूरे सत्र के लिए होता है लेकिन अगर वो चाहे तो निलंबन खत्म करने के लिए कोशिश कर सकते हैं। निलंबित सांसद माफी मांग लें तो उनके निलंबन को खत्म करने पर विचार किया जा सकता है। अगर सभापति को उनकी गलती माफी योग्य लगती है तो माफी मांगने पर निलंबन समय से पूर्व खत्म किया जा सकता है।






