देहरादून। बिजली विभाग ने उत्तराखंड में 40 हजार लोगों को नोटिस जारी किया है। कम किलोवाट का बिजली कनेक्शन लेकर अधिक लोड इस्तेमाल करने वालों की ऊर्जा निगम ने धरपकड़ शुरू कर दी है। इस क्रम में निगम ने पूरे उत्तराखंड में 40 हजार लोगों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
दरअसल ऊर्जा निगम की पड़ताल में सामने आया कि एक किलोवाट का कनेक्शन लेने वालों के घर में तीन से पांच किलोवाट तक लोड का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में ऊर्जा निगम ने ऐसे सभी लोगों को अपने घरों, दुकानों, संस्थाओं का लोड बढ़ाने को कहा गया है।
ऐसा नहीं कराए जाने पर इनके खिलाफ कार्रवाई होगी। राजस्व वसूली में लगी ऊर्जा निगम की टीम घरों, दुकानों और व्यावसायिक संस्थानों के साथ उद्योगों में लोड की भी जांच रही है। इसके तहत कम लोड का कनेक्शन लेकर ज्यादा बिजली खर्च करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है।
अभी तक ऐसे 40 हजार मामले सामने आ चुके हैं। निगम ने इन सभी को तीन बिल के बाद नोटिस जारी कर रहा है। पांचवे बिल के बाद भी यदि लोड नहीं बढ़ाया जाता, तो ऊर्जा निगम छठे बिल में सीधे अपने स्तर पर लोड बढ़ाकर वसूली कर रहा है।
अकेले दून के मोहनपुर जैसे एक डिवीजन में एक हजार से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। दरअसल, कम लोड के कनेक्शन लेकर ज्यादा बिजली खर्च करने वालों से निगम को डबल नुकसान हो रहा है। एक तो राजस्व का नुकसान हो रहा है, दूसरा लोड सिस्टम भी गड़बड़ा रहा है।
निगम मांगेगा अधिकार
ऊर्जा निगम, विद्युत नियामक आयोग से उक्त मामलों में अब सीधे लोड बढ़ाने का हक मांगने जा रहा है। अभी ऐसे मामलों में लोड बढ़ाने की प्रक्रिया लंबी है।
प्रति किलोवाट का रेट
यदि उपभोक्ता का कनेक्शन एक किलोवाट का है, तो उसे प्रतिमाह 60 रुपये का फिक्स चार्ज देना होता है। दो से चार किलोवाट तक यह दर 70 रुपये प्रति किलोवाट है। चार किलोवाट वाले व्यक्ति को प्रतिमाह 280 रुपये देने होते हैं। पांच या इससे अधिक किलोवाट लोड पर रेट 80 रुपये/किलोवाट है। पांच किलोवाट वाले उपभोक्ता को हर महीने 400 रुपये फिक्स चार्ज के देने होते हैं।
लोड सिस्टम गड़बड़ाने से करोड़ों का नुकसान
लोड सिस्टम गड़बड़ाने से ऊर्जा निगम को हर महीने करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। निगम के 27 लाख उपभोक्ता हैं। यदि किसी एक उपभोक्ता ने एक किलोवाट का कनेक्शन लेकर तीन किलोवाट का इस्तेमाल किया तो प्रतिमाह 150 रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
इस हिसाब से अभी तक की जांच में सामने आए 40 हजार मामलों की बात करें तो इनसे निगम को प्रतिमाह 60 लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है। निगम का आकलन है कि प्रदेश में लोड में गड़बड़ी करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या पांच लाख तक हो सकती है। ऐसे में नुकसान का आंकड़ा प्रतिमाह सात करोड़ से अधिक हो सकता है।







