नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बिजली पर बहस के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने लाया है. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि 100 शीर्ष बिजली बिल बकाएदारों पर बिजली विकास विभाग (पीडीडी) का 1410.45 करोड़ रुपये बकाया है. इनमें से सरकारी विभागों, औद्योगिक इकाइयों, अर्ध-सरकारी संगठनों और निजी संस्थानों पर बिजली विकास विभाग का लगभग 1,370 करोड़ रुपये बकाया है.
यह जानकारी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में निर्दलीय विधायक शेख खुर्शीद को लिखित जवाब में दी. सरकार ने विधानसभा को यह भी बताया कि बिजली खरीद की लागत सालाना 7,500 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है, लेकिन बिजली विभाग में जम्मू-कश्मीर का राजस्व प्राप्ति केवल 3,500 करोड़ रुपये है. उमर अब्दुल्ला के पास ही प्रदेश का बिजली विभाग है.
सबसे ज्यादा किस विभाग पर बकाया?
शीर्ष-10 प्रमुख डिफॉल्टरों में सुंबल डिवीजन में बाबा जंगी लिफ्ट सिंचाई योजना शामिल है, जिस पर 63.78 करोड़ रुपये बकाया है. मुख्य अभियंता सलाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक, एनएचपीसी, सब-डिवीजन रियासी में 56.96 करोड़ रुपये; एक्सईएन पीएचई सोपोर, सुंबल डिवीजन में 45.84 करोड़ रुपये; मुख्य अभियंता, जेएंडके मिनरल्स लिमिटेड, सब-डिवीजन राजौरी- II में 42.43 करोड़ रुपये; राजपोरा लिफ्ट सिंचाई एडब्ल्यूपी स्टेज 1 और 2, अवंतीपोरा में 39.83 करोड़ रुपये बकाया हैं.
जबकि सांबा नगर निगम के स्ट्रीटलाइट अनुभाग पर 39.53 करोड़ रुपये बकाया है. सुंबल डिवीजन में जलालीगुंड तुलारज़ू पर 31.76 करोड़ रुपये बकाया है. सुंबल डिवीजन में 31.66 करोड़ रुपये के साथ शादिपोरा दूसरे स्थान पर है और पीएचई पंजतूत पर जौरियन सब डिवीजन में 27.88 करोड़ रुपये बकाया है.
विधानसभा को यह भी बताया गया है कि अभी तक 2,75,081 पीडीडी उपभोक्ताओं ने चल रही बिजली माफी योजना के तहत पंजीकरण कराया है, इनमें से 1,60,507 उपभोक्ता जम्मू से और 1,14,574 कश्मीर से हैं. प्रदेश में बिजली माफी योजना जारी रहेगा.
किस विभाग पर कितना बकाया?
बिजली बिल का भुगतान न करने वाले अन्य लोगों में श्रीनगर नगर निगम (16.82 करोड़ रुपये), डीआईजी पुलिस कश्मीर (16.21 करोड़ रुपये), कैंप कमांडेंट माइग्रेंट कैंप 03 (12.34 करोड़ रुपये), पुलिस लाइंस के लिए एसपी बडगाम (11.48 करोड़ रुपये), ममल के पास सीआरपीएफ कैंप पहलगाम (9.46 करोड़ रुपये), कमांडेंट सीआरपीएफ 44 बीएन (8.60 करोड़ रुपये), एसएसपी अनंतनाग (8.56 करोड़ रुपये), चीफ इंजीनियर बीएचईपी (8.12 करोड़ रुपये), कैंप कमांडेंट माइग्रेंट कैंप 02 (5.85 करोड़ रुपये); मैनेजर हरि निवास पैलेस (4.87 करोड़ रुपये); कैंप कमांडेंट माइग्रेंट कैंप (4.63 करोड़ रुपये); उपखंड कठुआ में पीएचई विभाग (4.25 करोड़ रुपये) और उपखंड किश्तवाड़ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (3.79 करोड़ रुपये) शीर्ष 100 पीडीडी बिल डिफॉल्टरों में शामिल हैं.
20,000 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता होने के बावजूद, जम्मू और कश्मीर वर्तमान में विभिन्न निगमों के माध्यम से केवल 3,500 मेगावाट बिजली पैदा करता है. उपभोक्ता मांग को पूरा करने के लिए, प्रशासन को राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) और अन्य बिजली निगमों जैसी केंद्रीय संस्थाओं से सालाना सैकड़ों करोड़ रुपये की बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है.







