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नर्सिंग कॉलेज घोटाले में सबसे बड़ा ट्विस्ट, जांच करने वाला CBI अफसर भी घोटाले में था शामिल

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 23, 2024
in जुर्म, राज्य
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CBI
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भोपाल। मध्य प्रदेश के इतिहास में संभवत पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी जांच के दौरान जांच अधिकारी पर ही जांच चलने लगी। न सिर्फ जांच चली बल्कि उसे गिरफ्तार करके जेल की हवा खानी पड़ रही है। जानकारी के मुताबिक सीबीआई ने अपने ही इंस्पेक्टर राहुल राज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और उसे बर्खास्त करने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। राहुल राज पर आरोप है कि उसने फर्जी नर्सिंग कॉलेज की अनुमति के लिए 10 लाख रुपए की रिश्वत ली।

सीबीआई अफसर भी घोटाले में शामिल

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जानकारी मिली है कि राहुल राज ऐसे 60 कॉलेजों की जांच में शामिल थे। अब बाकी कॉलेज भी जांच के दायरे में आ गए हैं। शिकायत के आधार पर दिल्ली सीबीआई ने भोपाल, इंदौर और रतलाम से 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। कई आरोपियों की तलाश अभी जारी है। सीबीआई के एक डीएसपी, तीन इंस्पेक्टर समेत अन्य सीबीआई अफसरों को मिलाकर कुल आरोपियों की संख्या 23 हो चुकी है। राहुल राज को बर्खास्त कर दिया गया है। डीएसपी आशीष प्रसाद का तबादला किया गया है। आरोपी डीएसपी आशीष प्रसाद और इंस्पेक्टर रिषिकांत असाठे भोपाल में रहते हैं। इससे पहले सीबीआई इंस्पेक्टर राहुल राज और सुशील कुमार मजोका गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

राहुल राज के घर से तलाशी में 7 लाख 88 हजार कैश और 2 गोल्ड के बिस्किट भी बरामद किए गए हैं। सीबीआई अफसर को रिश्वत देने वाले भोपाल स्थित मलय कॉलेज ऑफ नर्सिंग के चेयरमैन अनिल भास्करन, प्रिंसिपल सुमा भास्करन और एक दलाल सचिन जैन को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने दो सीबीआई निरीक्षक समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा है। इसके अलावा रतलाम नर्सिंग कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल जुगल किशोर शर्मा और भाभा कॉलेज भोपाल के प्रिंसिपल जलपना अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए एक अन्य आरोपी रविराज भदोरिया के ठिकाने से सीबीआई ने 84.65 लाख रुपये की जब्ती की है। जबकि प्रीति तिलकवार के ठिकाने से करीब 1 लाख रुपये और डायरी मिली हैं।

जानिए पूरा मामला

मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाला साल 2020 में सामने आया थ। एक शिकायत से पता चला कि स्टेट नर्सिंग काउंसिल ने कई ऐसे कॉलेजों को मान्यता दी हुई है, जो सिर्फ कागजों में चल रहे हैं। इन कॉलेजों के जरिए बिना किसी प्रैक्टिकल और प्रैक्टिस के डिग्रियां बांटी जा रही थीं। कई जगह 8-8 कॉलेज की एक ही प्रिंसिपल थी। 2022 की शुरुआत में मध्य प्रदेश के 55 नर्सिंग कॉलेजों में गड़बड़ी की जांच करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने राज्य के सभी 364 नर्सिंग कॉलेजों की जांच सीबीआई को सौंप दी। इसी साल सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने नर्सिंग कॉलेज घोटाले में जांच शुरू की।

7 जनवरी 2024 को सीबीआई ने बंद लिफाफे में हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की। सीबीआई ने जो रिपोर्ट पेश की, उसमें नर्सिंग कॉलेजों को 3 कैटेगरी में बांटा। सूटेबल, डिफिशिएंट और अनसूटेबल। सीबीआई ने 308 में 169 कॉलेज को सूटेबल बताते हुए क्लीन चिट दे दी। इस जांच में 169 कॉलेजों को सूटेबल, 73 नर्सिंग कॉलेजों को डिफिसेंट और 66 को अनसूटेबल बताया गया। मामले में व्हिसल ब्लोअर रवि परमार का आरोप है कि सीबीआई के अफसर के साथ मिलकर नर्सिंग के संचालकों ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर क्लीन चिट ली। सीबीआई ने इसी शिकायत के आधार पर जांच की और सीबीआई के इंस्पेक्टर और अन्य अफसर रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए।

रवि परमार ने किया पर्दाफाश

सूटेबल कॉलेजों की लिस्ट सार्वजनिक होते ही इसकी पड़ताल की गई। एनएसयूआई के अध्यक्ष रवि परमार ने शिकायत की कि जिन कॉलेजों को सीबीआई ने सूटेबल घोषित किया है वो नियमों के खिलाफ हैं। मामले में जांच हुई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मामले में टाइम्स नाउ नवभारत की टीम ने रवि परमार के साथ मामले की पड़ताल की। हम एक ऐसे कॉलेज में पहुंचे जिसे सीबीआई के अफसरों ने क्लीन चिट दी थी कॉलेज का नाम था ‘एपीएस एकेडमी ऑफ नर्सिंग’। कॉलेज में जाकर पता चला कि यहां तो स्कूल संचालित हो रहा था। हालांकि छुट्टियों के चलते स्कूल बंद है। लेकिन स्कूल की ऊपरी मंजिल पर नर्सिंग कॉलेज होने के साक्ष्य मिले। रवि परमार का आरोप है कि जिस कॉलेज को सीबीआई ने मान्यता के लिए उपयुक्त माना है, वो नियमों का पालन नहीं करता। इतना ही नहीं, आने वाले समय में जिस कॉलेज का निरीक्षण होना है, उस कॉलेज के बोर्ड इस जगह लगे पाए गए जिसका नाम था केपी मेमोरियल नर्सिंग कॉलेज। यानि एक ही जगह पर कई नर्सिंग कॉलेज होने के आरोपों का ये सीधा सीधा सबूत है।

इस घोटाले का सबसे बड़ा असर गरीब छात्रों पर

तीन साल से नर्सिंग की परीक्षाएं नहीं हुई हैं। छात्रों का क्या कसूर जिन्होंने साल 2021 में एडमिशन लिया था। 4 साल का नर्सिंग का कोर्स करते हुए इन बच्चों को 3 साल हो चुके हैं लेकिन तकनीकी रूप से ये फर्स्ट ईयर में ही हैं। यानि अगर इस साल परीक्षा हुई भी तो इनका कोर्स 7 साल में पूरा होगा। तीन साल बर्बाद होने का जिम्मेदार कौन होगा ये बड़ा सवाल है। ये छात्र या तो निम्न मध्यम वर्ग के हैं या किसी के माता पिता गरीब किसान हैं। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और उप मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए राजेंद्र शुक्ला का कहना है कि सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है।

कांग्रेस ने कहा, आंख मूंदे बैठी रही सरकार

कांग्रेस ने इस मामले में आरोप लगाया है कि बड़े नेता अफसर इस मामले में लिप्त हैं। सरकार की नाक के नीचे घोटाला होता रहा और सरकार आंख मूंद कर बैठी है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ चल रहा है। इसका जिम्मेदार आखिर कौन है। जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाना चाहिए। भले ही सरकार और विभाग मामले को दबाने में लगे हों, लेकिन सीबीआई के अधिकारियों पर सीबीआई के ही अधिकारियों की कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि दाल में बहुत कुछ काला है। और अगर सही तरह से जांच हो गई तो कई परतें खुल सकती हैं और कई रसूखदार बेपर्दा हो सकते हैं। हैरानी की बात ये है कि हाईकोर्ट के आदेश और सीबीआई की जांच के बावजूद ये फर्ज़ीवाड़ा धड़ल्ले से चलता रहा।

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