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Home राज्य

पंचायत, प्रधान और कट्टर ईमानदार…?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 20, 2025
in राज्य, विशेष
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  • विकास की दौड़ से पीछे छूटता अंतिम व्यक्ति
  • विकास योजनाओं को पलीता लगाते कट्टर ईमानदार
  • अंतिम संस्कार के इंतजार में अंत्येष्टि स्थल और श्मशान भूमि

सतीश मुखिया


मथुरा : उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव वर्ष 2026 की उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा तैयारियां शुरू हो चुकी है और पंचायत द्वारा कुछ ही समय में बस्तो को जिला मुख्यालय में जमा कर दिया जाएगा। इन चुनाव को लेकर गांव/पंचायतो में उत्सव जैसा माहौल है। स्थानीय राजनीति में उठा पटक शुरू हो चुकी है। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगना शुरू कर दिया गया है और हारे हुए प्रत्याशी वर्तमान प्रधान, प्रधान पति, प्रधान पुत्र, प्रधान देवर, प्रधान प्रतिनिधियों की शिकायतों का पुलिंदा लेकर जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन, जांच हेतु मांगे कर रहे हैं।

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सभी प्रतिनिधि अपनी सुविधा अनुसार पंचायत के पदों को संरक्षित करवा रहे हैं लेकिन इन सब के बीच जिस मतदाता/ जनता के लिए इस चुनाव को होना है। वह मौन साधकर इन सब कलाबाजियों को देख रहा है क्योंकि उसे पता है कि जब चुनाव आएगा तब मुझे चुपचाप से मतदान केंद्र पर जाकर मत पत्र पर अपनी मोहर लगा देनी है, मना किसी को नहीं करना है क्योंकि यह चुनाव स्थानीय है और दुश्मनी, रंजिश कौन मौल ले। इसमें भागीदार भैया, भाभी, चाची, चाचा, ताऊ ताई और बचपन में साथ खेले मित्र ही तो हैं लेकिन इन सब के बीच कुछ ऐसे मौका परस्त लोग भी हैं जो बेसब्री से इस पर्व का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यही तो चुनावी सीजन है, वैसे तो देसी पीके गुजारा हो जाता है लेकिन चुनाव में बढ़िया अंग्रेजी पीने को मिलेगी और 15 दिन ठाट का जीवन कुछ रहेगा। इसी में तो अगले 5 साल की भरपाई करनी है और कुछ अपनी व्यक्तिगत रंजिश निकालने हेतु इस मौके का फायदा उठाने को तैयार बैठे हैं कि बच्चू अब आए हो मेरे चक्कर में, अब तुमको बताऊंगा कि तुमने मेरे साथ कैसा व्यवहार किया वोट तो मेरे पास से ही लेने आओगे ना !

आज भी 70% आबादी के गांवों में निवास करती है। त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने हेतु विभिन्न योजनाओं को लागू किया जा रहा है लेकिन यह योजनाएं धरातल पर लागू नहीं हो पाती। ग्रामीण विकास मंत्रालय, जल मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय द्वारा पंचायतों में रहने वाले निवासियों के सर्वांगीण विकास हेतु पंचायत निधि के रूप में धनराशि आवंटित करते हैं जिससे यह पंचायतें अपना विकास कर सकें और अपने खर्च स्वयं वहन कर सके लेकिन जनपद स्तर से कार्य योजना लागू होने के बाद भूतल पर यह योजनाएं सही तरीके से लागू नहीं हो पाती। पंचायतो के विकास की जिम्मेदारी प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी (सचिव), रोजगार सेवक पंचायत सहायक आदि की होती है लेकिन भाई भतीजाबाद, जाति, धर्म, संप्रदाय और स्थानीय राजनीति विकास को अवरुद्ध मुख्य भूमिका निभाते है ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ, सबका विकास के नारे के साथ समानता का संदेश दे रहे है लेकिन जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा सही तरीके से क्रियावनन ना करने के कारण विकास कार्यों में स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता, स्थायित्व, उत्तरदायित्व, भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता की कमी सामने आ रही है।

पंचायतो के विकास हेतु सरकार द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में चुनाव कराया जाता है लेकिन क्या वास्तव में इस चुनाव प्रक्रिया के तहत चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा जनता की समस्याओं का निराकरण सही तरीके से किया जाता है और वह अपना इन पंचायत के विकास में शत-प्रतिशत योगदान दे पाते हैं। ऐसा नहीं है कि सभी प्रधान गलत है, कुछ प्रधान अलग करना चाहते हैं लेकिन शासन प्रशासन और स्थानीय स्तर पर पूर्ण सहयोग न मिलने के कारण वह इन कार्य योजनाओं को सही तरीके से लागू कर पाने में असमर्थ साबित होते हैं।

आज ग्राम प्रधान होना राजनीतिक रसूख / रुतबा कायम करता है, लेकिन आज के समय में प्रधान के चुनाव में भागीदारी करना बहुत महंगा हो गया है जिससे कई युवा जो पंचायत के लिए कुछ करना चाहते हैं वह इसमें भागीदार नहीं बन पाते वहीं दूसरी ओर प्रधान/ पंचायत के प्रथम व्यक्ति/ प्रतिनिधियों द्वारा अपने चुनावी खर्चों को निकालने हेतु विकास योजनाओं में शासकीय कर्मचारियों के साथ मिलकर अप्रत्यक्ष रूप से हेर फेर को अंजाम देना शुरू कर देते हैं।

परफॉर्मेंस ग्रांट के तहत चयनित पंचायत का अंत्येष्टि स्थल

सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं को चलाया जा रहा है जिसमें मॉडल पंचायत, सौर ऊर्जा, आंगनवाड़ी, स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा, अंत्येष्टि स्थल विकास योजना,पंचायत घरों का निर्माण, पुस्तकालयों का निर्माण, अमृत सरोवर योजना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, स्थानीय बैंक, पोस्ट ऑफिस, पशुपालन/ मछली पालन को बढ़ावा, सामुदायिक शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, नलकूपों की स्थापना, सामुदायिक केंद्र, जल जीवन मिशन, गौशाला, कचरा से कंचन कचरा केंद्र, रोड, नाली आदि का निर्माण कार्य प्रमुख रूप से शामिल है, लेकिन प्रधान, ग्राम सचिव, रोजगार सेवको के द्वारा इन योजनाओं को धरातल पर सही तरीके से क्रियान्वित नहीं किया जाता और इनमें आधे से अधिक योजनाओं को तो सिर्फ कागजो पर दिखाकर पंचायत निधि का दुरुपयोग कर लिया जाता है और मनरेगा के तहत बाहर नौकरी कर रहे स्थानीय निवासियों के फर्जी जॉब कार्ड बनाकर उनके खातों से अंगूठा लगाकर अवैध, फर्जी तरीके से धन निकासी करना एक आम बात है जिसकी विभिन्न पंचायत में लगातार शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं। जिस कारण विभाग को भारी भरकम मात्रा में राजस्व की हानि होती है।

स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक आदर्श ग्राम पंचायत में अटी पड़ी नालियां
स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक आदर्श ग्राम पंचायत में अटी पड़ी नालियां

ऐसा नहीं है कि जिला मुख्यालय में बैठे उच्च अधिकारियों को इन सब मामलों का संज्ञान नहीं होता है लेकिन मेरे दोस्त यह भारत है, यहां कुछ चले या ना चले, लेकिन जुगाड़ जरूर चलता है। सभी अधिकारी और कर्मचारी गलत नहीं है लेकिन कुछ कट्टर ईमानदार अधिकारी अपनी आंखों को बंद कर लेते हैं। जब कोई जागरूक नागरिक इन मुद्दों को लेकर के उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर और सूबे के ग्रामीण विकास मंत्रालय की कमान संभाल रहे केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री, पंचायत राज विभाग के मुख्य विकास अधिकारी, पंचायत राज अधिकारी, डीसी (मनरेगा ), जिला विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी के कार्यालय में इनकी शिकायत करता है तब उनकी नींद खुलती है। वह बार-बार शिकायत करने के बाद जांच कमेटी का गठन करते हैं फिर उसके बाद मौके पर AC कार्यालय से बाहर निकलकर जमीन पर आकर भौतिक सत्यापन करने का कष्ट उठाते हैं और फिर उसके बाद शुरू होती है जांच प्रक्रिया जो जांच लगातार चलती रहती हैं।

इन सब के बीच पंचवर्षीय योजना बदल जाती है और जांच अधिकारियों का तबादला दूसरे जनपदों में हो जाता है । इस बीच उस जागरूक नागरिक को विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित करवाया जाता है लेकिन देशभक्ति के जज्बात में डूबा वह पागल व्यक्ति अपने घर परिवार की ओर ना देखते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाता रहता है और कई बार उसमें अपने प्राणों को न्यौछावर कर काल के गर्त में समा जाता है फिर उसके बाद अगला चुनाव आ जाता है।

देश में भ्रष्टाचार, पारदर्शिता के खिलाफ लड़ाई पुरानी नहीं है लेकिन कैसे जोड़ तोड करके विकास कार्यों की योजनाओं में से धनराशि को निकालना/ खुर्द बुर्ध करके भारत के संघीय ढांचे को कमजोर किया जा रहा है। यह एक यक्ष प्रश्न हम सब भारतीयों के सामने खड़ा है लेकिन हम सब लोग दूसरे के घर में भगत सिंह चाहते हैं अपने घर में नहीं। जब हमारी टीम ने पंचायत में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता को लेकर भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली, मथुरा के कुछ मामले निकलकर सामने आए, यह सिर्फ उदाहरण मात्र है!

ग्राम पंचायत: जुगसना, विकासखंड :बल्देव में विकास कार्यों की जांच करती गरिमा खरे, जिला विकास अधिकारी
ग्राम पंचायत: जुगसना, विकासखंड :बल्देव में विकास कार्यों की जांच करती गरिमा खरे, जिला विकास अधिकारी

Case: 01
ग्राम पंचायत : जुगसना विकासखंड: बल्देव
शिकायतकर्ता : मानसिंह, पूर्व सैनिक
इस पंचवर्षीय योजना के दौरान पंचायत निधि से फर्जी कार्यों के बिलों का भुगतान कर दिया गया है। मनरेगा, स्ट्रीट लाइट और तालाब सफाई के कार्यों में भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमितता है। प्रधान ने स्वयं के निजी खेतों पर पंचायत निधि से बोरिंग करवा ली है। जिला पंचायत कार्यालय में की गई है।

ग्राम पंचायत : लाडपुर महावन विकासखंड : राया में जांच करते मुख्य पशु चिकित्सक डॉक्टर एनके शुक्ला और उनकी टीम

Case: 02
ग्राम पंचायत: लाडपुर महावन
विकासखंड: राया
शिकायतकर्ता: ग्रामवासी
ग्रामवासियों ने आरोप लगाया के प्रधान द्वारा नलों और समर रीबोर के नाम पर लाखों रुपए की पंचायत निधि का हेरफेर किया है। इन्होंने फर्जी बिल बनाकर अवैध फर्म को बिलों का भुगतान भी कर दिया गया है जिसकी शिकायत जिला मुख्यालय में की गई और उसकी जांच डॉक्टर एन के शुक्ला, मुख्य चिकित्सा अधिकारी आदि की टीम कर रही है।

Case : 03
ग्राम पंचायत: ककरारी
विकासखंड : राया
शिकायतकर्त्ता: रेशम पाल सिंह, पूर्व सैनिक

वर्ष 2017 /18 से वर्ष 20/21 के प्रधान रहे लेखराज सिंह के खिलाफ पंचायत निधि से ₹40 लाख अवैध धन निकासी की शिकायत जिला पंचायत कार्यालय में की जिसकी जांच चल रही है ।

Case :04
ग्राम पंचायत : हसनपुर विकासखंड : नोहझील
शिकायतकर्ता: रमेश चंद्र आदि
समाज के अंतिम व्यक्ति हेतु पंचायत द्वारा निर्धारित श्मशान की भूमि पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जे की शिकायत की गई है, जिसकी जांच प्रक्रिया जिला मुख्यालय में लंबित है।

इन पंचायत के विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, फर्जीवाड़ा को लेकर के जब हमारी टीम के द्वारा जिला मुख्यालय में पदस्थ अधिकारियों से दूरभाष पर उनका पक्ष जानना चाहा तब उनमें से कई लोगों का फोन बजता रहा, उठाया नहीं और आउट ऑफ कवरेज एरिया बताता रहा.

सभी ग्राम पंचायतो में कार्य कार्ययोजनाओं के अनुसार हुए हैं अगर किसी ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के खिलाफ शिकायत प्राप्त होती है तब उस ग्राम पंचायत की जिला स्तर से उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। किसी भी दोषी को बक्शा नहीं जाएगा।

गरिमा खरे, जिला विकास अधिकारी, मथुरा

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